श्रीनगर: मध्य कश्मीर के बडगाम और नगरोटा विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव के लिए मंगलवार (11 नवंबर) को मतदान शुरू हो गया. बडगाम को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के लिए पहली राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है.
यह उपचुनाव अब्दुल्ला द्वारा 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने और जीतने के बाद हो रहे हैं, जिसमें उन्होंने अपनी पार्टी की पारंपरिक गांदेरबल सीट को बरकरार रखा था, जबकि बडगाम को खाली कर दिया था. दोनों ही मध्य कश्मीर में आते हैं.
इस महत्वपूर्ण चुनाव ने अब्दुल्ला सरकार पर जनता के फैसले का रूप ले लिया है, जो अब अपने कार्यकाल के दूसरे वर्ष में है, जबकि विपक्षी समूह अक्टूबर 2024 में सत्ता में आने के बाद से सत्तारूढ़ पार्टी को उसके कथित विश्वासघात के लिए घेर रहे हैं.
आंतरिक आलोचना
अब्दुल्ला के नेतृत्व में नेशनल कॉन्फ्रेंस बडगाम में अंदरूनी कलह से जूझ रही है. सत्तारूढ़ पार्टी को अपने वरिष्ठ नेता और श्रीनगर से लोकसभा सदस्य सैयद आगा रूहुल्लाह की ओर से पिछले साल के अपने प्रदर्शन को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. रूहुल्लाह ने बडगाम चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रखी है.
श्रीनगर के सांसद ने अपने फैसले का बचाव करने के लिए अब्दुल्ला सरकार द्वारा 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी द्वारा अपने चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने में कथित विफलता का हवाला दिया.
रूहुल्लाह को नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक अन्य वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद मियां अल्ताफ लार्वी का समर्थन प्राप्त है.
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, अवामी इत्तेहाद पार्टी, आम आदमी पार्टी (आप) सहित 17 राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान भी ये आरोप लगाए गए हैं.
निर्दलीय उम्मीदवार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव नेशनल कॉन्फ्रेंस के दो बार सांसद रह चुके आगा सैयद महमूद और पीडीपी के आगा सैयद मुंतज़िर के बीच सीधा मुकाबला होगा, जिन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान भारी भीड़ जुटाने में कामयाबी हासिल की है.
2024 के विधानसभा चुनावों में अब्दुल्ला ने मुंतज़िर को 18,359 मतों से हराया और उस निर्वाचन क्षेत्र में 35,804 वोट हासिल किए जहां 30 प्रतिशत मतदाता शिया मुसलमान हैं और हार के अंतर को पाटना पीडीपी उम्मीदवार के लिए एक कठिन काम होने वाला है.
विश्लेषकों का कहना है कि शिया वोट महमूद, मुंतज़िर और भाजपा उम्मीदवार सैयद आगा मोहसिन के बीच बंटने की संभावना है, जबकि मुस्तफ़ाई शिया मुंतज़िर को सत्तारूढ़ दल के भीतर चल रहे राजनीतिक मतभेद का फ़ायदा मिलने की संभावना है.
व्यापक रूप से यह माना जा रहा है कि निर्दलीय उम्मीदवार जिबरान डार, जिन्होंने भारी भीड़ और अन्य निर्दलीय और छोटे दलों को आकर्षित किया है, एनसी और पीडीपी के दो मुख्य उम्मीदवारों की किस्मत बना या बिगाड़ सकते हैं.
खबरों के अनुसार, कड़ाके की ठंड के बावजूद मतदाता सुबह से ही मतदान केंद्रों पर कतारों में खड़े हैं.
सत्तारूढ़ दल का गढ़ माने जाने वाले मध्य कश्मीर निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 1.26 पंजीकृत मतदाता हैं और मतदान प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 173 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं.
1962 से नेशनल कॉन्फ्रेंस इस निर्वाचन क्षेत्र से लगातार जीतती आ रही है, सिवाय 1972 के जब यह सीट कांग्रेस उम्मीदवार ने जीती थी.
अधिकारियों ने बताया कि किसी भी कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए जिले में सुरक्षा बढ़ा दी गई है.
नगरोटा
जम्मू क्षेत्र के नगरोटा विधानसभा क्षेत्र के लिए भी उपचुनाव हो रहा है, जो वर्तमान विधायक और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता देवेंद्र राणा के निधन के बाद रिक्त हुआ था.
विश्लेषकों के अनुसार, यह चुनाव राणा की बेटी देवयानी राणा, जिनका मुकाबला नेशनल कॉन्फ्रेंस की शमीम बेगम और जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के अध्यक्ष हर्ष देव सिंह से है, के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, नगरोटा से 10 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं.
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