नई दिल्ली: अमेरिका की शीर्ष लॉबिंग फर्म स्क्वायर पैटन बॉग्स (Squire Patton Boggs) ने इस साल की शुरुआत में पहली बार भारत के दक्षिणपंथी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के लिए अमेरिकी संसद में लॉबिंग रजिस्टर की है.
अमेरिकी वेबसाइट प्रिज़्म की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के पहले तीन तिमाहियों में इस फर्म को 3,30,000 डॉलर (करीब 2.75 करोड़ रुपये) का भुगतान किया गया है.
यह पहली बार है जब आरएसएस ने अमेरिका में किसी लॉबिंग एजेंसी को काम पर रखा है. लॉबिंग के दस्तावेज़ों में दिखाया गया है कि फर्म ने ‘अमेरिका-भारत द्विपक्षीय संबंध’ के मुद्दे पर काम किया, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गतिविधि अमेरिकी ‘फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (फारा)’ के अंतर्गत आनी चाहिए थी, क्योंकि आरएसएस एक विदेशी (भारतीय) इकाई है. लेकिन न तो स्क्वायर पैटन बॉग्स और न ही आरएसएस ने फारा के तहत खुद को रजिस्टर किया है.
रिपोर्ट बताती है कि लॉबिंग फर्म ने आरएसएस की ओर से अमेरिकी सांसदों और नीति निर्माताओं से संपर्क साधा और इसके इतिहास व ‘मिशन’ के बारे में जानकारी देने का प्रयास किया. लॉबिस्ट ब्रैडफोर्ड एलिसन ने अमेरिका की एक प्रोफेसर ऑड्रे ट्रश्क से संपर्क करते हुए लिखा कि वे ‘आरएसएस के मिशन और प्रभाव’ को लेकर सांसदों को शिक्षित करना चाहते हैं.
प्रिज़्म को मिली जानकारी के मुताबिक, लॉबिंग फर्म के प्रतिनिधि इस साल नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय और प्रशिक्षण शिविर का दौरा भी कर चुके हैं. उस दौरे को आरएसएस की पत्रिका ने ‘भारत-अमेरिका सिविल सोसाइटी संवाद का अहम क्षण’ बताया.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लॉबिंग में शामिल लोगों में अमेरिका के पूर्व रिपब्लिकन सांसद बिल शस्टर, उनके भाई बॉब शस्टर (जो One+ Strategies नाम की फर्म चलाते हैं) और कई पूर्व कांग्रेस सहयोगी भी हैं. लॉबिंग से जुड़ी फाइलिंग में बोस्टन के फार्मा उद्योगपति विवेक शर्मा का नाम भी है, जिन्होंने 5,000 डॉलर से अधिक का योगदान दिया और लॉबिंग गतिविधियों में भाग लिया.
विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि आरएसएस का भारत की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा से गहरा संबंध है, इसलिए इसे ‘विदेशी राजनीतिक संगठन’ माना जाना चाहिए था और इसे फारा के तहत पंजीकृत होना चाहिए था, न कि केवल लॉबिंग डिस्क्लोज़र एक्ट (LDA) के तहत.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2020 में ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ भाजपा-यूएसए (OFBJP-USA) को भी विदेशी एजेंट के रूप में पंजीकृत होना पड़ा था, जब उसने अमेरिकी चुनावों के दौरान भाजपा के प्रचार में भाग लिया था.
प्रिज़्म की रिपोर्ट के अनुसार, आरएसएस की यह लॉबिंग अमेरिकी नीति निर्माताओं के बीच अपनी छवि सुधारने का प्रयास है.
राक़िब हामिद नाइक, जो अमेरिका स्थित सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज़्ड हेट के निदेशक हैं, ने कहा, ‘भारत में आरएसएस अब मुख्यधारा की ताकत बन चुका है, लेकिन वैश्विक स्तर पर अभी भी इसे एक ‘फासीवादी अर्द्धसैनिक संगठन’ के रूप में देखा जाता है. वे इसी छवि को बदलने की कोशिश कर रहे हैं.’
