दिल्ली: ज़हरीली हवा पर एम्स की घर के अंदर रहने की सलाह, पर क्या ऐसा करना सबके लिए मुमकिन है?

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने के बीच एम्स (दिल्ली) ने पब्लिक हेल्थ एडवाइजरी जारी कर नागरिकों को घर के अंदर रहने, एन 95 मास्क पहनने और एयर प्यूरीफायर लगाने की सलाह दी है. लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसे उपायों को अपनाना निम्न आय वर्ग और ग़रीब तबके के लिए मुमकिन हैं?

एम्स-दिल्ली के सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. हर्षल रमेश साल्वे ने सुझाव दिया कि अगर संभव हो तो एयर प्यूरीफायर लगवाएं. हालांकि एयर प्यूरीफायर की कीमत कई आम लोगों के लिए उनकी लगभग 15 दिन की मज़दूरी या कई जगह महीने भर की कमाई के बराबर है. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली ने तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण, खासकर राष्ट्रीय राजधानी में बिगड़ती हवा की स्थिति को देखते हुए एक पब्लिक हेल्थ एडवाइज़री जारी की है.

हालांकि, एम्स ने इस संकट की गंभीरता को थोड़ा हल्का करते हुए कहा है, ‘हम जिस हवा में सांस लेते हैं, वह बदल रही है.’

सोशल मीडिया मंच एक्स पर एम्स-दिल्ली द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो संदेश में, सामुदायिक चिकित्सा केंद्र (सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन) के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. हर्षल रमेश साल्वे ने जहरीली हवा से बचने के कई तरीकों की जानकारी दी है.

वे कहते हैं, ‘हम पूरे दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ता हुआ देख रहे हैं.’ फिर वे पहला सुझाव देते हुए कहते हैं, ‘जब प्रदूषण का स्तर सबसे ज़्यादा हो, तब घर के अंदर रहें. सुबह-सुबह लगभग 8:30 या 9 बजे तक प्रदूषण का स्तर बहुत ऊंचा होता है, इसलिए इस समय बाहर न निकलना बेहतर है.’

वीडियो में डॉ. साल्वे ने आगे कहते हैं कि लोग आउटडोर एक्सरसाइज़ (बाहर व्यायाम) की बजाय इनडोर वर्कआउट (घर या जिम में व्यायाम) करें, और अगर संभव हो तो एयर प्यूरीफायर लगवाएं.

डॉ. साल्वे ने यह भी सुझाव दिया कि लोगों को ‘भारी ट्रैफ़िक’ और ‘भीड़भाड़ वाले इलाकों’ में पैदल चलने या साइकिल चलाने से बचना चाहिए, हफ़्ते में कम से कम एक दिन ‘पेट्रोलियम-फ्री डे’ रखना चाहिए, और हवा में मौजूद ज़हरीले कणों से बचाव के लिए एन- 95 मास्क पहनना चाहिए.

क्या इन सलाहों पर अमल करना, सभी के लिए मुमकिन है?

ये सुझाव किसी व्यक्ति को ज़हरीली हवा से कुछ हद तक बचा सकते हैं, लेकिन द वायर की एक पिछली रिपोर्ट में बताया गया था कि दिल्ली की बड़ी आबादी, जो गरीब है, उसके लिए ऐसे बचाव के उपायों को अपनाना मुमकिन नहीं हैं.

कई लोगों के लिए एक साधारण एयर प्यूरीफायर की कीमत लगभग 15 दिन की मज़दूरी के बराबर है, इसलिए यह उनके लिए एक ऐसी चीज़ बन जाती है जिसे खरीद पाना लगभग नामुमकिन है.

भीषण संकट के तात्कालिक उपाय

एम्स की सलाह में वायु प्रदूषण जैसे भीषण संकट के लिए छोटे और तात्कालिक उपायों पर ज़्यादा ज़ोर दिया गया है, जो राजधानी में हर साल दोहराए जाने वाले इस संकट का हल नहीं कर सकते हैं.

खास बात यह है कि 28 अक्टूबर को दिल्ली में पहली बार क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश कराने की तकनीक) का परीक्षण किया गया. इसके लिए कानपुर से एक विशेष विमान उड़ान भरकर दिल्ली के कुछ इलाकों, जैसे- बुराड़ी और करोल बाग के ऊपर यह परीक्षण किया गया.

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के मुताबिक, ऐसे कम से कम नौ परीक्षण करने की योजना बनाई गई थी.

हालांकि, अब तक इस प्रक्रिया से बारिश नहीं हुई है.

आज (6 नवंबर, 2025) क्या स्थिति है?

दिल्ली में बुधवार को एक संक्षिप्त राहत के बाद, गुरुवार 6 नवंबर को वायु गुणवत्ता फिर से तेजी से गिर गई. सुबह के समय राष्ट्रीय राजधानी की समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 264 से 287 के बीच रही, जो ‘खराब’ श्रेणी में है.

हालांकि, शहर के कई इलाकों में स्थिति और भी बदतर रही, जहां एक्यूआई ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गया. सुबह शहर पर धुंध की एक पतली परत छाई रही.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के 38 निगरानी केंद्रों में से 28 केंद्रों ने 300 से अधिक एक्यूआई दर्ज किया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है. बवाना में एक्यूआई 337 तक पहुंच गया, जबकि आईटीओ में 287-290, नरेला में 294, और अनंद विहार जैसे प्रदूषण हॉटस्पॉट में एक्यूआई 400 के करीब रहा.

वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली ने चेतावनी दी है कि 6 से 8 नवंबर तक प्रदूषण स्तर ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बना रहेगा. हवा की गति दोपहर में उत्तर-पश्चिम दिशा से 15 किमी प्रति घंटे तक बढ़ने के बाद शाम और रात में 10 किमी प्रति घंटे से नीचे गिर जाएगी, जिससे प्रदूषक तत्व जमा होंगे.

प्रमुख प्रदूषकों में पीएम2.5 और पीएम10 शामिल हैं. इस हवा में सांस लेना प्रति दिन लगभग 9.5 सिगरेट पीने के बराबर है.

दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान-2 के तहत प्रदूषण नियंत्रण उपाय तेज किए हैं, जिसमें 200 सफाई वाहनों से सड़कों की सफाई, औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण, और प्रदूषणकारी वाहनों की जांच शामिल है.

बुधवार को एक्यूआई 202 तक गिर गया था, जो पांच वर्षों में नवंबर का सबसे अच्छा स्तर था. लेकिन यह राहत अस्थायी साबित हुई.

दीपावली के बाद बिगड़े हालात

एनसीआर में दीपावली (20 अक्टूबर) के बाद वायु प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ गया, जैसा हर साल इस समय के आसपास होता है.

इस साल सुप्रीम कोर्ट ने ‘ग्रीन पटाखों’ के इस्तेमाल की अनुमति दी थी, जो सामान्य पटाखों की तुलना में लगभग 30% कम धुआं या उत्सर्जन करते हैं.
दीपावली के अगले दिन, दिल्ली के ज़्यादातर इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 400 से ऊपर दर्ज किया गया, यानी ‘गंभीर’ (सिवियर) श्रेणी में, जो एक्यूआई स्केल का सबसे आख़िरी और ख़तरनाक स्तर है.

रिपोर्टों के मुताबिक़, 21 अक्टूबर की सुबह 7 बजे शहर का औसत एक्यूआई 451 था. इसके चलते 19 अक्टूबर से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (जीआरएपी) के दूसरे चरण के तहत आपातकालीन कदम लागू कर दिए गए हैं.

दीपावली के बाद कई दिनों तक हवा की गुणवत्ता ‘बहुत ख़राब’ श्रेणी (यानी 300 से ऊपर) में बनी रही. इसके बाद थोड़ा सुधार हुआ और यह ‘ख़राब’ श्रेणी में आ गई.