दिल्ली दंगे: कपिल मिश्रा के ख़िलाफ़ नए सिरे से जांच के मजिस्ट्रेट के आदेश को अदालत ने ख़ारिज किया

अप्रैल में एक मजिस्ट्रेट अदालत ने दिल्ली दंगों की साज़िश के संबंध में कपिल मिश्रा और अन्य की भूमिका का पता लगाने के लिए आगे की जांच का निर्देश दिया था. मिश्रा और दिल्ली पुलिस ने इस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके जवाब में सत्र अदालत ने उक्त आदेश ख़ारिज कर दिया. साल 2020 के दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे.

कपिल मिश्रा. (फोटो: द वायर)

नई दिल्ली: दिल्ली की एक सत्र अदालत ने सोमवार (10 नवंबर) को राष्ट्रीय राजधानी में 2020 में हुए दंगों के मामलों में दिल्ली के वर्तमान कानून मंत्री कपिल मिश्रा की भूमिका की आगे जांच करने के मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को खारिज कर दिया.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने मजिस्ट्रेट अदालत के फैसले को पलटने की मिश्रा की याचिका को स्वीकार कर लिया. विशेष न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक आदेश, जो किसी के अधिकारों और स्वतंत्रता को संभावित रूप से प्रभावित करते हैं, वे स्पष्ट और परस्पर विरोधी व्याख्याओं से मुक्त होने चाहिए.

अप्रैल में एक मजिस्ट्रेट अदालत ने दिल्ली दंगों की साजिश के संबंध में मिश्रा और अन्य की भूमिका का पता लगाने के लिए आगे की जांच का निर्देश दिया था. मिश्रा और दिल्ली पुलिस ने इस आदेश को चुनौती दी थी.

न्यायाधीश सिंह ने मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को यह मानते हुए पलट दिया कि यह कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है. न्यायाधीश सिंह ने कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत ने केवल आगे की जांच का आदेश दिया था, नई एफआईआर का नहीं, क्योंकि मामला अदालत में विचाराधीन है.

सिंह ने कहा, ‘बीएनएसएस की धारा 193(9) के तहत विशेष न्यायाधीश द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद एसीजेएम (अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) द्वारा इस तरह की आगे की जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता था.’

बीएनएसएस की धारा 193(9) पुलिस रिपोर्ट दर्ज होने के बाद किसी मामले में आगे की जांच से संबंधित है, जिसकी अनुमति केवल संबंधित अदालत ही दे सकती है. बड़े षड्यंत्र के मामले की सुनवाई अब एक सत्र अदालत में हो रही है.

सिंह ने कहा, ‘उपरोक्त कारणों से यह आदेश क्षेत्राधिकार की दृष्टि से त्रुटिपूर्ण और कानूनी रूप से अस्थिर है, और इसे रद्द किया जाना चाहिए.’

आगे की जांच का निर्देश एक बड़े षड्यंत्र के मामले में दिया गया था, जो अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद कड़कड़डूमा सत्र अदालत में विचाराधीन है.

ज्ञात हो कि दिसंबर 2024 में दिल्ली दंगों के संबंध में भाजपा नेता कपिल मिश्रा और छह अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग करते हुए दिल्ली के यमुना विहार के एक निवासी अदालत पहुंचे थे. दिल्ली पुलिस ने इसका विरोध किया था. इसी साल अप्रैल में कोर्ट ने मिश्रा के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने को कहा था.

साल 2020 के दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे.

हालांकि, दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग द्वारा गठित 10 सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने कहा था कि दिल्ली दंगों में हिंसा ‘सुनियोजित और लक्षित’ थी और इसके लिए मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया था.

रिपोर्ट में कहा गया था कि ‘23 फरवरी, 2020 को मौजपुर में कपिल मिश्रा के भाषण के लगभग तुरंत बाद विभिन्न इलाकों में हिंसा शुरू हो गई थी. अपने भाषण में उन्होंने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद में प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक हटाने का खुले तौर पर आह्वान किया था.’

मिश्रा का भड़काऊ भाषण

बता दें कि दिल्ली में दंगा भड़कने से एक दिन पहले 23 फरवरी को कपिल मिश्रा ने एक वीडियो ट्वीट किया था, जिसमें वह मौजपुर ट्रैफिक सिग्नल के पास सीएए के समर्थन में जुड़ी भीड़ को संबोधित करते देखे जा सकते हैं. इस दौरान उनके साथ उत्तर-पूर्वी दिल्ली के डीसीपी वेदप्रकाश सूर्या भी खड़े हैं.

मिश्रा कहते दिखते हैं, ‘वे (प्रदर्शनकारी) दिल्ली में तनाव पैदा करना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने सड़कें बंद कर दी हैं. इसलिए उन्होंने यहां दंगे जैसे हालात पैदा कर दिए हैं. हमने कोई पथराव नहीं किया. हमारे सामने डीसीपी खड़े हैं और आपकी तरफ से मैं उनको यह बताना चाहता हूं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत में रहने तक हम इलाके को शांतिपूर्वक छोड़ रहे हैं. अगर तब तक सड़कें खाली नहीं हुईं तो हम आपकी (पुलिस) भी नहीं सुनेंगे. हमें सड़कों पर उतरना पडे़गा.’