नई दिल्ली: शनिवार (13 दिसंबर) शाम को नई दिल्ली की हवा की गुणवत्ता अचानक बहुत ज़्यादा खराब हो गई, जिसके बाद अधिकारियों ने शाम 6:30 बजे तुरंत जीआरएपी-IV लागू करने के आदेश जारी किए, ताकि हालात और न बिगड़ें.
13 दिसंबर की सुबह शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 401 तक पहुंच गया था, जिसके चलते उसी दिन सुबह जीआरएपी-III लागू किया गया था. लेकिन शाम 6 बजे तक एक्यूआई बढ़कर 441 हो गया और शाम 7 बजे तक यह 448 तक पहुंच गया, जैसा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों में बताया गया है. इसके बाद एक आपात बैठक के बाद शाम 6:30 बजे राजधानी में जीआरएपी-IV लागू कर दिया गया.
जीआरएपी (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) दिल्ली-एनसीआर के लिए एक आपात प्रतिक्रिया व्यवस्था है, जो औसत एक्यूआई और मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर लागू की जाती है. जीआरएपी-IV इस योजना का सबसे सख़्त स्तर है और तब लागू किया जाता है, जब राजधानी में एक्यूआई 450 से ऊपर चला जाए. जीआरएपी-IV के तहत वायु प्रदूषण बढ़ाने वाली कई गतिविधियों पर कड़ी पाबंदियां लगाई जाती हैं.
मॉनिटरिंग स्टेशनों से कैसे आंकड़े मिले?
केंद्र सरकार का एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) कम से कम तीन प्रमुख वायु प्रदूषकों के स्तर को मापता है. इनमें से एक है बारीक कण पदार्थ PM2.5, यानी 2.5 माइक्रॉन से छोटे कण, जो जीवाश्म ईंधन के उपयोग, निर्माण कार्य जैसी गतिविधियों से निकलते हैं.
एक्यूआई का पैमाना इस प्रकार है:
0-50 को अच्छा या आदर्श माना जाता है,
50-100 संतोषजनक,
100-200 मध्यम,
200-300 खराब,
300-400 बहुत खराब,
और 400-500 को ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाता है.
केंद्र सरकार के अनुसार, अंतिम यानी गंभीर स्तर पर वायु प्रदूषण का असर स्वस्थ लोगों की सांसों पर भी पड़ सकता है, जबकि फेफड़े या हृदय रोग से पीड़ित लोगों पर इसका गंभीर प्रभाव हो सकता है. हल्की शारीरिक गतिविधि के दौरान भी स्वास्थ्य पर इसका असर महसूस हो सकता है.
13 दिसंबर की रात 10 बजे, SAMEER मोबाइल ऐप पर जहांगीरपुरी और बवाना में एक्यूआई 496 दर्ज किया गया. यह भारत में तय अधिकतम सीमा से सिर्फ चार अंक कम है. इसका मतलब है कि अगर एक्यूआई इससे ऊपर भी जाता है, तो मॉनिटरिंग स्टेशनों में वह दर्ज नहीं हो पाएगा. उसी समय, दिल्ली के 38 सक्रिय वायु निगरानी स्टेशनों में से केवल चार स्टेशनों पर एक्यूआई 400 से नीचे दर्ज किया गया.
जीआरएपी-IV लागू
13 दिसंबर की रात तक दिल्ली-एनसीआर में जीआरएपी-IV लागू कर दिया गया है. इस चरण के तहत अब सभी बीएस-IV ट्रकों का दिल्ली में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है (ज़रूरी सामान ले जाने वाले या आवश्यक सेवाएं देने वाले ट्रकों को छोड़कर). हालांकि, एलएनजी/सीएनजी/इलेक्ट्रिक/बीएस-VI डीज़ल ट्रकों को शहर में प्रवेश की अनुमति होगी.
इसके अलावा, प्रशासन द्वारा लागू किए जा रहे अन्य कदमों में यह शामिल है कि दिल्ली एनसीटी क्षेत्र और गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाज़ियाबाद और गौतम बुद्ध नगर ज़िलों में सभी स्कूलों को कक्षाएं अनिवार्य रूप से ‘हाइब्रिड’ मोड में चलानी होंगी. इसमें कक्षा 6 से 9 और कक्षा 11 तक शामिल हैं, यानी जहां संभव हो वहां ऑफलाइन और ऑनलाइन- दोनों तरीकों से पढ़ाई कराई जाएगी.
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य सरकारें अतिरिक्त आपात कदमों पर भी विचार कर सकती हैं, जैसे कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों को बंद करना, गैर-ज़रूरी व्यावसायिक गतिविधियों को रोकना और वाहनों को ऑड-ईवन पंजीकरण संख्या के आधार पर चलाने की अनुमति देना.
इसके साथ ही, बच्चों, बुज़ुर्गों और सांस, हृदय, मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों या अन्य पुरानी बीमारियों से ग्रस्त लोगों को सलाह दी गई है कि वे बाहरी गतिविधियों से बचें और ‘जितना संभव हो घर के अंदर ही रहें.’ बाहर निकलने की ज़रूरत पड़ने पर मास्क पहनने की भी सलाह दी गई है.
जीआरएपी के चरण I, II और III भी फिलहाल लागू हैं- ये क्रमशः 14 अक्टूबर, 19 अक्टूबर और 13 दिसंबर से प्रभाव में आए थे.
