विशाखापत्तनम: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने रविवार (2 नवंबर) को सहयोगी दलों के एक संयुक्त मोर्चे का नेतृत्व करते हुए चुनाव आयोग पर विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के ज़रिए ‘असल मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश’ का आरोप लगाया है.
40 क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों की एक बहुदलीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्टालिन ने इस प्रक्रिया की निंदा की और दावा किया कि यह बिहार में हुई इसी तरह प्रक्रिया पर आधारित है, जहां नागरिकों को मताधिकार से वंचित कर दिया गया है.
उन्होंने कहा, ‘मतदान लोकतंत्र की आत्मा है, और यह अधिकार खतरे में है.’
उन्होंने आगे जोड़ा, ‘हम सुधारों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन एसआईआर… तमिलनाडु सहित कई राज्यों में लागू किया जा रहा है. तमिलनाडु की आपत्तियों को सामने रखना समय की मांग है.’
मुख्यमंत्री के सहयोगियों ने इस आरोप को और विस्तार से बताते हुए एसआईआर को चुनावी निष्पक्षता पर बहुआयामी हमला और भाजपा की साजिश बताया.
द्रविड़ कषगम के अध्यक्ष के. वीरमणि ने तर्क दिया कि इस प्रक्रिया का कोई कानूनी आधार नहीं है और कहा कि ‘संविधान में पूरे राज्य में एसआईआर कराने का कोई प्रावधान नहीं है.’
इस बीच, अन्य नेताओं ने दावा किया कि यह मतदाताओं को प्रभावित करने की एक सोची-समझी रणनीति है.
एमडीएमके महासचिव वाइको ने आरोप लगाया कि यह संशोधन बाहरी लोगों को मताधिकार से वंचित करने की भाजपा की एक साजिश है.
उन्होंने चेतावनी दी, ‘अगर एसआईआर को अनुमति दी गई, तो दूसरे राज्यों के 75 लाख से ज़्यादा मतदाता तमिलनाडु के चुनाव में मतदान करेंगे.’
वहीं, मुख्य विपक्षी दल, अन्नाद्रमुक ने इस प्रक्रिया में शामिल होने का फैसला किया है.
महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने रविवार को अपनी पार्टी के पदाधिकारियों को चुनाव आयोग द्वारा घोषित एसआईआर पर कड़ी नज़र रखने और इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का निर्देश दिया.
हालांकि, द्रमुक गठबंधन के नेता अपने विरोध पर अड़े रहे.
वीसीके नेता थोल. थिरुमावलवन ने जन कार्रवाई का आह्वान करते हुए कहा, ‘हमें लोगों में जागरूकता पैदा करने की ज़रूरत है… हमें कम से कम एसआईआर पर अपनी आपत्ति व्यक्त करने के लिए एक प्रदर्शन आयोजित करना चाहिए.’
गौरतलब है कि इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी राज्य की मतदाता सूची के विवादास्पद विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ 4 नवंबर को कोलकाता में एक विरोध मार्च के नेतृत्व का ऐलान किया है.
मालूम हो कि बिहार के बाद पश्चिम बंगाल दूसरा ऐसा राज्य है जहां यह विवादास्पद प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
उल्लेखनीय है कि भारतीय निर्वाचन आयोग ने 28 अक्टूबर से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रव्यापी एसआईआर की घोषणा की है.
