बंगाल: शुभेंदु अधिकारी द्वारा हमलावरों की सराहना के बाद पीड़ित विक्रेता ने कहा- बहुत डरा हुआ हूं

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता में चिकन पैटी बेचने वाले दो व्यक्तियों पर हमला करने के आरोप में हाल ही में ज़मानत पर रिहा हुए तीन लोगों को सार्वजनिक रूप से बधाई दी और उनका सम्मान किया. वहीं पीड़ित विक्रेता का कहना है कि वह बेहद भयभीत हैं.

भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी गीता पाठ कार्यक्रम के दौरान चिकन पैटी बेचने वाले खाद्य विक्रेता पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए तीन लोगों को जमानत पर रिहा किए जाने पर उन्हें बधाई दी. (फोटो: फेसबुक/सुवेंदु अधिकारी)

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता में चिकन पैटी बेचने वाले दो व्यक्तियों पर हमला करने के आरोप में हाल ही में जमानत पर रिहा हुए तीन लोगों को सार्वजनिक रूप से बधाई दी और उनका सम्मान किया.

रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना ‘लक्ष कोंठ गीता पाठ’ कार्यक्रम के दौरान हुई थी. यहां पीड़ित विक्रेता चिकन पैटीज बेचने पहुंचे थे, जब उन पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया.

पीड़ितों में से एक ने द वायर को बताया कि आरोपियों के ज़मानत पर रिहा होने के बाद वह ‘बहुत डरे हुए’ हैं.

मालूम हो कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पूर्व सहयोगी शुभेंदु अधिकारी ने अपने आधिकारिक फेसबुक प्रोफाइल पर आरोपियों के साथ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, ‘आज मैंने कोलकाता में आदरणीय संतों की उपस्थिति में तीन हिंदू योद्धाओं- सौमिक भाई, स्वर्णेंदु भाई और तरुण भाई को सम्मानित किया. माननीय न्यायालय ने आज उन्हें जमानत दे दी.’

इसके अलावा भाजपा नेता ने इस अवसर का उपयोग मुख्यमंत्री को निशाने पर लेने के लिए भी किया.

उन्होंने लिखा, ‘मैं ममता बनर्जी से कहना चाहता हूं कि आप अपने वफादार पुलिसकर्मियों को उनके पीछे लगाकर ‘सनातनियों’ का दमन नहीं कर सकतीं. धर्म की रक्षा के लिए सनातनियों का संघर्ष जारी रहेगा, और इस संघर्ष में मैं हर हिंदू के साथ-साथ हिंदुत्व के अनगिनत समर्थकों के साथ खड़ा हूं.’

बाद में मीडिया से बात करते हुए अधिकारी ने ज़ोर देकर कहा कि एक हिंदू के रूप में उनकी पहचान विधायक, विपक्ष के नेता और भाजपा सदस्य के रूप में उनकी राजनीतिक भूमिकाओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा, ‘अगर मेरे हिंदू भाई-बहन मुसीबत में हैं, तो मेरा पहला कर्तव्य अपने धर्म की रक्षा करना है. गीता ने मुझे यही सिखाया है.’

उन्होंने आगे ये भी कहा कि आधिकारिक कार्रवाई के बावजूद ‘भारत में न्याय की आवाज़ अब भी खामोश है.’

उन्होंने सीएम बनर्जी की आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने ‘अहंकारपूर्वक’ गिरफ्तारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी ले ली है. इसके बाद अधिकारी ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा, ‘गिरफ्तारियों का फैसला करने वाली वह कौन होती हैं?’

नंदीग्राम के विधायक अधिकारी ने तीनों आरोपियों की रिहाई में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी कानूनी टीम को मैदान पुलिस स्टेशन भेजा था, जहां शिकायत दर्ज कराई गई थी, और कई वकीलों के साथ मिलकर उनकी ज़मानत सुनिश्चित की.

बैंकशाल अदालत ने तीनों आरोपियों को 1,000 रुपये के निजी मुचलके जमा करने पर रिहा कर दिया.

उल्लेखनीय है कि खाद्य विक्रेताओं की मूल शिकायत में आरोप लगाया गया था कि धार्मिक समारोह में मांसाहारी भोजन परोसने पर युवकों के एक समूह ने उन पर हमला किया था.

विक्रेताओं ने यह भी दावा किया कि उन्हें कान पकड़कर बैठने के लिए मजबूर किया गया. कथित तौर पर इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ, जिसके बाद पुलिस ने मामले में हस्तक्षेप किया.

चिकन पैटी बेचने वाले शख्स ने कहा: बहुत डरा हुआ हूं

द वायर से बात करते हुए हमले का शिकार हुए खाद्य विक्रेताओं में से एक शेख रियाजुल ने कहा, ‘मैं डरा हुआ हूं, बहुत डरा हुआ हूं. मेरे हमलावर ज़मानत पर बाहर हैं. उन्होंने मेरे खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है. मैं बहुत गरीब हूं. मैं उनसे कैसे लड़ सकता हूं?’

इस घटना के एक दिन बाद वह हुगली के अपने गांव लौट गए. तब से उन्होंने घर से बाहर कदम नहीं रखा है. उनका कहना है कि उन्हें अब और कुछ समझ नहीं आ रहा कि वे क्या करें. क्योंकि उन्हें अपने परिवार का पेट भी पालना है.

रियाजुल का दावा है कि प्रशासन से किसी ने भी उनसे संपर्क नहीं किया है.

उन्होंने बताया, ‘नहीं, पुलिस ने मुझसे बात नहीं की. न ही सरकारी वकील ने घटना के बारे में जानने के लिए मुझे फोन किया.’

ज्ञात हो कि रियाजुल के अलावा हिंदुत्व ब्रिगेड ने दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एक अन्य फेरीवाले श्याममल मंडल पर भी हमला किया था.

हमलावरों के खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज कराने वाले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) नेता और वकील सायन बंदोपाध्याय ने द वायर को बताया, ‘ब्रिगेड मैदान में भीड़ द्वारा मारपीट की घटना में सभी आरोपियों को जमानत मिल गई है. सभी धाराएं जमानती थीं; केवल ‘धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना’ गैर-जमानती धारा है. संयोग से, मेरी शिकायत में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई जिक्र नहीं था – यह भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने के बारे में थी.’

बंदोपाध्याय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि धारा 299 के तहत तीन साल की कैद की सज़ा है, और साथ ही यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर निर्धारित सज़ा सात साल से कम है, तो धारा 41ए के तहत नोटिस देना अनिवार्य है.

उन्होंने कहा, ‘स्वाभाविक रूप से इस धारा के तहत पुलिस आरोपी को हिरासत में नहीं ले सकती. क्या पुलिस को यह सीधी-सी बात पता नहीं थी? पहले तो पुलिस निष्क्रिय रही. बाद में हमारी शिकायत के बाद, उन्हें आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए मजबूर होना पड़ा – लेकिन मामला इस तरह से गढ़ा गया कि कुछ ही घंटों में सभी आरोपियों को ज़मानत मिल गई.’

बंदोपाध्याय ने आगे कहा, ‘मैंने शिकायत दर्ज कराई थी, फिर भी अजीब बात है कि मैं वास्तविक शिकायतकर्ता नहीं हूं! गिरफ्तारी की खबर के बाद मैंने मैदान थाने प्रभारी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन हैरानी की बात नहीं है कि उन्होंने मेरे फोन का जवाब नहीं दिया. दोपहर को मुख्यमंत्री की ओर से एक जोरदार और जोशीला भाषण दिया गया और शाम तक उनके राज्य की पुलिस ने जमानत का इंतजाम कर दिया.’