नई दिल्ली: भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा जारी किए गए नए भूकंपीय मानचित्र में पूरे उत्तराखंड राज्य को भूकंपीय जोन 6 में रखा गया है. यह श्रेणी भूकंप संवेदनशीलता की सबसे ऊंची श्रेणी मानी जाती है. इस नए मानचित्र में राज्य के मैदानी और पर्वतीय दोनों क्षेत्र शामिल हैं.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले के वर्गीकरण में उत्तराखंड को जोन 4 और जोन 5 में बांटा गया था.
भूकंपीय जोन 6 में रखे जाने का अर्थ है कि भविष्य में अगर कोई भूकंप आता है, तब राज्य के हर हिस्से में समान और व्यापक नुकसान होने की संभावना रहेगी. जोन 6 में शामिल किए जाने का मतलब यह भी है कि राज्य को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से जुड़ी नीतियों में बड़े बदलाव करने होंगे और सख्त, एकरूप भवन निर्माण नियमों का पालन करना होगा.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने अख़बार को बताया, ‘पूरे राज्य का जोन 6 में आने का मतलब है कि किसी भी भूकंप की स्थिति में बुनियादी ढांचे को होने वाला नुकसान हर क्षेत्र में लगभग समान होगा.’ बताया गया है कि पहले के भवन निर्माण उपनियमों में जोन 4 के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए कुछ रियायतें दी गई थीं.
अब राज्य को ऐसे भवन निर्माण मानकों को अपनाना होगा जो रिक्टर पैमाने पर 8 तीव्रता तक के भूकंप झेल सकें. इससे राज्य पर काफी आर्थिक बोझ बढ़ेगा. ज्ञात हो कि उत्तराखंड पहले से ही सीमित वित्तीय संसाधनों के साथ काम करता है.
राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने अखबार को बताया, ‘पुराने मानचित्र में उत्तराखंड के कुछ हिस्से जोन 4 में और कुछ जोन 5 में थे. लेकिन नए मानचित्र में पूरा राज्य जोन 6 में आ गया है, जिससे उत्तराखंड की भूकंप और आपदा संवेदनशीलता काफी बढ़ गई है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘इसके परिणामस्वरूप भवन निर्माण उपनियमों में संशोधन किया जाएगा. इसके लिए हाउसिंग विभाग और रुड़की स्थित सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) मिलकर काम करेंगे. साथ ही, जनता को सुरक्षा उपायों और संरचनात्मक डिज़ाइन के बारे में जागरूक करना भी बेहद जरूरी है.’
