श्रीनगर: कश्मीर में अधिकारियों ने युवा डॉक्टर उमर नबी, जिन्हें जांचकर्ताओं ने दिल्ली के लाल किला विस्फोट मामले में ‘मुख्य संदिग्ध’ बताया है, के पिता के आवास को ध्वस्त कर दिया है.
उल्लेखनीय है कि यह कार्रवाई दक्षिण कश्मीर के पुलवामा ज़िले में तब हुई है जब 2024 में सुप्रीम कोर्ट अपने एक फैसले में कह कह चुका है कि क़ानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना संदिग्धों या दोषियों के घरों को गिराना ‘पूरी तरह से असंवैधानिक’ है.
स्थानीय लोगों और पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि पुलवामा के कोइल गांव में गुरुवार और शुक्रवार (13 और 14 नवंबर) की दरम्यानी रात नियंत्रित विस्फोटकों का इस्तेमाल करके यह ध्वस्तीकरण किया गया. उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों की एक टीम ने गुरुवार रात करीब 8 बजे कोइल की घेराबंदी की, जिसके बाद मुस्लिमपुरा इलाके के दर्जनों घरों के निवासियों को अपने परिसर खाली करने को कहा गया.
रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉ. उमर नबी के दोमंजिला घर में तीन नियंत्रित विस्फोट किए गए. ऐसा माना जा रहा है कि 10 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी में लाल किले के पास एक मेट्रो स्टेशन के पास हुए विस्फोट में कार चलाने वाले डॉ. उमर नबी ही थे.

हालांकि, किसी भी अधिकारी ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि विस्फोट में शामिल हुंडई कार उमर नबी चला रहे थे. लेकिन कुछ रिपोर्टों में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि उस दुर्भाग्यपूर्ण कार के क्षतिग्रस्त अवशेषों से लिए गए डीएनए नमूने युवा डॉक्टर की मां से मेल खा गए हैं.
नबी के परिवार के सूत्रों ने, जब उनसे पूछा गया कि क्या अधिकारियों ने उनके घर को गिराने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन किया था, तो उन्होंने कहा, ‘हमें कोई नोटिस नहीं दिया गया था.’ उन्होंने आगे कहा, ‘सुरक्षा बलों ने हमें गुरुवार शाम को कुछ ही मिनटों में घर खाली करने के लिए कहा और हमारे पास वहां से निकलने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.’
पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि यह मकान गुलाम नबी भट के नाम पर पंजीकृत है, जो पूर्व शिक्षक और नबी के पिता थे. भट, जिन्होंने 2012 में एक अज्ञात बीमारी के कारण अपनी नौकरी छोड़ दी थी, को दिल्ली विस्फोट मामले में उनके डॉक्टर बेटे का नाम आने के बाद उनकी पत्नी के साथ हिरासत में लिया गया था.
दंपति को गुरुवार को रिहा कर दिया गया, लेकिन उनके दो अन्य बेटे मामले की जांच के सिलसिले में अभी भी हिरासत में हैं.
परिवार के एक पड़ोसी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि उन्होंने रात 12:30 बजे, 1:30 बजे और 2:50 बजे तीन धमाकों की आवाज़ सुनी’ उन्होंने बताया कि जब भोर हुई, तो घर मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका था.
बताया जा रहा है कि धमाकों से नबी के घर के आसपास के लगभग एक दर्जन अन्य घरों को भी नुकसान पहुंचा है’

पड़ोसी ने अपने घर की टूटी हुई खिड़कियों की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘मैंने बहुत मुश्किलों से यह घर बनाया है’ इसमें मेरा क्या कसूर था? अब मुझे कौन मुआवज़ा देगा?’
सुरक्षा बलों की एक टीम ने शुक्रवार सुबह फिर से विध्वंस स्थल का दौरा किया, जबकि घटना के बाद की स्थिति को कवर करने आए मीडियाकर्मियों को वहीं रुकने का आदेश दिया गया.
कुछ जांचकर्ता व्यथित स्थानीय निवासियों से पूछताछ करते देखे गए.
मालूम हो कि पिछले साल नवंबर में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि कानून का पालन किए बिना संदिग्धों या दोषियों के घरों को ध्वस्त करना, आश्रय के अधिकार का उल्लंघन है, जो भारतीय संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है.
शीर्ष अदालत ने आश्रय के अधिकार को ‘संविधान के अनुच्छेद 21 का अभिन्न अंग’ करार देते हुए उन प्रभावित अपीलकर्ताओं को आर्थिक मुआवज़ा देने का आदेश दिया जिनके घर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा ध्वस्त कर दिए गए थे.

पुलवामा में यह ध्वस्तीकरण ऐसे समय में हुआ है, जब सात महीने से भी कम समय पहले सुरक्षा बलों ने प्रतिबंधित पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कम से कम नौ संदिग्ध आतंकवादियों के पारिवारिक घरों को जमींदोज कर दिया था, जिन पर इस साल अप्रैल में पहलगाम आतंकवादी हमले में शामिल होने का आरोप था.
बाद में जांचकर्ताओं ने खुलासा किया था कि जिन संदिग्ध आतंकवादियों के घर ध्वस्त किए गए थे, उनमें से कुछ पहलगाम हमले में शामिल नहीं थे.
गौरतलब है कि इस सप्ताह की शुरुआत में पुरानी दिल्ली के भीड़भाड़ वाले इलाके में हुए भीषण विस्फोट में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई थी और दो दर्जन से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे. इस विस्फोट ने देश भर में मुसलमानों और ख़ासकर कश्मीरियों के ख़िलाफ़ भेदभाव और सांप्रदायिक प्रतिक्रिया की आशंकाएं पैदा कर दी हैं’
दिल्ली विस्फोट के बाद कोलकाता स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) परिसर में नफ़रत भरे मुस्लिम विरोधी ग्राफिटी देखने को मिली.
उल्लेखनीय है कि विपक्षी समूहों ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की बार-बार सुरक्षा में नाकामी के लिए आलोचना की है.
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस संबंध में अपराधियों को ऐसी सज़ा देने की बात कही है जिससे ‘कोई भी देश में फिर से इस तरह के हमले के बारे में सोचने की हिम्मत भी नहीं करेगा.’
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