एसआईआर: उत्तर प्रदेश में 60 बीएलओ के ख़िलाफ़ केस दर्ज, दो निलंबित

उत्तर प्रदेश के नोएडा प्रशासन ने मतदाता सूची के एसआईआर के दौरान लापरवाही और निर्देशों का पालन न करने के आरोप में 60 से ज़्यादा बीएलओ और सात सुपरवाइजर के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की है, जबकि बहराइच में एक भाजपा नेता की शिकायत पर लापरवाही के आरोप में दो बीएलओ को निलंबित किया गया है.

बहराइच में एक भाजपा नेता की शिकायत पर लापरवाही के आरोप में दो बीएलओ को निलंबित किया गया है और तीसरे पर केस दर्ज किया गया है.(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के नोएडा प्रशासन ने मतदाता सूची के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान लापरवाही और निर्देशों का पालन न करने के आरोप में तीन थानों में 60 से ज़्यादा बूथ-लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और सात सुपरवाइजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

वहीं, प्रदेश के बहराइच में भाजपा नेता की शिकायत पर लापरवाही के आरोप में दो बीएलओ को निलंबित किया गया है और तीसरे पर केस दर्ज किया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा में यह कार्रवाई जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के सेक्शन 32 के तहत की गई. डीएम मेधा रूपम, जो नोएडा की जिला चुनाव अधिकारी भी हैं, के आदेश पर नोएडा के तीन विधानसभा क्षेत्रों के एसडीएम ने उन बीएलओ के नाम एफआईआर दर्ज कीं, जिन्होंने कथित तौर पर नियमों का पालन नहीं किया है.

ज्ञात हो कि नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे एसआईआर चरण-II के लिए एक महीने के गिनती के लिए बीएलओ को डिस्ट्रीब्यूशन और कलेक्शन का इंचार्ज बनाया गया है, जिसकी अंतिम तिथि 4 दिसंबर है. बिहार की प्रक्रिया से अलग मौजूदा चरण में बीएलओ पर यह ज़िम्मेदारी है कि वे गिनती के चरण के दौरान ही फॉर्म पर दी गई वोटर डिटेल्स को वोटर या उनके माता-पिता की पुरानी वोटर लिस्ट से मिलाएं.

नोएडा प्रशासन के मुताबिक, बार-बार निर्देश, चेतावनियों और नोटिस के बावजूद कई बीएलओ ‘अपने तय एरिया में रिपोर्ट नहीं किए’ और ‘सीनियर अधिकारियों के आदेश मानने में विफल रहे.’

ग्रेटर नोएडा के इकोटेक फेज़ 1 पुलिस स्टेशन में 33 बीएलओ और एक सुपरवाइज़र के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई है. जेवर पुलिस स्टेशन में अधिकारियों ने 17 बीएलओ के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज की है. हर एफआईआर इलाके के एसडीएम ने दर्ज की है, जिन्हें चल रही एसआईआर कवायद में लोकल इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) के तौर पर काम करने के लिए नियुक्त किया गया है.

डीएम के ‘वॉर रूम’ से जारी एक विस्तृत बयान में कहा गया है कि चुनाव आयोग के निर्देशों के मुताबिक सख्त कार्रवाई का आदेश दिया गया है.

शनिवार को डीएम रूपम ने कलेक्ट्रेट में सेक्टर और ज़ोनल मजिस्ट्रेट के साथ एक रिव्यू मीटिंग की, जिसमें उन्हें रिवीजन का काम ‘प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध’ तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया. डीएम ने कहा, ‘हर बीएलओ को अपने इलाके में समय पर पहुंचना होगा, घर-घर जाकर लोगों से मिलना होगा और नए वोटरों के लिए फॉर्म 6 और ट्रांसफर या बदलाव के लिए फॉर्म 8 भरना होगा.’

उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की देरी या लापरवाही पर नोटिस और सफाई मांगी जाएगी. प्रशासन ने पहले चेतावनी दी थी कि बार-बार ऐसा न करने पर वेतन रोकी जा सकती है और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीच, डीएम और जिला चुनाव अधिकारी मेधा रूपम ने आंगनवाड़ी कैडर के 181 बूथ-लेवल ऑफिसर को बर्खास्त करने का नोटिस जारी करने का आदेश दिया है, क्योंकि मतदाता सूची के चल रहे एसआईआर में उनका डिजिटाइजेशन का काम 5% से कम पाया गया.

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि उनकी देखरेख करने वाले बाल विकास परियोजना अधिकारियों के खिलाफ एडवर्स एंट्री और विभागीय कार्रवाई की जाए. गणना फ़ॉर्म खुद इकट्ठा करने और उन्हें सत्यापित करने के बाद बीएलओ को डेटा को डिजिटाइज़ करने के लिए फ़ाइनल नाम ऑनलाइन अपलोड करने होते हैं.

बेसिक एजुकेशन ऑफिसर को उन 191 असिस्टेंट टीचर और 113 शिक्षा मित्रों के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए भी कहा गया है, जिन्होंने अपने दिए गए काम का 15% से कम डिजिटाइज किया है.

बहराइच

बहराइच के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) आशीष कुमार सिंह ने कहा कि एक प्राइमरी स्कूल की हेड मिस्ट्रेस शमा नफीस, जिन्हें बीएलओ बनाया गया था, पर आरोप है कि उन्होंने सीनियर अधिकारियों के रिमाइंडर के बावजूद ड्यूटी पर आने के लिए लिखे गए नोटिस और बार-बार किए गए फोन कॉल को नज़रअंदाज़ किया.

इसी तरह, बताया गया है कि एक प्राइमरी स्कूल के असिस्टेंट टीचर अनुराग ने भी एसआईआर कवायद के तहत उन्हें दी गई ज़िम्मेदारी निभाने से मना कर दिया. सिंह ने कहा कि बार-बार निर्देशों के बावजूद दोनों अपनी ड्यूटी करने के लिए तैयार नहीं थे.

इस बीच, भाजपा नेता अंकित कुमार सिंह की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक बीएलओ अभिषेक सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया है.

पुलिस के मुताबिक, शिकायत करने वाले ने दावा किया कि पार्टी के निर्देश के बाद उन्होंने 18 नवंबर को एसआईआर फॉर्म बांटने के बारे में जानकारी लेने के लिए बीएलओ सिंह को कॉल किया था. शिकायत में आरोप लगाया गया कि कॉल के दौरान सिंह भड़क गए और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया.

शिकायत करने वाले ने दावा किया कि इस घटना से पार्टी और उसके नेता की छवि को नुकसान पहुंचा है, जिससे वह डरे हुए और परेशान हैं.

विशेश्वरगंज पुलिस स्टेशन में शांति भंग करने के लिए उकसाने, आपराधिक धमकी और मानहानि की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. बहराइच के सर्कल ऑफिसर राज सिंह यादव ने कहा कि शिकायत करने वाले ने एक कॉल रिकॉर्डिंग और चैट जमा की है.