मोतिहारी: अपने मजबूत गढ़ पश्चिमी और पूर्वी चंपारण में एनडीए के लिए इस बार पिछले चुनाव की तरह बड़ी विजय प्राप्त करना कठिन चुनौती बन गया है. कई चुनावों से लगातार जीत रहे प्रत्याशियों के खिलाफ एंटी-इनकंबेसी, बागी प्रत्याशियों के साथ-साथ जन सुराज पार्टी के उम्मीदवारों द्वारा उसके वोट बैंक में पहुंच बनाना, महागठबंधन की नई सोशल इंजीनियरिंग और लोगों में बदलाव की बढ़ती चाहत उसके राह में रुकावट बन रही है.
दोनों जिले भाजपा के मजबूत किले माने जाते हैं. पिछले चुनाव में एनडीए ने दोनों जिलों की 21 सीटों में से 17 पर जीत हासिल की थी. महागठबंधन को केवल चार सीटें मिली थीं. उसे पश्चिमी चंपारण की नौ में से एक सिकटा तो पूर्वी चंपारण की 12 सीटों में से तीन-सुगौली, नरकटिया और कल्याण में सफलता मिली थी.
सिकटा में भाकपा माले के वीरेन्द्र गुप्ता तो सुगौली में राजद के शशिभूषण सिंह, नरकटिया में शमीम अहमद और कल्याणपुर में मनोज कुमार यादव जीते थे.
पूर्वी चंपारण की 12 सीटों में से भाजपा आठ और जदयू व लोजपा दो-दो सीटों पर लड़ रही है. पश्चिमी चंपारण में भाजपा सात और जदयू दो सीटों पर मैदान में है.
महागठबंधन की ओर से पश्चिमी चंपारण में कांग्रेस छह, राजद दो और एक सीट पर भाकपा माले चुनाव लड़ रही है. पूर्वी चंपारण की 12 सीटों में कांग्रेस दो, राजद सात, माकपा एक और एक वीआईपी लड़ रही है.
सुगौली सीट पर वीआईपी प्रत्याशी का नामांकन रद्द हो गया, तो महागठबंधन ने जनशक्ति जनता दल प्रत्याशी का समर्थन कर दिया है.
दोनों जिलों में अधिकतर सीटों पर भाजपा-जदयू उम्मीदवार दो से तीन बार लगातार जीतते आ रहे हैं. कुछ चार बार भी जीत चुके हैं.
पश्चिमी चंपारण की वाल्मीकि नगर से जदयू प्रत्याशी धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह दो बार, बेतिया से भाजपा प्रत्याशी रेणु देवी चार बार, लौरिया से विनय बिहारी तीन बार, नौतन से नारायण प्रसाद तीन बार जीते हैं. बगहा से राम सिंह और चनपटिया से उमाकांत सिंह और रक्सौल से प्रमोद कुमार सिन्हा पिछली बार जीते थे. इस बार सभी को एनडीए गठबंधन से दुबारा प्रत्याशी बनाया है.
रामनगर सुरक्षित और, नरकटियागंज से एनडीए गठबंधन ने प्रत्याशी बदला है. रामनगर से पांच बार से जीत रही भाजपा की भागीरथी देवी का टिकट बदल कर नंदकिशोर राम को उम्मीदवार बनाया गया है. भाजपा ने नरकटियागंज में रश्मि वर्मा की जगह संजय कुमार पांडेय को उम्मीदवार बनाया है.
सत्ता विरोधी लहर
पूर्वी चंपारण के मोतिहारी से प्रमोद कुमार, हरसिद्धि से कृष्ण नंदन पासवान भी 2005 से लगातार जीतते आ रहे हैं. लगातार जीत रहे प्रत्याशियों से उनके क्षेत्र में नाराजगी दिखी, हालांकि कुछ लोग पार्टी के नाम पर वोट देने की बाद कर रहे थे.
तुरकौलिया निवासी बीपीएससी मेन की परीक्षा दिए नौजवान पवन गुप्ता ने कहा कि वे पार्टी के नाम पर भाजपा को वोट देंगे लेकिन वे क्षेत्र के प्रत्याशी से खुश नहीं हैं. पवन का कहना था, ‘मेरी पर्सनल ओपिनियन है कि कृष्णनंदन पासवान नहीं जीते लेकिन उन्हें वोट डालना पड़ेगा, जिताना पड़ेगा क्योंकि नीतीश कुमार की सरकार बनानी है.’
उनका कहना था कि चंपारण भाजपा और जदयू का गढ़ है. दोनों को ही अधिकतर वोट मिलता है. नीतीश कुमार चाहे भाजपा के साथ रहे या लालू के, काम किए हैं.
पवन की शिकायत थी कि भाजपा प्रत्याशी शिवनंदन पासवान क्षेत्र में घूमते नहीं हैं. उनके बेटे जरूर लोगों से मिलते हैं लेकिन विधायक जी को कम से कम साल में एक बार लोगों से जरूर मिलना चाहिए.
तुर्कवलिया पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र में आता है. भाजपा प्रत्याशी कृष्णनंदन पासवान के मुकाबले में राजद से यहां राजेन्द्र राम चुनाव लड़ रहे हैं.
तुरकौलिया के गांधी घाट पर कपड़े धो रहे नथुनी मियां और अस्पताल जा रही मठिया गांव की महिला ने हरसिद्धि में लालटेन का जोर बताया. पशु चिकित्सक के पास अपने भैंस के इलाज के लिए आए महबत छपरा गांव के रत्नेश यादव का कहना था, ‘ए बेरी बदलाव होके रही. तेजस्वी मुख्यमंत्री बनिहें.’ (इस बार बदलाव होकर रहेगा. तेजस्वी सीएम बनेंगे.)

बगहा के इंग्लिशिया चौक पर चाय की दुकान पर बैठे एक व्यक्ति ने कहा कि उन्होंने भाजपा विधायक को अभी तक देखा नहीं है. दो और लोगों ने भी उनके समर्थन में सिर हिलाया. ये लोग बात कर ही रहे थे कि भाजपा प्रत्याशी के बेटे लोगों से वोट मांगते हुए आ पहुंचे. उनके जाने के बाद ने कहा कि आज प्रत्याशी न सही उनके बेटे को देखने को मिल गया.
उन्होंने कहा कि वे भाजपा समर्थक हैं लेकिन इस बार बदलाव के लिए वोट देना चाहते हैं. बहुत लंबे समय से एक ही सरकार जमी हुई है.
लौरिया नंदनगढ़ के प्रसिद्ध स्तूप पर मिले कुंदन यादव और एक अन्य युवक ने मौजूदा विधायक विनय बिहारी के खिलाफ बहुत गुस्सा जताया है.
प्रवीण ने कहा, ‘देख लीजिए यह विश्व प्रसिद्ध जगह अंधेरे में डूबी है. यहां कोई व्यवस्था ही नहीं है. प्रदीप सिंह जब विधायक थे उन्होंने इसके लिए काम किया था. चहारदीवारी खड़ी की गई थी. विनय बिहारी तीन 15 वर्ष से विधायक हैं लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया.’
दूसरे युवक ने उनका समर्थन करते हुए कहा कि विकास के लिए काम करना चाहिए लेकिन जदयू विधायक को इससे कोई मतलब ही नहीं है. विधायक जी गाना लिखते और गाते हैं. इस बार उनका चांस नहीं है. हमारे गांव के लोग रण कौशल प्रताप सिंह को वोट देंगे.
जनसुराज को मिलेगा समर्थन?
लौरिया सीट महागठबंधन की ओर से वीआईपी को मिली है. यहां से रणकौशल प्रताप सिंह उम्मीदवार हैं.
बेतिया में भी रेणु देवी को फिर से प्रत्याशी बनाए जाने से भाजपा में ही असंतोष है. निर्दलीय लड़ रहे बेतिया की महापौर गरिमा देवी सिकारिया के पति रोहित सिकारिया को भाजपा प्रत्याशी से असंतुष्ट लोग समर्थन देते दिख रहे थे.
बेतिया के मुहल्ले में मिली दो महिलाओं ने कहा कि यहां लड़ाई पंजा (कांग्रेस) और फूल (भाजपा) में हैं. इसी मुहल्ले के एक नौजवान ने निर्दलीय प्रत्याशी रोहित सिकारिया को अच्छा बताया.
बेतिया में निर्दलीय रोहित सिकारिया ने और चनपटिया व नौतन में जनसुराज के प्रत्याशियों ने चुनावी संघर्ष को तिकोना बना दिया है.
महागठबंधन ने इस बार पश्चिमी चंपारण और पूर्वी चंपारण में सामजिक समीकरण पर विशेष ध्यान रखा है और उन जातियों से प्रत्याशी चुने हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वे भाजपा-जदयू समर्थक हैं.
पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर में कांग्रेस ने कोईरी बिरादरी का प्रत्याशी खड़ा किया है तो बगहा में राजपूत प्रत्याशी दिया है. लौरिया में वीआईपी से लड़ रहे प्रत्याशी कुर्मी बिरादरी से आते हैं. चनपटिया में कांग्रेस प्रत्याशी पिछड़ी जाति से आते हैं.

पूर्वी चंपारण के गोविंदगंज में कांग्रेस ने भूमिहार बिरादरी के प्रत्याशी को देकर यहां चुनावी संघर्ष को रोचक बना दिया है. गोविंदगज में कांग्रेस से शशिभूषण राय उर्फ गप्पू राय तो लोजपा से राजू तिवारी चुनाव लड़ रहे हैं.
लौरिया अशोक स्तंभ के पास मिले ऑटो चालक ने कहा कि यहां गप्पू राय की स्थिति ठीक है. पहाड़पुर में मिले सुरेश पासवान का कहना था कि भूमिहार बिरादरी को महागठबंधन में जाने से रोकने के लिए भाजपा और जदयू ने भूमिहार नेताओं को यहां लगाया है.
शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहाड़पुर में लोजपा प्रत्याशी राजू तिवारी के पक्ष में सभा की.

मोतिहारी का हाल
मोतिहारी में राजद ने वैश्य समाज के देवा गुप्ता को प्रत्याशी बनाया है. मोतिहारी रेलवे स्टेशन के पास चाय की दुकान में खैनी मल रहे व्यक्ति ने कहा कि नीतीश कुमार में कोई दाग नहीं हैं. वह फिर मुख्यमंत्री बनेंगे लेकिन वहां बैठे दो व्यक्तियों ने राजद प्रत्याशी के प्रचार वाहन को इशारा करते हुए कहा कि इनका जोर है.
एक बुक शॉप पर मिले दो लोगों ने कहा कि बिहार में बदलाव होना चाहिए.
दोनों जिलों में अल्पसंख्यक मततदाताओं के मद्देनजर कांग्रेस ने बेतिया तो राजद ने नरकटिया में शमीम अहमद को चुनाव लड़ाया है. शमीम अहमद नरकटियागंज से दो बार से जीत रहे हैं.
भाजपा का मजबूत गढ़ माने जाने वाले पश्चिमी और पूर्वी चंपारण में इस बार महागठबंधन ने सामाजिक समीकरणों के जरिए अपनी पहुंच बना कर सफलता अर्जित करने की योजना बनायी है. दोनों जिलों की कुछ सीटों पर जन सुराज प्रत्याशियों की मजबूती, मौजूदा विधायकों के खिलाफ एंटी-इनकंबेसी से भी महागठबंधन प्रत्याशी फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं.
बेतिया विधानसभा क्षेत्र में आने वाले जगदीशपुर में सड़क किनारे फूलगोभी बेच रहे उमेश पटेल ने कहा कि बदलाव होना चाहिए.
नरकटियागंज विधानसभा क्षेत्र के सिसवा में पान की दुकान पर जुटे नौजवानों का कहना था कि वे आकलन कर रहे हैं कि किसकी हवा है. जिसकी हवा होगी उसी की तरफ जाएंगे. यह पूछने पर कि कैसे पता चलता है कि किस ओर हवा है तो एक नौजवान का जवाब था, ‘पता चल जाला कि केकर जोर बा.’ (पता चल जाता है कि किसके पक्ष में माहौल है.)
वाल्मीकि नगर विधानसभा क्षेत्र के सिधवा चौक पर चाय की दुकान पर बैठे एक व्यक्ति ने कहा कि यहां जदयू मजबूत है. बगहा में भाजपा निकाल लेगी लेकिन पटुआ की दरी बेच रहे साइकिल सवार ने कहा कि वाल्मीकि नगर में पंजा आगे जात बा.
वाल्मीकि नगर से थारू समाज से आने वाले जन सुराज पार्टी प्रत्याशी दृग नारायण प्रसाद का नामांकन रद्द हो जाने से जदयू प्रत्याशी को राहत मिली है. श्री प्रसाद लड़े होते तो दो बार से जीत रहे धीरेन्द्र प्रताप सिंह को काफी मुश्किलें आतीं. बगहा अनुमंडल कार्यालय के पास मिले एक युवक ने कहा कि योगी की सभा के बाद बगहा में भाजपा की स्थिति ठीक हुई है.
मसान नदी पुल पर चाय दुकानदार का कहना था कि रामनगर में लालटेन तेज बा. लोग महंगाई से परेशान हैं. इसलिए बदलाव चाहते हैं.
सुगौली का मुकाबला
सुगौली विधानसभा शेत्र में नरकटियागंज की ही तरह दिलचस्प चुनावी लड़ाई है. यहां से मौजूदा विधायक शशिभूषण सिंह का नामांकन निरस्त हो गया. इस वजह से महागठबंधन से कोई प्रत्याशी ही नहीं रह गया. महागठबंधन की ओर से पहले बसपा और फिर तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल के उम्मीदवार श्याम किशोर चौधरी का समर्थन किया गया.

महागठबंधन समर्थित प्रत्याशी के बतौर प्रचार करने पर तेज प्रताप यादव ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर श्याम किशोर चौधरी की उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की है.
दोनों जिलों में दोनों गठबंधनों के दिग्गज नेताओं सहित भोजपुरी अभिनेताओं-अभिनेत्रियों खेसारी यादव, पवन सिंह, अक्षरा सिंह सहित सांसद रवि किशन, मनोज तिवारी दिनेश लाल यादव निरहुआ ने जमकर सभाएं और रोड शो किए.
देखना होगा कि एनडीए अपने पुराने प्रदर्शन को दुहरा पाता है या महागठबंधन उसके गढ़ को कितना ध्वस्त कर पाता है?
(लेखक गोरखपुर न्यूज़लाइन वेबसाइट के संपादक हैं.)
