रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की संख्या तेज़ी से बढ़कर 44 हुई

विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि रूसी सेना में सेवा दे रहे भारतीयों की संख्या सितंबर के 27 से बढ़कर 44 हो गई है. नई दिल्ली ने मॉस्को से भारतीयों को रिहा करने और भारतीय नागरिकों की भर्ती प्रक्रिया बंद करने का आग्रह किया है.

फ़ाइल तस्वीर: यूक्रेन में रूसी सेना के सैनिक. (फ़ोटो: स्क्रीनशॉट-Mil.ru/Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0)

नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (7 नवंबर) को बताया कि रूसी सेना में सेवा दे रहे भारतीयों की संख्या सितंबर में 27 से बढ़कर 44 हो गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली ने मास्को से भारतीयों को रिहा करने और भारतीय नागरिकों की भर्ती प्रक्रिया बंद करने का आग्रह किया है.

इस संबंध में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि हाल के महीनों में रूसी सैन्य इकाइयों द्वारा कई भारतीयों की भर्ती की गई है.

उन्होंने कहा, ‘हमारी जानकारी के अनुसार वर्तमान में 44 भारतीय नागरिक रूसी सेना में सेवारत हैं. हमने एक बार फिर रूसी अधिकारियों के समक्ष यह मामला उठाया है, ताकि उन्हें जल्द से जल्द रिहा किया जा सके और इस भर्ती प्रक्रिया को समाप्त किया जा सके.’

रणधीर जायसवाल ने बताया कि सरकार रूसी पक्ष और इसमें शामिल लोगों के परिवारों, दोनों के संपर्क में है.

जायसवाल के अनुसार, ‘हम रूसी पक्ष के संपर्क में हैं. हम इन लोगों के परिवारों के भी संपर्क में हैं और उन्हें मामले की जानकारी दे रहे हैं.’

रूसी सेना में शामिल होने से बचने की सरकार की सलाह को दोहराते हुए जायसवाल ने कहा कि इस तरह की भर्ती ‘जीवन के लिए ख़तरा’ है.

उन्होंने कहा, ‘हमने यह कई बार कहा है. हमारे बार-बार याद दिलाने के बावजूद लोग भर्ती होना जारी रखते हैं.’

उन्होंने आगे बताया कि भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इस तरह की भर्ती में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है, ताकि लोगों को ऐसे जोखिम भरे प्रयासों में शामिल होने के लिए बहकाया न जा सके.

मालूम हो कि यह नवीनतम आंकड़ा सितंबर के अंत से काफी बढ़ा है, जब जायसवाल ने पत्रकारों को बताया था कि ‘लगभग 27 भारतीय’ रूसी सेना में सेवारत हैं और उनकी रिहाई के प्रयास जारी हैं.

उनकी यह टिप्पणी उन खबरों के बाद आई थी कि और अधिक भारतीयों को रूसी सेना की इकाइयों में सहायक कर्मचारियों के रूप में भर्ती किया जा रहा है और बाद में उन्हें यूक्रेन में अग्रिम मोर्चे पर भेजा जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि भारत द्वारा यह मुद्दा मास्को के सामने बार-बार उठाया गया है. इसे पिछले साल रूस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उठाया था.

तब तत्कालीन विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा था कि प्रधानमंत्री ने रूसी अधिकारियों के समक्ष इस मुद्दे को ‘ज़ोरदार ढंग से’ उठाया है और रूस ने ‘सभी भारतीय नागरिकों को रूसी सेना की सेवा से जल्द से जल्द मुक्त करने का वादा किया है.’

क्वात्रा ने आगे कहा था कि शेष भारतीयों, जिनकी संख्या उन्होंने लगभग 40 बताई थी, की जल्द रिहाई को लेकर ‘रूसी पक्ष की ओर से आश्वासन’ मिला था.

उन्होंने कहा था, ‘अब दोनों प्रणालियां इस पर काम करेंगी और देखेंगी कि हम उन्हें कितनी जल्दी और कैसे देश में वापस ला सकते हैं.’

हालांकि, मॉस्को की ओर से सेवारत भारतीयों को रिहा करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि करने वाली कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई.

इस मामले को लेकर भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने बाद में कहा था कि रूस इस विशेष मुद्दे पर बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन उन्होंने भारतीय नागरिकों की वापसी की कोई समय-सीमा नहीं बताई थी.

इस मामले के एक महीने बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लोकसभा को बताया था कि भारतीय नागरिकों की स्वदेश वापसी की प्रगति धीमी रही है क्योंकि ‘रूसी अधिकारियों का कहना है कि इन भारतीय नागरिकों ने रूसी सेना के साथ सेवा के लिए अनुबंध किए थे’.

उन्होंने आगे कहा था कि ऐसे सबूत हैं जो बताते हैं कि कुछ भारतीयों को ‘गुमराह’ किया गया था, उन्हें बताया गया था कि उन्हें अग्रिम मोर्चे पर भेजे जाने से पहले नागरिक नौकरियों के लिए नियुक्त किया जा रहा है.

इस पर रूसी दूतावास ने जवाब दिया कि ‘रूसी सरकार कभी भी किसी सार्वजनिक या गुप्त अभियान में शामिल नहीं रही है, खासकर रूस में सैन्य सेवा के लिए भारतीय नागरिकों की भर्ती की धोखाधड़ी वाली योजनाओं में.’

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, इस साल फरवरी तक, 127 भारतीय नागरिकों को रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किया जा चुका था. इनमें से 97 को सेवामुक्त कर दिया गया था, 12 के युद्ध में मारे जाने की जानकारी है और बाकी का कोई पता नहीं चल पाया है.