नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड संबंधी एक मामले में सवाल उठाया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अपनी मशीनरी का इस्तेमाल ‘राजनीतिक लड़ाई’ में क्यों कर रहा है.
डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मंगलवार (18 नवंबर) को झारखंड विधानसभा सचिवालय में नियुक्तियों और पदोन्नति में अनियमितताओं के आरोपों की प्रारंभिक जांच शुरू करने की अनुमति मांगने वाली सीबीआई की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया.
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, ‘आप अपनी राजनीतिक लड़ाई के लिए मशीनरी का इस्तेमाल क्यों करते हैं? हम आपको कई बार बता चुके हैं.’
मालूम हो कि शीर्ष अदालत ने पिछले साल 14 नवंबर को झारखंड हाईकोर्ट के 23 सितंबर के उस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसमें सीबीआई को राज्य विधानसभा में नियुक्तियों और पदोन्नति में कथित अनियमितताओं की जांच करने का निर्देश दिया गया था.
उल्लेखनीय है कि सीजेआई बीआर गवई की बेंच मंगलवार को सीबीआई की अंतरिम अर्जी पर सुनवाई कर रही थी. इस मामले पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सीबीआई की याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है.
वहीं, इस मामले में झारखंड विधानसभा सचिवालय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि जब भी कोई मामला आता है, सीबीआई पहले ही अदालत में पेश हो जाती है.
हालांकि, सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने इस बात से असहमति जताई और तर्क दिया कि अपराध होने पर सीबीआई पेश होती है, लेकिन पीठ इससे सहमत नहीं नज़र आई.
ज्ञात हो कि इससे पहले जस्टिस गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी, लेकिन पीठ बाद में झारखंड विधानसभा सचिवालय और अन्य द्वारा हाईकोर्ट के 23 सितंबर, 2024 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई थी.
सीबीआई का कथित दुरुपयोग और एजेंसी में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या
गौरतलब है कि विपक्ष लगातार सीबीआई, ईडी और एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियों के कथित ‘दुरुपयोग’ को लेकर सवाल उठाता रहा है. चुनाव के समय प्रतिद्वंद्वी दलों और उनके नेताओं के खिलाफ छापेमारी, तलाशी और गिरफ्तारियों को लेकर कई बार चुनाव आयोग से भी संपर्क किया गया है. हालांकि, आयेग अक्सर इस संबंध में चुप्पी साधे ही नज़र आता है.
केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की बीते साल आई वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि 31 दिसंबर 2023 तक भ्रष्टाचार से जुड़े केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच वाले 6,900 से अधिक मामले विभिन्न अदालतों में लंबित हैं, जिनमें से 361 मामले 20 सालों से अधिक पुराने हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, भ्रष्टाचार के 658 मामले सीबीआई जांच के लिए लंबित हैं. वहीं, इनमें से 48 मामले पांच साल से अधिक समय से लंबित हैं.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि 31 दिसंबर 2023 तक की स्थिति को देखें तो सीबीआई में 1,610 खाली पद थे, जबकि इसमें स्वीकृत पदों की संख्या 7,295 थी. इनमें से 1,040 कार्यकारी रैंक के हैं. वहीं, 84 कानून अधिकारी, 53 तकनीकी अधिकारी, 388 मंत्रालयीन कर्मचारी और 45 कैंटीन कर्मचारी हैं.
