नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ में आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने दो नाबालिगों को हिरासत में लिया है और उन पर आईएसआईएस मॉड्यूल से ऑनलाइन कथित संबंधों के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों कथित तौर पर फर्जी सोशल मीडिया हैंडल का इस्तेमाल करके कट्टरपंथी प्रोपगैंडा फैलाने के लिए प्रेरित कर रहे थे.
मंगलवार को इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, ‘एटीएस छत्तीसगढ़ को एक बड़ी सफलता मिली है. रायपुर के दो नाबालिग एक आईएसआईएस समूह के साथ (ऑनलाइन) संपर्क में थे.’
उन्होंने आगे बताया कि दोनों पाकिस्तान स्थित एक मॉड्यूल के निर्देशों पर काम कर रहे थे. दोनों सोशल मीडिया पर सक्रिय थे और फर्जी इंस्टाग्राम आईडी का इस्तेमाल करके दूसरों को प्रभावित कर रहे थे.
बताया गया है कि यह मामला तब प्रकाश में आया जब पुलिस को उनके द्वारा किए गए भड़काऊ पोस्ट मिले, जिसके बाद उनकी गतिविधियों पर नज़र रखी गई. मंत्री ने बताया कि उनकी गतिविधियां भारत विरोधी पाई गईं, जिसके चलते उन पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है.
गृह मंत्री ने आगे बताया, ‘रायपुर और छत्तीसगढ़ के अन्य प्रमुख शहरों में ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. मैं मुख्यमंत्री से एटीएस टीम का विस्तार करने का भी अनुरोध करूंगा.’
गौरतलब है कि इससे पहले महाराष्ट्र एटीएस ने पुणे से पकड़े गए एक 37 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ज़ुबैर हंगरगेकर पर आरोप लगाया था कि वह सोशल मीडिया पर अल-कायदा के विचारों को फैला रहे हैं.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, ज़ुबैर हंगरगेकर को बीते महीने 27 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद हाल ही में पुणे एटीएस ने खुलासा किया है कि उनके संबंध आतंकवादी समूह अल-कायदा से थे, और वह युवाओं को भारत की चुनावी प्रक्रिया से अलग होने के लिए उकसा रहे था.
एटीएस के अनुसार, जुबैर कई सोशल मीडिया मंच टेलीग्राम के कई ग्रुप से जुड़े थे, जिनमें कथित तौर पर गज़वा-ए-हिंद, खिलाफत की स्थापना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नकारने पर चर्चा होती थी. जुबैर कथित तौर पर युवाओं और अपने जैसे सामान विधारधारा वाले लोगों से कहते थे कि लोकतंत्र शरियत के खिलाफ है.
मालूम हो कि हाल ही में 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए कार धमाके के बाद दिल्ली एनसीआर समेत देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है. इस संबंध में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 नवंबर की शाम को पारित एक प्रस्ताव में कहा था कि दिल्ली में लाल किले के पास हुआ घातक कार विस्फोट एक ‘आतंकवादी घटना’ थी.
उल्लेखनीय है कि दिल्ली विस्फोट के बाद सोशल मीडिया पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है. इस संबंध में बीते सप्ताह 11 नवंबर को असम पुलिस ने कछार ज़िले के एक सरकारी स्कूल के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य को सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी पोस्ट करने के आरोप में हिरासत में लिया था. इस पोस्ट में दिल्ली में हुए विस्फोट को कथित तौर पर चुनावों से जोड़ा गया था.
