नई दिल्ली: कांग्रेस द्वारा बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाताओं की संख्या में 3 लाख की बढ़ोतरी पर सवाल उठाए जाने के बाद चुनाव आयोग ने कहा है कि यह बढ़ोतरी नए मतदाताओं के नाम जुड़ने की वजह से हुई है. एसआईआर के बाद बिहार में मतदाताओं की संख्या 7.42 करोड़ थी, जो की चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने तक बढ़कर 7.45 करोड़ हो गई थी.
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के तहत नामांकन की आख़िरी तारीख़ से 10 दिन पहले तक मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकते हैं. आयोग ने कहा कि 3 लाख मतदाताओं की बढ़ोतरी 10 अक्टूबर तक नए मतदाताओं से प्राप्त फ़ॉर्म के आधार पर हुई, जबकि बिहार में नामांकन की आख़िरी तारीख़ 20 अक्टूबर थी.
6 नवंबर को हुए पहले चरण के मतदान के लिए नामांकन 17 अक्टूबर को समाप्त हुए थे, जबकि 11 नवंबर को हुए दूसरे चरण के मतदान के लिए नामांकन की अवधि 20 अक्टूबर थी.
कांग्रेस ने शनिवार (15 नवंबर) को आरोप लगाया था कि एसआईआर के बाद नए मतदाताओं को जोड़कर बिहार में ‘वोट की चोरी’ की गई है. उसने कहा था कि एसआईआर के बाद मतदाता संख्या 7.42 करोड़ थी, जो चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने तक 3 लाख बढ़कर 7.45 करोड़ हो गई.
ज्ञात हो कि हाल ही में समाप्त हुए बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों में भाजपा और जदयू के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन ने 243 में से 202 सीटें जीतकर फिर से सरकार बनाने में कामयाब रही. वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व में विपक्षी महागठबंधन केवल 35 सीटों पर सिमट गया. कांग्रेस को सिर्फ 6 सीटें मिलीं, जबकि साल 2020 में सबसे बड़ी पार्टी राजद महज 25 सीटों पर सिमट गई.
चुनाव में भीषण हार के बाद कांग्रेस की दिल्ली में शनिवार को हुई समीक्षा बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि ‘परिणाम अविश्वसनीय’ हैं. उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘90% की स्ट्राइक रेट भारतीय इतिहास में अभूतपूर्व है.’
‘हम आंकड़े जुटा रहे हैं और विस्तृत विश्लेषण कर रहे हैं. 1-2 सप्ताह में हम ठोस सबूत पेश करेंगे. यह पूरा चुनावी प्रक्रिया अत्यंत संदिग्ध रहा है. चुनाव आयोग पूरी तरह पक्षपाती है.. कोई पारदर्शिता नहीं है.’
इससे पहले शुक्रवार (14 नवंबर) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी परिणामों को ‘चौंकाने वाला’ और पक्षपाती बताया था.
उनका कहना था, ‘बिहार का यह परिणाम वाकई चौंकाने वाला है. हम एक ऐसे चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके, जो शुरू से ही निष्पक्ष नहीं था. यह लड़ाई संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की है. कांग्रेस पार्टी और इंडिया गठबंधन इस परिणाम की गहराई से समीक्षा करेंगे और लोकतंत्र को बचाने के अपने प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाएंगे.’
