सरकार के विदेशी एयरलाइनों में भारतीयों की भर्ती पर नियंत्रण के प्रस्ताव के विरोध में पायलट संघ

भारतीय विमान चालक संघ ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय की उस सिफ़ारिश का विरोध किया है जिसमें विदेशी एयरलाइनों द्वारा भारतीय विमानन पेशेवरों की भर्ती पर नियंत्रण की बात कही गई है. संघ ने कहा कि यह प्रस्ताव बिना परामर्श के आगे बढ़ाया गया और इससे पायलटों की स्वतंत्रता व सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.

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नई दिल्ली: भारतीय विमान चालक संघ (ALPA-India) ने गुरुवार (23 अक्टूबर) को नागरिक उड्डयन मंत्रालय की उस सिफारिश पर कड़ा ऐतराज़ जताया है, जिसमें मंत्रालय ने इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइज़ेशन (आईसीएओ) से कहा है कि विदेशी एयरलाइनों द्वारा भारतीय विमानन पेशेवरों की भर्ती पर नियंत्रण रखा जाए.

अपने बयान में भारतीय विमान चालक संघ ने बताया कि मंत्रालय ने ‘प्रैक्टिसेज़ इम्पैक्टिंग ऑर्डरली कंडक्ट ऑफ इंटरनेशनल सिविल एविएशन’ शीर्षक से एक वर्किंग पेपर मॉन्ट्रियल में 23 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच हुई आईसीएओ की 42वीं बैठक में प्रस्तुत किया था.

विमान चालक संघ ने सरकार से इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है, इसे ‘गंभीर रूप से चिंताजनक’ बताया है क्योंकि यह भारतीय पायलट संघों या कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से बिना किसी सलाह-मशविरा के आगे बढ़ाया गया था.

विमान चालक संघ ने चेतावनी दी कि यह प्रस्ताव भारतीय पायलटों को एक ही एयरलाइन में रखने की व्यवस्था को संस्थागत रूप दे सकता है, जहां सेवा शर्तें एकतरफा और लगातार बदलती रहेंगी. इससे पायलटों को बेहतर अवसर या उचित वेतन पाने की स्वतंत्रता से वंचित किया जा सकता है.

संघ ने कहा, ‘प्रतिकूल शर्तों के तहत जबरन रोके जाने से पायलटों में मानसिक तनाव बढ़ सकता है, जिससे उड़ान सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न होगा. रोज़गार से जुड़ा फैसला व्यक्ति का होना चाहिए, न कि सरकार का.’

विमान चालक संघ ने इससे पहले 8 अगस्त को अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी थी. संघ के महासचिव कैप्टन अनिल राव ने कहा, ‘हम आज मीडिया के साथ अपनी रिपोर्ट का विवरण साझा कर रहे हैं.’