नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने शनिवार (6 दिसंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के हाल ही में संचालन संबंधी अव्यवस्था के चलते देशभर की विमान सेवा में उत्पन्न हुए संकट और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा उड़ान ड्यूटी समय सीमा (एफडीटीएल) नियमों में छूट देने को लेकर संयुक्त संसदीय समिति या न्यायिक जांच का आदेश दें.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) सांसद ने अपने पत्र में रेखांकित किया कि पायलट और यात्रियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए एक सुरक्षा नियम को तोड़-मरोड़कर कमज़ोर कर दिया गया. विमान कंपनी ने इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया, जिसके चलते उसे नियमों में छूट मिल गई.
इसके साथ ही ब्रिटास ने दावा किया कि इन मानदंडों के कार्यान्वयन में ‘परिचालन योजना, बदलाव की तैयारी, प्रभावी आकलन और नियामक दूरदर्शिता का भयावह अभाव दिखाई देता है.’
पत्र में कहा गया है, ‘देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो, जो घरेलू बाजार में 63-65% की प्रमुख हिस्सेदारी रखती है, द्वारा अचानक बड़ी संख्या में उड़ानों को रद्द कर दिया गया और कई घंटों की देरी से चलीं, जिसके चलते देशभर में हवाई यात्रा पूरी तरह से ठप हो गई है. बाजार शक्ति के इस असाधारण एकाधिकार को देखते हुए, एक निजी ऑपरेटर की विफलता पूरी प्रणाली की असफलता में बदल हो गई.’
सांसद ने आगे लिखा कि इस संकट के चलते हज़ारों यात्री फंसे रहे, टर्मिनल के फर्श पर सोने को मजबूर हुए और चिकित्सा आपात स्थिति, शोक, परीक्षा, शादियों और महत्वपूर्ण रोज़गार संबंधी प्रतिबद्धताओं से चूक गए. इस तरह का मानवीय संकट और आर्थिक नुकसान अभूतपूर्व और अक्षम्य है.’
पत्र में आगे कहा गया है, ‘इससे भी अधिक परेशान करने वाली बात यह है कि अनुमानित दबाव में प्रणाली के ध्वस्त होने के बाद, शुरू में लागू किए गए सुरक्षा मानदंडों को जल्दबाजी में कमज़ोर कर दिया गया या वापस ले लिया गया, जिससे गंभीर चिंताएं पैदा हुईं कि यात्रियों की सुरक्षा को व्यावसायिक सुविधा के अधीन कर दिया गया.’
इस विस्तृत पत्र में नियामक विफलता, विमानन क्षेत्र पर एकाधिकारवादी नियंत्रण, सुरक्षा मानदंडों में ढील, एयरलाइनों द्वारा अनियंत्रित मुनाफाखोरी और स्पष्ट वैधानिक शक्तियों तथा संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों के बावजूद सरकार द्वारा लगातार कार्रवाई न करने जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया गया है.
सांसद के अनुसार, ‘दो एयरलाइनों द्वारा भारतीय हवाई क्षेत्र पर लगभग एकाधिकार और कॉरपोरेट संस्थाओं द्वारा प्रमुख हवाई अड्डों के निजीकरण और वाणिज्यिक संचालन ने नए या क्षेत्रीय हवाई अड्डों के अवसरों को कमज़ोर कर दिया है.’
पत्र में सांसद ने कहा है, ‘मैं सम्मानपूर्वक कहना चाहता हूं कि इस मामले को अब आंतरिक समीक्षाओं या सलाहकारी परिपत्रों के ज़रिए नहीं सुलझाया जा सकता. शासन की विश्वसनीयता ही एक स्वतंत्र, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग करती है जिसमें नियामक फ़ाइलों, एयरलाइन की तैयारियों के रिकॉर्ड और मूल्य निर्धारण के आंकड़ों तक पूरी पहुंच हो. इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप एक संयुक्त संसदीय समिति या न्यायिक जांच आयोग गठित करने के लिए कदम उठाएं.’
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