नई दिल्ली: राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) अधिनियम को खारिज करने के दस साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (26 नवंबर) को कहा कि वह सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए वर्तमान कॉलेजियम प्रणाली की जगह एनजेएसी को बहाल करने की याचिका पर विचार करेगा.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मैथ्यूज नेदुम्परा द्वारा एनजेएसी के लिए मौखिक अनुरोध किए जाने के बाद, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने यह टिप्पणी की.
इस संबंध में जब नेदुम्परा ने शीर्ष अदालत से कॉलेजियम प्रणाली पर पुनर्विचार करने और एनजेएसी फैसले को फिर से खोलने का अनुरोध किया, तो मुख्य न्यायाधीश कांत ने कहा, ‘हां, हम देखेंगे.’
उन्होंने आगे कहा कि पिछली पीठों ने उनकी दलीलों पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया.
मुख्य न्यायाधीश ने जवाब में कहा, ‘अब हम हिंदी में जवाब देंगे…जानबूझकर ये कर रहे हैं आप…हम हिंदी में बात करेंगे.’ नेदुम्परा के यह कहने पर कि उन्हें हिंदी समझ नहीं आती, मुख्य न्यायाधीश ने जवाब दिया, ‘हम इस याचिका पर विचार करेंगे.’
उल्लेखनीय है कि एनजेएसी को एक संवैधानिक संशोधन के माध्यम से कॉलेजियम प्रणाली के स्थान पर एक ऐसी प्रणाली लाने के लिए पेश किया गया था जो न्यायिक नियुक्तियों में कार्यपालिका को अधिक अधिकार प्रदान करेगी.
मालूम हो कि 2015 में सर्वोच्च न्यायालय ने 4:1 के बहुमत से एनजेएसी अधिनियम को रद्द कर दिया था और संविधान संशोधन को ‘असंवैधानिक और अमान्य’ घोषित कर दिया था. तब सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि एनजेएसी से पहले वाली कॉलेजियम प्रणाली फिर से ‘प्रभावी’ हो जाएगी.
हालांकि, पीठ ने कहा था कि ‘न्यायाधीशों द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति’ वाली कॉलेजियम प्रणाली में भी सब कुछ ठीक नहीं है और न्यायिक नियुक्तियों की प्रणाली में सुधार का समय आ गया है.
जस्टिस जेएस खेहर ने उस समय कहा था, ‘इस प्रणाली को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें. आप देखिए, मन एक अद्भुत उपकरण है. जब अलग-अलग मन और हित मिलते या टकराते हैं, तो विचारों में भिन्नता अद्भुत होती है.’
गौरतलब है कि पूर्व भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने एक कार्यक्रम के दौरान जजों को नियुक्त करने वाली कॉलेजियम प्रणाली के बचाव में कहा था कि हर व्यवस्था संपूर्ण नहीं होती, लेकिन न्यायपालिका द्वारा विकसित यह सबसे अच्छी व्यवस्था है.
जस्टिस चंद्रचूड़ के अनुसार, इस प्रणाली का उद्देश्य आज़ादी को बनाए रखना था, जो कि एक प्रमुख मूल्य है. पूर्व मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित ने भी शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए इसे ‘आदर्श प्रणाली’ बताया.
ज्ञात हो कि केंद्र सरकार और न्यायपालिका के बीच लंबे समय से कॉलेजियम प्रणाली विवाद का एक प्रमुख कारण है.
