एल्गार परिषद केस: साढ़े पांच साल से जेल में क़ैद ज्योति जगताप को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम ज़मानत

सुप्रीम कोर्ट ने कबीर कला मंच से जुड़ीकार्यकर्ता ज्योति जगताप को एल्गार परिषद केस में अंतरिम ज़मानत दे दी है. पांच साल छह महीने जेल में रह चुकी जगताप इस केस में गिरफ़्तार होने वाली तीन महिलाओं में से एक हैं और इस समय जेल में बंद अकेली महिला आरोपी हैं. इस केस में कुल 16 मानवाधिकार कार्यकर्ता और शिक्षाविद को गिरफ़्तार किया गया था.

ज्योति जगताप. (फोटो साभार: फेसबुक)

मुंबई: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (19 नवंबर) को सांस्कृतिक कार्यकर्ता ज्योति जगताप को एल्गार परिषद केस में अंतरिम ज़मानत दे दी, जिसमें वह पांच साल छह महीने जेल में रह चुकी हैं.

उनकी अंतरिम ज़मानत अगली सुनवाई तक जारी रहेगी, जो फरवरी 2026 में होनी है. रेगुलर ज़मानत पाने के उनके लंबे संघर्ष में ट्रायल कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अलग-अलग बेंचों के सामने कई याचिकाएं शामिल हैं.

जगताप, जो इस केस में गिरफ्तार होने वाली तीन महिलाओं में से एक हैं और अभी भी जेल में बंद अकेली महिला हैं, को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की डिवीज़न बेंच ने अंतरिम राहत दी. मामले में आरोपी बनाई गई बाकी दो महिलाएं– वकील सुधा भारद्वाज और रिटायर्ड प्रोफ़ेसर शोमा सेन – पहले से ही ज़मानत पर बाहर हैं.

ज्ञात हो कि जून 2018 में शुरू हुई गिरफ्तारियों के पहले दौर के बाद से इस केस में कुल 16 मानवाधिकार कार्यकर्ता और शिक्षाविद को गिरफ्तार किया गया था. इनमें से जगताप समेत पांच लोग अभी भी जेल में हैं और बाकी या तो पूरी या अंतरिम बेल पर हैं.

जेल में बंद दूसरे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में वकील सुरेंद्र गाडलिंग, दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हेनी बाबू, संस्कृति कर्मी और कार्यकर्ता सागर गोरखे और रमेश गाइचोर शामिल हैं.

इस मामले में गिरफ्तार होने वाले लोगों में से एक –  84 साल के पादरी और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी की 5 जुलाई, 2021 को हिरासत में कोविड-19 के कारण और समय पर सही मेडिकल केयर न मिलने के कारण मौत हो गई.

जगताप की अंतरिम बेल पर फैसला उनकी वकील सीनियर एडवोकेट अपर्णा भट के कोर्ट के सामने दिए गए बयान के बाद आया कि जगताप ने साढ़े पांच साल से ज़्यादा समय तक जेल में सज़ा काटी है. एडवोकेट करिश्मा मारिया भी जगताप की तरफ से पेश हुईं.

कबीर कला मंच (केकेएम) से जुड़ी जगताप को 8 सितंबर, 2020 को गिरफ्तार किया गया था. बाद में केकेएम पर यूएपीए के तहत बैन लगा दिया गया था.

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने दावा किया है कि जगताप उस टीम का हिस्सा थीं जिसने 31 दिसंबर, 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा इलाके में एल्गार परिषद मे सेमिनार का आयोजन किया था.

शुरुआत में पुणे पुलिस ने इस केस को संभाला था, जिसे बाद में एनआईए ने अपने हाथ में ले लिया. दोनों एजेंसियों ने एल्गार परिषद पर 1 जनवरी, 2018 को पुणे से 30 किलोमीटर दूर भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है.

जगताप से पहले इसी पीठ ने उनके सह आरोपी महेश राउत को मेडिकल आधार पर अंतरिम ज़मानत दी थी. राउत, जिन्हें पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने 21 सितंबर, 2023 को ज़मानत दी थी, दो महीने पहले तक जेल में बंद थे, जब एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट में ज़मानत आदेश को चुनौती दिया था.

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता और स्कॉलर राउत कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और उन्हें तुरंत मेडिकल मदद की ज़रूरत है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 26 नवंबर तक अंतरिम ज़मानत दी है. कोर्ट ने बुधवार को उनकी अंतरिम ज़मानत भी अगली सुनवाई तक बढ़ा दी है.