गोविंदगंज: दूसरे चरण में होने वाले मतदान से पहले बिहार के पश्चिमी और पूर्वी चंपारण जिले में घूमते हुए चुनाव प्रचार के दिलचस्प नजारे दिखे. एनडीए और महागठबंधन के प्रत्याशियों के प्रचार के रंग-ढंग एकदम अलग थे, सभाओं के स्टेज व पंडाल, भाषा और मुहावरे भी अलग थे. चट्टी और चौराहों पर चर्चा और बहस में दोनों गठबंधनों द्वारा सेट किए गए नैरेटिव थे. इसके साथ बिहार की राजनीति की अपनी गहरी समझ के साथ विश्लेषण व आकलन करते साधारण लोग.
सात नवंबर को पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिगनर विधानसभा क्षेत्र से गुजरते हुए पता चला कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हरनाटांड में सभा हो रही है. रास्ते में तीन टेंपो पर लोग सभा में जाने की तैयारी कर रहे थे. सिधाव मोड़ पर नहर के किनारे बस, ऑटो रिक्शा और बाइक से बड़ी संख्या में लोग सभा की ओर जाते दिखे. एक ऑटो में सवार महिलाओं में से एक ने ऑटो से हाथ बाहर निकालकर ‘तीर छाप जिंदाबाद’ का नारा लगाया तो सड़क किनारे एक दुकानदार ने कहा कि ‘इहां और बगहा में एनडीए फिर निकल जाई.’
हरनाटांड में सभा स्कूल के मैदान में थी. इस क्षेत्र में थारू समुदाय की बहुलता है. थारू जनजति में आते हैं. इस समुदाय के एक नेता दृगनारायण प्रसाद ने जन सुराज पार्टी से नामांकन किया था लेकिन उनका पर्चा रद्द हो गया.
सभा में थारू समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे. सभा में बोल रहे नेता थारू समाज के लिए किए गए कामों का बखान कर रहे थे. कह रहे थे कि नीतीश जी ने थारू विकास प्राधिकरण का गठन किया है, जनजाति आयोग बनाया है. नेता यह भी कह रहे थे कि कांग्रेस ने आदिवासियों के लिए कोई काम नहीं किया.
कुछ नेताओं ने अपने संबोधन में कुशवाहा समाज को एकजुट रहकर तीर छाप पर वोट देने की अपील की. यह अपील कांग्रेस प्रत्याशी के कुशवाहा बिरादरी के होने के कारण खास तौर पर की जा रही थी.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आने तक सभा स्थल का आधा हिस्सा भर गया. धूप से निजात पाने के लिए लोग पेड़ों के नीचे आ गए. यहां कुछ लोग आपस में बात कर रहे थे. एक लंबे कद वाले व्यक्ति का कहना था कि कुछ लोग जंगलराज को भूलकर उधर जा रहे हैं. दूसरे व्यक्ति की टिप्पणी थी, ‘ठीक बा उधर जा लोग. जब तेल पिलावल लाठी खइहें तब समझ में आई.’
नीतीश कुमार का हेलीकाप्टर समय पर उतरा. उनके मंच पर पहुंचने पर जदयू प्रत्याशी धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू ने भाषण दिया. उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग रखी कि परिसीमन में थारू समाज के लिए विधानसभा में एक सीट आरक्षित किया जाए और उन्हें वन अधिकार दिए जाएं.

एक वक्ता ने यह भी कहा कि इस बार रिंकू जी जीत जाएंगे तो मंत्री बनेंगे. एक महिला नेता ने नीतीश कुमार द्वारा महिलाओं के लिए किए गए कामों को गिनवाते हुए कहा कि ‘तीर छाप पर इतना बटन दबावल जाई कि बटन खिया (घिस) जा. ‘
मंच पर अब तक नीतीश कुमार के हर सभा में रहने वाले जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के बजाय मंत्री विजय चौधरी मौजूद थे. उन्होंने कहा, ‘रिंकू बाबू मुख्यमंत्री के चहेते विधायक है. उनकी हर मांग पूरी होगी. मुख्यमंत्री जी का नदी, जंगल और पहाड़ से विशेष लगाव है. इसलिए वह वाल्मीकिनगर बार-बार आते हैं.’
नीतीश कुमार अपना लिखित भाषण पढ़ने लगे तो सभा में मौजूद लोग उससे अपने को जोड़ नहीं सके. उनकी एक झलक देखने के बाद पीछे की तरफ से वापस जाने का सिलसिला शुरू हो गया.
‘अब त प्रशांत किशोर के फैक्ट्री बइठी’
बेतिया-मोतिहारी मार्ग पर श्रीचौक पर परमेश्वर की चाय की दुकान पर पांच-छह लोग चुनावी चर्चा में मशगूल थे. पीले गमछे वाले और सफेद शर्ट में गर्मागम बहस हो रही थी. पीले गमछे वाले ने कहा, ‘जे सब ओर घूम आइल बाटे उ मोदी के कभी वोट नाहीं देई.’ (जो घूमकर दुनिया देख चुका है वो मोदी को वोट नहीं देगा.)
सफेद शर्ट पहने व्यक्ति ने उनकी बात काटते हुए कहा, ‘ए बेरा अमेरिका के जवाब देवे वाला भारत बन गईल बा. हमारा भारत सुरक्षित रहेगा तब हम भी सुरक्षित रहेंगे.’
पीले गमछे वाले की आवाज ऊंची हो गई, ‘एगो फैक्ट्री लगवलन का ? उनकर नाम न ल. कहलन एक हजार ट्रेन चली. अरे सब फैक्ट्री गुजरात में लगल और बिहारी मजदूर बनके उहां जात बा. इहां से जावे वाला एगो ट्रेन खाली नाहीं मिलत बा.’ (कोई फैक्ट्री लगी क्या? उनका नाम मत लीजिए. उन्होंने कहा एक हजार ट्रेन चलेगी. सब फैक्ट्री गुजरात में लगी और बिहारी वहां मजदूर बनकर जा रहे हैं. यहां से जाने वाली एक भी ट्रेन खाली नहीं मिलती है.)
सफेद शर्ट वाले फैक्ट्री का सवाल उठने पर रक्षात्मक हो गए. बोले, ‘पहले बिजली, सड़क कहां रहे कि फैक्ट्री बइठी. अब सुधार हो गइल बा त फैक्टी लगी लेकिन चंपारण में फैक्ट्री के लिहे जगह कहां बा? सब जगह तो नदी, जंगल बा.’ (पहले सड़क बिजली नहीं थी तो फैक्ट्री कहां से लगती. अब सुधार हो गया है तो फैक्ट्री लगेगी लेकिन चंपारण में फैक्ट्री के लिए जगह नहीं है. सब जगह नदी व जंगल है. )
अब तक चुप रहे बुजुर्ग ने इस बात का प्रतिकार किया, ‘कइसन बात करत हईं. जगही के कमी बा. एहीं से रेलवे स्टेशन तक जमीने जमीन बा. सरकार लगावल त चाहे.’ (कैसी बात कर रहे हैं. जगह की कोई कमी नहीं है. यहां से रेलवे स्टेशन तक जमीन ही जमीन है. सरकार में इच्छाशक्ति तो हो.)
इस पर सफेद शर्ट वाले ने व्यंग्य किया, ‘अब त प्रशांत किशोर के फैक्ट्री बइठी.’
इस व्यंग्य पर पीले गमछे वाले ने करारा जवाब दिया, ‘इ बात के जवाब द कि बिहार में एगो फैक्ट्री काहें नाहीं लगल. रउरा मजदूर बन दिल्ली-गुजरात गइलीं, रउरा के बेटवो गइल अउर अब आपके पूतवो उहें जाई. हमन के उहां जाके कुत्ता जइसन लाइत खात बानी जा. इ सब नाहीं देखाता? मोदी-मोदी करत उज्जर हो गइलीं लेकिन कुछ बुझात नइखे?’ (इस बात का जवाब दीजिए कि बिहार में कोई फैक्ट्री क्यों नहीं लगी. आप मजदूरी करने दिल्ली-गुजरात गए, आपका बेटा गया और अब आपका पोता भी जाएगा. हम लोग दूसरे जगह जाकर इस तरह मार खा रहे हैं जैसे कुत्ते. मोदी-मोदी करते हुए हालत पतली हो गई फिर भी समझ नहीं आ रही.)
इसी बीच किसी ने खेसारी यादव के मुम्बई में घर टूटने की चर्चा छेड़ दी. इस पर बुजुर्ग ने बहुत गंभीर होकर कहा, ‘जे एतना अत्याचार करी ओकर नाम नाहीं रहि जाला.’ (जो इतना अत्याचार करता है उसका नाम नहीं रहता.)
बात अब आस-पास की सीटों पर जीत हार की होने लगी.
सफेद शर्ट वाले ने कहा, ‘नया पार्टी पर विश्वास कम बा. बेतिया, नरकटियागंज, सुगौली में एनडीए गठबंधन जीत जाई. चनपटिया में जन सुराज वाल दम दिखावत बा. सिकटा में माले के जियाद ऐथीबा. जनसुराज वाला दु चार गो जीत सकेले.’
बुजुर्ग की राय अलग थी. उन्होंने कहा, ‘ऐ बारी नीतीश के बिदाई बा. ऊपर से नीचे तक तैयारी हो गइल बा.’ पीले गमछे वाले ने गमछे ने कहा, ‘जनसुराज 54 सीट जीत जाएगा. फिर भाजपा से मिलकर सरकार बनाएगा.’ उनकी इस बात पर सब हंसने लगे.
’20 साल चाचा को देख लिया, अब भतीजे को लाइए’
तुरकौलिया में महात्मा गांधी के चंपारण आंदोलन की याद में बने गांधी घाट पर मिले कुंदन यादव ने कहा कि इहां का घूमत हईं. परशुरामपुर जाईं, उहां खेसारी आवत बाटे.’ (यहां क्या घूम रहे हैं, परशुरामपुर जाइए, वहां खेसारी यादव की सभा होने वाली है.)
इसी स्थान पर अपने पिता की चाय की दुकान पर मिले युवा पवन गुप्ता ने नीम के पेड़ को दिखाते हुए कहा कि अंग्रेज इसी पेड़ में बांधकर लोगों को पीटते थे. उन्होंने बड़े रंज से कहा कि पेड़ मर रहा है क्योंकि इसको घेरकर चबूतरा बना दिया गया. लोगों को समझ नहीं है कि पेड़ को जिंदा रहने के लिए मिट्टी चाहिए.
पवन गुप्ता भाजपा समर्थक थे. श्रीचौक पर मिले सफेद शर्ट वाले व्यक्ति की तरह उन्होंने भी बिहार में कल-कारखाना न लगने के लिए जमीन की कमी बताया. कहा कि कल कारखाना लगता है तो प्रदूषण भी होता तो लोग उसके लिए हल्ला करते हैं. रोजगार के सवाल पर उनका तर्क था कि इहां के लोग अधिक कमाने के चक्कर में बाहर जाते हैं लेकिन उनका अधिक पैसा खाने-पीने रहने में खर्च हो जाता है. पटना में देखिए. दूसरे राज्य के लोग आकर कमाई कर रहे हैं.
परशुरामपुर के खेल मैदान में खेसारी यादव का हेलीकाप्टर समय से पहले आ गया. यह खबर फैलते हुए नौजवान, महिलाएं दौड़ते हुए सभा की तरफ जाने लगे. मंच पर भी भीड़ थी.

यहां से राजद के प्रत्याशी राजेन्द्र राम ने अपने भाषण में बेतिया राज की जमीन का सवाल उठाया और कहा कि जो लोग बेतिया राज की जमीन पर बसे हैं उनके अधिकार की लड़ाई लड़ी जाएगी. उन्होंने खेसारी यादव को ट्रेंडिंग स्टार, सुपरस्टार बताते हुए भाषण के लिए बुलाया. खेसारी यादव ने अपने भाषण में कहा, ‘हम छपरा में चुनाव लड़े. वहां 100 में 100 है. यहां भी आप लोग राजेन्द्र राम जी को तो 100 में 100 देंगे न.’
खेसारी के भाषण पर लोग खूब ताली बजा रहे थे और शोर मचाकर उनका समर्थन कर रहे थे. खेसारी ने कहा, ‘मोदी जी ने 15-15 लाख रुपये का वादा किया था, लेकिन 11 साल में आया दस हजार. ये लोग वादा करते हैं, पूरा नहीं करते.’
अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देते हुए वे बोले, ‘स्कूल, अस्पताल, रोजगार की बात उठाने पर हमें यदुमुल्ला कहा जा रहा है. ये लोग केवल हिंदू-मुसलमान करते हैं जबकि हम लोग रोजी-रोजगार, अच्छे स्कूल व अस्पताल की बात करते हैं. आप लोगों ने 20 साल चाचा को देख लिया, अब भतीजे को लाइए.’
‘कब केकरी ओर बाजी पलट जाई केहू कही न सकेला’
पूर्वी चंपारण के गोविंदगंज विधानसभा क्षेत्र में लोजपा, कांग्रेस, जन सुराज पार्टी, लोकशक्ति जनता दल के साथ-साथ आम आदमी पार्टी का भी कार्यालय दिखा.
पहाड़पुर में चाय की दुकान पर बैठे चार ग्रामीणों के बीच चुनाव पर चर्चा चल रही थी. इनमें एक ट्रक ड्राइवर थे जो अब रस्सी बेचने का काम करते हैं. शेष तीन मजदूर और छोटे किसान थे. इन चारों ने चंपारण ही नहीं पूरे बिहार के राजनीतिक परिदृश्य पर जो बातें कहीं, वे बिहार के साधारण जन में जर्बदस्त राजनीतिक चेतना का परिचायक था.
एक व्यक्ति ने गोविंदगज विधानसभा क्षेत्र के परिसीमन को टेढ़ा-मेढ़ा बताते हुए कहा, ‘सर्वे करे वाला बहुत गलत कइले बा. गोविंदगंज क्षेत्र के भारत के नक्शा की तरह फैला देहले बा. प्रत्याशियन के प्रचार में नकदम हो जात बा.’ (इस क्षेत्र का परिसीमन गलत हुआ है. क्षेत्र को देश के नक्शे की तरह फैला दिया है. प्रचार में प्रत्याशियों का दम निकल जा रहा है.)
ट्रक ड्राइवर ने चंपारण के पिछड़ेपन पर दुख जताते हुए कहा, ‘इंडिया में बिहार और बिहार में चंपारण सबसे गरीब बा. यहीं सबसे मारामारी, मुकदमाबाजी बा. एकर पिछड़ जइले के कारण इ बा कि इहां के लोग अपने के महत्व कम देला. अपने भाई के लात मार दी लेकिन अपने पीछे बइठल आदमी के दादा बना देई. दूसरे स्टेट के जे यहां आइल ओके राजा बना देहल लोग. छपरा से कपार पर लोटा लेके केदार पांडेय अइलन. इहां के लोग उनके कहां पहुंचा देहल.’ (चंपारण बिहार का सबसे पिछड़ा क्षेत्र है. यहां गरीबी है, अपराध है और मुकदमेबाजी है. लोग अपने को महत्व नहीं देते हैं लेकिन बाहर वाले को खूब महत्व देते हैं. छपरा से पूर्व मुख्यमंत्री केदार पांडे यहां चुनाव लड़ने आए, उन्हें यहां हाथों हाथ ले लिए गया.)
सिर पर गमछा बांधे व्यक्ति ने कहा, ‘इहां दुई आदमी कांग्रेस और चिराग में लड़ाई बा. लड़ाई घनघोर बा. आज के डेट में एक से पांच हजार के अंतर लगत बा लेकिन कब केकरी ओर बाजी पलट जाई केहू कही न सकेला. वोट डाले के बेरी एकतरफा भी हो सकेला तब जीत-हार के अंतर बड़हन हो जाई.’ (यहां कांग्रेस और लोजपा में कड़ा संघर्ष है. बाद में स्थिति किसी ओर जा सकती है. वोट के दिन स्थिति एक तरफा भी हो सकती है.)

इनके पास अपने क्षेत्र का पूरा जातिगत आंकड़ा था. बोले-हमरे क्षेत्र में हर जाति के लोग बा. दुसााध, मुसलमान, धांगर, कुर्मी, बारी, रविदास, अहीर, ब्राह्मण, भूमिहार सब बा.’
एक व्यक्ति ने गोविंदगंज को लेकर कहा कि यह क्षेत्र ब्राह्मण बेल्ट है. गमछा वाले व्यक्ति ने उनकी बात को काटते हुए कि सर्वे का आंकड़ा है कि 17 फीसदी मुसलमान, 14 फीसदी अहीर, 13 फीसदी भूमिहार, 11 फीसदी पंडित और 14 फीसदी हमनी के बाटी. हमनी से उनका मतलब पासवान जाति से था. उन्होंने अपनी बात में आगे जोड़ा, ‘इहां के पासवान दुब्बर बाटें. पूरब में उनके दुआरे पर तो बड़-बड़ लोग नाहीं बइठ पइहें.’ (यहां के पासवान कमजोर हैं. पूर्व (दिशा) में तो उनके दरवाजे बड़े-बड़े लोग नहीं बैठ पाएंगे.)
एक जाति विशेष के मतदाताओं के बारे में इन लोगों की टिप्पणी थी, ‘पांच साल एक तरफ रहते हैं, पांच साल दूसरे तरफ. पिछली बार भाजपा के साथ रहे इस बार अपनी जाति का प्रत्याशी मिल गया तो कांग्रेस की तरफ जा रहे हैं.’
यहां बैठे लोगों में से एक ग्रामीण की राय थी कि बसपा से रविदास बिरादरी के खड़े हैं. उनको भी कुछ वोट मिलगा ही. इस पर दूसरे ग्रामीण की टिप्पणी थी, ‘उ जीतत नइखन. वोट जियान कईले के जरूरत नइखे.’ (वह नहीं जीत रहे हैं. उनको वोट देकर, वोट बर्बाद करने की जरूरत नहीं है.)
बातचीत के दौरान दो और व्यक्ति आ अए. इनमें से एक ने कहा, ‘कांग्रेस के आंकड़ा नीमन बा. समीकरण बढ़िया जा रहल बा.’
तभी आवाज आई कि तेजू भइया के हेलीकाप्टर आवत हवे. इसके बाद लोग उठकर आगे बढ़ गए.
जनशक्ति जनता दल और ‘तेजू भइया’
सड़क किनारे स्थित खेल मैदान में जनशक्ति जनता दल का पंडाल लगा था. मंच करीने से सजा था. मंच पर लगे सोफे पर प्रत्याशी आशुतोष कुमार सहित कई लोग बैठे हुए थे. बाएं तरफ हेलीपैड बना था तो दाहिने तरफ दो घोड़े बंधे हुए थे. सभा में आए लोगों के लिए पीने के पाउच और नाश्ते के पैकेट की व्यवस्था थी जिसके बारे में बार-बार घोषणा की जा रही थी.
दोपहर के तीन बज गए हैं. अभी तेज प्रताप यादव नहीं पहुंचे हैं. मंच पर भोजपुरी गायक शिवेश मिश्र लगातार गाते हुए लोगों को सभा स्थल पर रोके हुए हैं. वे भोजपुरी के साथ-साथ बीच में हिंदी के लोकप्रिय गाने की दो-चार लाइनें गा देते हैं. तेज प्रताप के आने में देरी होने पर गाने बंद कर स्थानीय नेताओं के भाषण शुरू हो गए.

आगे बढ़ने पर बगहा विधानसभा क्षेत्र के इंगलिशिया चौराहा पर भाजपा प्रत्याशी के नारे लगाते हुए कुछ लोग जाते दिखते हैं. चाय की एक दुकान पर दो लोग खेसारी यादव के मकान तोड़े जाने की चर्चा कर रहे हैं. इसमें एक व्यक्ति गोपालगंज में दुकानदार हैं तो दूसरा व्यक्ति पश्चिमी बंगाल सहित कई राज्यों में मजूदरी कर चुका है.
श्रमिक कहता है, ‘खेसारी ने सनातन के खिलाफ बोला इसलिए बाबा का बुलडोजर तैयार हो गया.’ दूसरा व्यक्ति कहता है कि यह हवाई खबर है. पहला व्यक्ति जवाब देते हुए कहता है कि वहां भी भाजपा की सरकार है. दो-तीन जगह छोड़ भाजपा ने सब जगह कैप्चर कर लिया है. केरल, बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश ही बचा है. ए बारी बिहार भी कैप्चर कर लेगा. उसके पास सब कुछ है.’
यह पूछने पर कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा तो उनका जवाब था, ‘नीतीशे बनेंगे. उ त अपने नसीब में मुख्यमंत्री लिखवा के आइल बांटे. लेकिन अब उहो पचहत्तर प्लस हो गइल बांटे.’
पहला व्यक्ति सवाल उठाता है, ‘मोदी भी त पचहत्तर प्लस हो गइलें. उनकर का होई? जवाब में पहला व्यक्ति कहता है, ‘तब दूनो अपनी जगह रहइन. नीतीश के हिलावल मुश्किल बा. अइसन गणित बना दिया है कि 40 परसेंट पुरुष बिखर गया है जबकि लेडीज वोट टूटत नइखे.’
उठते-उठते उन्होंने बिहार की राजनीति का विश्लेषण प्रस्तुत किया, ‘बिहार का राजनीति त्रिपटा है. यही सबसे भारी प्रॉब्लम है. एगो टूटकर जिधर जाएगा उधर सरकार बन जाएगा. फिर उनमें टूटकर एगो इधर आ जाएगा तो दूसरी सरकार बन जाएगा. बीच में नीतीश बाबू बना रहता है. अब्बो कौनो ठीक नइखे कि दुनो (नीतीश-लालू) आपस में जुड़ल हों.’
(लेखक गोरखपुर न्यूज़लाइन वेबसाइट के संपादक हैं.)
