नई दिल्ली: बिहार में 14 नवंबर को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की प्रचंड जीत के बाद असम के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता अशोक सिंघल ने सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर पोस्ट की, जिसे मुस्लिम नरसंहार की एक सांकेतिक अभिव्यक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, सिंघल ने फूल गोभी के खेती की तस्वीर साझा करते हुए कैप्शन में लिखा, ‘बिहार ने गोभी की खेती को मंजूरी दे दी.’
Bihar approves Gobi farming ✅ pic.twitter.com/SubrTQ0Mu5
— Ashok Singhal (@TheAshokSinghal) November 14, 2025
मालूम हो कि इस प्रतीक का संदर्भ साल 1989 के बिहार के भागलपुर दंगों से जोड़ा जाता है, जिसमें 900 से अधिक मुस्लिम मारे गए थे. भागलपुर के लोगांइन गांव में 110 मुसलमानों की हत्या कर उन्हें खेत में दफना दिया गया था. कहा जाता है कि उनकी लाशों पर गोभी के पौधे लगाए गए थे.
इससे पहले द वायर ने बताया था कि कैसे ये फूलगोभी वाले मीम्स हिंदुत्ववादी पॉप-कल्चर में मुसलमानों के नरसंहार के आह्वान का एक वास्तविक उदाहरण बन गए हैं.
उल्लेखनीय है कि भाजपा मंत्री के इस हिंसक संदेश पर कई लोगों ने हैरानी और आपत्ति व्यक्त की है.
सोसल मीडिया मंच एक्स पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने लिखा, ‘यह (पोस्ट) सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देने वाला है. आप महोदय, न तो मेरी और न ही ज़्यादातर भारतीयों की तरफ से बोल रहे हैं. आप अपनी संवैधानिक शपथ का उल्लंघन कर रहे हैं. साथ ही उस पद का भी जिस पर आप आसीन हैं.’
This is incitement to communal slaughter. You sir do not speak for me or for most Indians. You are violating your constitutional oaths and are unworthy of the high office you hold. https://t.co/DEW0RHmS7B
— SANJAY HEGDE (@sanjayuvacha) November 15, 2025
वहीं, किशनगंज से कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने लिखा, ‘भाजपा/आरएसएस कैडर के पास अपने मूल मतदाताओं को देने के लिए केवल एक चीज है! मुस्लिम नफ़रत.’
The BJP/RSS cadre has only one thing to offer to their core voters! Muslim hatred. https://t.co/a6JELddJ4U
— Dr Md Jawaid (@DrMdJawaid1) November 15, 2025
इस संबंध में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद साकेत गोखले ने लिखा, ‘गोभी की खेती का मतलब 1989 में बिहार के भागलपुर में हुए मुसलमानों के सामूहिक नरसंहार का महिमामंडन करना है. सबूत छिपाने के लिए कब्रों पर फूलगोभी की खेती की गई थी. यह असम से मोदी के भाजपाई मंत्री हैं. कोई अवांछित तत्व नहीं. साफ है कि प्रधानमंत्री कार्यालय इसे मंज़ूरी देता है. दुनिया को यह पता होना चाहिए.’
“Gobi farming” refers to glorifying the mass killing of Muslims in Bhagalpur, Bihar, in 1989. A cauliflower farm was planted on the graves to hide evidence.
This is Modi’s BJP Minister from Assam. Not some fringe element.
Clearly, @PMOIndia approves this. The world should know. https://t.co/y4faGndOrQ
— Saket Gokhale MP (@SaketGokhale) November 15, 2025
ज्ञात हो कि हाल के वर्षों में यह संदर्भ अल्ट्रा-राइट और हिंदुत्व समूहों खास करके ट्रैड्स द्वारा फिर से उठाया गया है. इन समूहों द्वारा बनाई गई कुछ ग्राफिक्स में बुर्का पहनी मुस्लिम महिलाओं को भी गोभी के रूप में दर्शाया गया है.
कई हिंदुत्व ट्रैड्स अपने सोशल मीडिया बायो में खुद को ‘गोभी किसान’ बताते हैं.
हिंदुत्व ट्रैड्स कौन हैं?
‘ट्रैड्स’ हिंदुत्व की सबसे उग्र धारा माने जाते हैं- ऐसे युवा जो खुद को सभ्यता के योद्धा मानते हैं और ऑनलाइन ‘युद्ध’ लड़ते हैं. वे अन्य दक्षिणपंथियों को ‘बहुत उदार’ मानते हैं और उन्हें ‘रैता’ कहकर उनका मज़ाक उड़ाते हैं.
यही नहीं, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी कमजोर मानते हैं क्योंकि उनके अनुसार मोदी दलितों को लेकर ‘तुष्टीकरण’ करते हैं और मुसलमानों पर ‘कड़ा’ रुख नहीं अपनाते.
मुख्यधारा की ओर बढ़ते ट्रैड प्रतीक
अब तक भाजपा ऐसे चरमपंथी विमर्श और हिंसक ट्रैड प्रतीकों से दूरी बनाए रखती थी, लेकिन हालिया पोस्ट इस बात का संकेत है कि पार्टी अब इसे स्वीकार कर रही है.
पिछले एक साल में ट्रैड प्रतीकों को मुख्यधारा हिंदुत्व की भाषा में अधिक सहजता से शामिल किया गया है, खासकर मुसलमानों के संदर्भ में. जनवरी 2024 से अब तक भाजपा द्वारा पोस्ट किए गए कई कार्टूनों में यह साफ देखा जा सकता है, जैसे भगवा वस्त्रों में पीएम मोदी को मुसलमानों से टकराते दिखाना, या मुसलमानों को दलितों की संपत्ति छीनते दिखाना.
साल 2022 में गुजरात भाजपा के आधिकारिक एक्स हैंडल से एक पोस्ट साझा की गई थी, जिसमें ‘सत्यमेव जयते’ कैप्शन के साथ दर्जन भर टोपी पहने दाढ़ी वाले लोगों को फांसी पर लटकता दिखाया गया था. सोशल मीडिया पर इसकी तुलना नाज़ी कार्टूनों से की गई और बाद में वह ट्वीट हटा लिया गया.
हालांकि, भाजपा का कहना था कि वह किसी धर्म को निशाना नहीं बना रही थी और यह पोस्ट साल 2006 के अहमदाबाद ब्लास्ट में दोषी ठहराए गए आतंकवादियों के संदर्भ में थी.
द वायर ने पहले भी बताया है कि कैसे पारंपरिक प्रतीक-चित्रण आमतौर पर अल्पसंख्यक समुदायों को ‘उत्तेजित’ करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं. इनमें मुसलमानों का सिर कलम करते हुए, मुसलमानों को उनकी कारों के नीचे कुचलते हुए, दलितों को ‘कॉकरोच’ के रूप में गैस से मारते हुए, या बलात्कार पीड़ितों (जो या तो मुसलमान हैं या दलित) पर भगवाकृत ‘पेपे द फ्रॉग’ द्वारा पेशाब करते हुए दिखाए गए मीम्स शामिल हैं.
प्रतीकात्मकता पर यह निर्भरता सीधे पश्चिमी नव-नाज़ी रचनाकारों से प्रेरित है और कुछ मामलों में दक्षिणपंथी 4chan कार्यकर्ताओं की सामग्री की नकल करती है. फूलगोभी वाला मीम या बिहार में नरसंहारों के आरोपी प्रतिबंधित दलित-विरोधी मिलिशिया रणवीर सेना का आह्वान जैसे संदर्भ स्थानीय तौर पर जोड़े गए हैं.
हालांकि, इस सामग्री का इस्तेमाल भाजपा पदाधिकारियों द्वारा शायद ही कभी किया जाता था और यह ट्रोल और कट्टरवादी प्रभावशाली लोगों तक ही सीमित थी. लेकिन हाल के वर्षों में भाजपा ने इनमें से कुछ संदेशों को अपनाने और बिना किसी रोक-टोक के प्रसारित करने में बहुत कम संयम दिखाया है.
उल्लेखनीय है कि ऐसी तस्वीरें ऑनलाइन अभद्र भाषा कानूनों को दरकिनार करने में सक्षम हैं, और नागपुर में सांप्रदायिक झड़पों के बाद भाजपा समर्थक राजनीतिक टिप्पणीकारों द्वारा इन्हें व्यापक रूप से साझा किया गया था.
हाल ही में भाजपा की कर्नाटक शाखा के आधिकारिक एक्स अकाउंट ने 23 मई को एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक कब्र के ऊपर फूलगोभी पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं जिस पर लिखा है ‘आरआईपी नक्सलवाद.’
इसी तरह सितंबर 2025 में असम भाजपा द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से प्रेरित एक वायरल विज्ञापन में लुंगी, बुर्का और हिजाब पहने मुसलमानों को अपने परिवारों के साथ पिकनिक और खरीदारी करते, आइसक्रीम खाते, हवाई जहाज़ में सवार होते, क्रिकेट देखते और सार्वजनिक स्थानों पर घूमते हुए दिखाया गया था. इस विज्ञापन का उद्देश्य यह था कि अगर कोई अन्य राजनीतिक दल सत्ता में आता है, तो मुसलमानों को सामान्य नागरिकों की तरह रहने दिया जाएगा.
गौरतलब है कि असम मंत्री द्वारा किया गया गोभी की खेती से जुड़ा पोस्ट, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए) 1951 का स्पष्ट उल्लंघन है. ये कानून निम्नलिखित धाराओं में चुनावों के दौरान धर्म के आधार पर मतदाताओं से अपील करने या धार्मिक घृणा को बढ़ावा देने पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगाता है.
इस कानून की धारा 123 3ए में उल्लेख किया गया है कि किसी चुनाव के संबंध में भारत के नागरिकों के विभिन्न वर्गों के बीच धर्म, मूलवंश, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर शत्रुता या घृणा की भावनाओं को बढ़ावा देना या बढ़ावा देने का प्रयास करना या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी चुनाव को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करना या बढ़ावा देने का प्रयास करना भ्रष्ट आचरण माना जाएगा.
धारा 125 में रेखांकित किया गया है कि कोई भी व्यक्ति जो इस अधिनियम के तहत चुनाव के संबंध में धर्म, नस्ल, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर भारत के विभिन्न वर्गों के नागरिकों के बीच शत्रुता या घृणा की भावनाओं को बढ़ावा देता है या बढ़ावा देने का प्रयास करता है, उसे 3 वर्ष तक के कारावास या जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है.
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा ने इनमें से कुछ छवियों और प्रतीकों को अपनाया – जैसे कि पेपे द फ्रॉग, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवा वस्त्र पहने और हरे रंग के कपड़े पहने मुसलमानों से भिड़ते हुए दिखाया गया है और मुसलमानों द्वारा दलितों की संपत्ति और सामान छीनने का एक एनीमेशन दिखाया गया – जिसका उल्लेख प्रधानमंत्री मोदी ने बांसवाड़ा में अपने विवादास्पद भाषण में किया था.
