जम्मू-कश्मीर: मेघा इंजीनियरिंग का आरोप- स्थानीय भाजपा विधायक ने रोका बिजली परियोजना का काम

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले में बन रही कई अरब रुपये की जलविद्युत परियोजना रतले बिजली परियोजना के निर्माण से जुड़ी कंपनी ने भाजपा की स्थानीय विधायक पर काम में बाधा डालने का आरोप लगाया है. रतले परियोजना काफी समय से भाजपा से जुड़े राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से घिरी रही है.

श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भाजपा विधायक शगुन परिहार. (फाइल फोटो: पीटीआई/एस. इरफान)

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले में बन रही कई अरब रुपये की जलविद्युत परियोजना- रतले बिजली परियोजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है. परियोजना के निर्माण से जुड़ी एक निजी कंपनी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक ‘स्थानीय विधायक’ पर काम में बाधा डालने का आरोप लगाया है.

हैदराबाद स्थित निर्माण कंपनी मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) ने शुक्रवार (12 दिसंबर) को जारी एक नोटिस में आरोप लगाया कि रतले बिजली परियोजना को बंद कराने के ‘प्रयास’ किए जा रहे हैं. कंपनी ने कहा कि यह परियोजना ‘राष्ट्रीय महत्व की परियोजना’ के रूप में चिह्नित है.

उल्लेखनीय है कि एमईआईएल चुनावी बॉन्ड की दूसरी सबसे बड़ी खरीदार रही है.

850 मेगावाट क्षमता वाली यह जलविद्युत परियोजना जम्मू-कश्मीर सरकार और नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) का संयुक्त उपक्रम है, जो किश्तवाड़ ज़िले के द्राबशाला क्षेत्र में बन रही है.

द्राबशाला किश्तवाड़ विधानसभा क्षेत्र में आता है, जहां से भाजपा की नई विधायक शगुन परिहार पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में चुनी गई थीं. बार-बार प्रयासों के बावजूद उनसे प्रतिक्रिया के लिए संपर्क नहीं हो सका.

चेनाब घाटी के डोडा और किश्तवाड़ ज़िलों में छह में से चार भाजपा के विधायक हैं. इनमें डोडा (पश्चिम) विधानसभा क्षेत्र से विधायक शक्ति राज परिहार भी शामिल हैं. जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता सुनील शर्मा, जो स्वयं चेनाब घाटी से निर्वाचित हैं, ने भी एमईआईएल के आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

रतले परियोजना काफी समय से भाजपा से जुड़े राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से घिरी रही है. निजी कंपनी का आरोप है कि स्थानीय भाजपा नेता और कार्यकर्ता नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और कंपनी पर अनुभवहीन मजदूरों को काम पर रखने का दबाव डाल रहे हैं.

ज्ञात हो कि पिछले साल भी एमईआईएल कंपनी को लेकर भाजपा की विधायक शगुन परिहार ने आरोप लगाया था कि ये किश्तवाड़ में 5,281 करोड़ रुपये की रतले बिजली परियोजना के काम को क्रियान्वित करते समय ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ के रास्ते पर चल रही है.

खबरों के अनुसार, पिछले वर्ष से ही परियोजना को श्रमिक प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. इसी सप्ताह द्राबशाला में एमईआईएल के एक वरिष्ठ अधिकारी की आधिकारिक कार पर पथराव किया गया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई.

बिना किसी का नाम लिए एमईआईएल ने शुक्रवार को कहा कि परियोजना को बंद कराने के कथित प्रयासों को ‘स्थानीय विधायक और कुछ ऐसे लोग प्रोत्साहित कर रहे हैं, जो कंपनी के पेरोल पर भी नहीं हैं.’

रतले बिजली परियोजना के संयुक्त मुख्य परिचालन अधिकारी हरपाल सिंह द्वारा जारी नोटिस में कहा गया कि परियोजना स्थल पर श्रमिक हड़ताल आयोजित करने को लेकर ‘चर्चाएं और प्रयास’ किए जा रहे हैं. नोटिस में कर्मचारियों को इसमें शामिल न होने की चेतावनी दी गई है.

नोटिस में कहा गया, ‘किसी भी प्रकार की हड़ताल या काम रोकना सख्त रूप से निषिद्ध है और इसे अनुबंध का उल्लंघन माना जाएगा. हड़ताल में भाग लेने पर नौकरी समाप्त करने, कानूनी कार्रवाई और रतले बांध निर्माण कार्य को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित किए जाने जैसे गंभीर परिणाम हो सकते हैं.’

एमईआईएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि निर्माण कार्य रुकने की आशंका है, जिससे मई 2026 की समयसीमा प्रभावित हो सकती है.

एमईआईएल के प्रवर्तकों पामीरेड्डी पिच्ची रेड्डी और पीवी कृष्ण रेड्डी ने कुल 966 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे थे, जिनमें से अधिकांश को भाजपा ने भुनाया.

यह रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना वर्ष 2010 में तत्कालीन कांग्रेस-नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार द्वारा स्वीकृत की गई थी और 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसकी आधारशिला रखी थी.

अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में कथित ‘बदलाव’ को दर्शाने के लिए भाजपा-नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इस परियोजना में पर्याप्त पूंजी निवेश किया.

पिछले वर्ष परियोजना को एक बड़ी सफलता तब मिली जब एमईआईएल के इंजीनियरों ने खुदाई और बांध निर्माण के लिए रास्ता बनाने हेतु चेनाब नदी को डायवर्जन सुरंगों के माध्यम से मोड़ा.

अक्टूबर 2022 में परियोजना के तहत निर्माणाधीन एक सुरंग में खुदाई के दौरान भूस्खलन हुआ था, जिसमें कम से कम चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि छह अन्य मजदूर घायल अवस्था में बचा लिए गए थे.

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