नई दिल्ली: महाराष्ट्र विधान परिषद की विशेषाधिकार समिति ने चार पत्रकारों को पांच दिन की जेल की सज़ा देने की सिफ़ारिश की है. समिति का आरोप है कि इन पत्रकारों ने एमएलसी अमोल मिटकरी के ख़िलाफ़ ‘झूठी और गढ़ी हुई’ ख़बरें चलाकर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया. हालांकि, एक संपादक को माफ़ कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने माफी मांग ली थी.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार (13 दिसंबर, 2025) को परिषद में इस मामले पर अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए समिति के अध्यक्ष प्रसाद लाड ने कहा कि ‘सत्य लाडा’ नाम के एक यूट्यूब चैनल से जुड़े पत्रकारों ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अमोल मिटकरी के ख़िलाफ़ झूठी ख़बरें प्रसारित की थीं.
प्रसाद लाड ने सदन को बताया कि अकोला के पत्रकार गणेश सोनावणे, हर्षदा सोनावणे, अमोल नंदुरकर, अंकुश गावंडे और संपादक सतीश देशमुख ने झूठी खबरें फैलाकर अमोल मिटकरी की सार्वजनिक और राजनीतिक छवि को बदनाम किया. इसी कारण समिति ने इन पांचों मीडिया कर्मियों को पांच दिन की जेल की सज़ा देने की सिफारिश की है. उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में कुल छह बैठकें की गईं.
हालांकि, जांच के बाद संपादक सतीश देशमुख ने अमोल मिटकरी से लिखित रूप में माफ़ी मांगी, जिसे समिति ने स्वीकार कर लिया है. प्रासद लाड ने कहा कि इसी वजह से उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न करने का प्रस्ताव रखा गया है.
समिति ने बाकी बचे चार पत्रकारों को राज्य विधानसभा के मौजूदा शीतकालीन सत्र के दौरान पांच दिन की जेल की सज़ा देने की सिफारिश की है. यदि मौजूदा सत्र में ऐसा करना संभव नहीं हुआ, तो यह फैसला अगले सत्र में लागू किया जाएगा.
यह रिपोर्ट अमोल मिटकरी द्वारा इन पांच पत्रकारों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव दाख़िल किए जाने के बाद पेश की गई है.
