जम्मू-कश्मीर: रतले विवाद में आया नेता प्रतिपक्ष का नाम, सीएम का भाजपा पर परियोजनाओं में दख़ल का आरोप

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले में बन रही रतले बिजली परियोजना को लेकर जारी विवाद के बीच सीएम उमर अब्दुल्ला ने भाजपा विधायकों पर ज़िले में आने वाली बिजली परियोजनाओं में 'हस्तक्षेप' करने का आरोप लगाया. अब्दुल्ला ने बिना कोई नाम लिए कहा कि वे सूबे के इंफ्रास्ट्रक्चर में विकास के लिए केंद्र द्वारा तेज़ी से आगे बढ़ाई जा रही सभी बिजली परियोजनाओं में 'दख़ल' दे रहे हैं.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने 15 दिसंबर को श्रीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. (फोटो: पीटीआई)

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले में बन रही कई अरब रुपये की जलविद्युत परियोजना- रतले बिजली परियोजना को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार (15 दिसंबर) को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों पर किश्तवाड़ ज़िले में आने वाली बिजली परियोजनाओं में ‘हस्तक्षेप’ करने का आरोप लगाया.

रिपोर्ट के मुताबिक, अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बिना किसी का नाम लिए कहा कि किश्तवाड़ के दो स्थानीय भाजपा विधायक उन सभी बिजली परियोजनाओं में ‘हस्तक्षेप’ कर रहे हैं जिन्हें केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे के विकास के व्यापक प्रयासों के तहत तेजी से आगे बढ़ाया है.

मालूम हो कि रतले परियोजना के अलावा सरकार किश्तवाड़ ज़िले में पाकल दुल (1000 मेगावाट), किरू (624 मेगावाट) और क्वार (540 मेगावाट) जलविद्युत परियोजनाएं भी बना रही है, जिसे लेकर उसका कहना है कि इनके पूरा होने पर जम्मू और कश्मीर का यह पहाड़ी जिला ऊर्जा केंद्र बन जाएगा.

मुख्यमंत्री ने इस महीने की शुरुआत में मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) द्वारा कार्यान्वित की जा रही रतले परियोजना के मानव संसाधन (एचआर) प्रमुख सैयद बुरहान अंद्राबी पर परियोजना स्थल के पास हुए हमले की ‘गंभीर जांच’ की भी मांग की है.

किश्तवाड़ पुलिस ने इस मामले में हमले के बाद एफआईआर दर्ज की थी.

सीएम के निशाने पर नेता प्रतिपक्ष और जम्मू-कश्मीर भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील शर्मा

भाजपा की किश्तवाड़ विधायक शगुन परिहार पर एमईआईएल द्वारा लगाए गए राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों का जिक्र करते हुए अब्दुल्ला ने कहा, ‘विपक्ष के दो माननीय विधायक किश्तवाड़ की हर बिजली परियोजना में दखल दे रहे हैं. अगर मेरे मंत्री पर दखलंदाजी का आरोप होता, तो भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) अब तक मेरे घर पर छापा मार चुका होता. ये परियोजनाएं सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लिए नहीं हैं. ये राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएं हैं और इनमें अनावश्यक दखल बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए.’

शगुन परिहार के अलावा सीएम के निशाने पर नेता प्रतिपक्ष और जम्मू-कश्मीर भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील शर्मा हैं, जो 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में किश्तवाड़ के पद्दर-नागसिनी निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे.

इस संबंध में परिहार ने रतले परियोजना प्रमुख के आरोपों को ‘अप्रासंगिक’ बताते हुए खारिज कर दिया है. उनका दावा है कि ये आरोप एक महिला विधायक को बदनाम करने और कंपनी की कथित अक्षमता को छिपाने के उद्देश्य से लगाए गए हैं, जिसके कारण अगले साल शुरू होने वाली यह परियोजना दो साल विलंबित हो गई है.

अब्दुल्ला की टिप्पणी पर शर्मा से प्रतिक्रिया जानने के लिए संपर्क नहीं किया जा सका.

किश्तवाड़ के तीसरे निर्वाचन क्षेत्र इंदरवाल से निर्दलीय उम्मीदवार प्यारे लाल ने जीत हासिल की, जो बाद में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) में शामिल हो गए.

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के खिलाफ एफआईआर

इसी बीच एमईआईएल ने सोमवार को जिला प्रशासन से संपर्क कर किश्तवाड़ स्थित एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, जिस पर राष्ट्रीय परियोजना को रोकने के लिए ‘दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक’ अभियान चलाने का आरोप है.

कंपनी ने चेतावनी दी है कि आसिफ इकबाल नाइक नामक इन्फ्लुएंसर द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई एक वीडियो टिप्पणी 850 मेगावाट की रतले परियोजना में ‘गंभीर कानून-व्यवस्था’ की समस्या पैदा कर सकती है.

एक पत्र में एमईआईएल ने किश्तवाड़ के उपायुक्त से किश्तवाड़ निवासी नाइक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आग्रह किया, जिसने पिछले सप्ताह अपने यूट्यूब चैनल और फेसबुक पर एमईआईएल अधिकारियों के खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक वीडियो पोस्ट किया था.

नाइक ने स्थानीय राजनेताओं के इशारे पर विवाद को सांप्रदायिक रंग देने के लिए रतले बिजली परियोजना के प्रमुख हरपाल सिंह और मानव संसाधन प्रमुख अंद्राबी को उग्रवाद से जोड़ने की कोशिश की थी.

इससे पहले सिंह ने आरोप लगाया था कि भाजपा नेता परिहार राजनीतिक और धार्मिक आधार पर किश्तवाड़ के द्राबशाला क्षेत्र में स्थित परियोजना में श्रमिकों और ठेकेदारों को नियुक्त करने के लिए एमईआईएल प्रबंधन पर दबाव डाल रहे थे.

नाइक के सोशल मीडिया अकाउंट्स से ‘मानहानिकारक’ वीडियो हटाने की मांग करते हुए, एमईआईएल ने प्रशासन से नाइक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351 (आपराधिक धमकी) और 356 (आपराधिक मानहानि) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-ई और 67 के तहत मामला दर्ज करने का आग्रह किया.

पत्र में कहा गया है, ‘यह सामग्री दुर्भावनापूर्ण, मानहानिकारक और धमकी भरी है, जिसका स्पष्ट उद्देश्य एमईआईएल अधिकारियों को डराना, परियोजना स्थल पर भय और दबाव पैदा करना और एक रणनीतिक अवसंरचना परियोजना के अमल को बाधित करना है. उक्त वीडियो व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है, और दर्शकों द्वारा पोस्ट की गई भड़काऊ टिप्पणियों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है, जिससे सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और कार्यस्थल पर सद्भाव के लिए एक स्पष्ट और तात्कालिक खतरा पैदा हो गया है.’

एमईआईएल के इस पत्र की एक प्रति जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है, जिसमें अधिकारियों से ‘मूल पोस्ट, आईपी लॉग, सर्वर डेटा, टिप्पणियां और संबंधित मेटाडेटा सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जब्त करने और संरक्षित करने’ का आग्रह किया गया है.

पत्र में लिखा है, ‘जांच करें, (जरूरत पड़ने पर) आरोपी को गिरफ्तार करें और कानून के अनुसार सख्ती से मुकदमा चलाएं. न्याय, जन सुरक्षा और राष्ट्रीय परियोजना के वैधानिक क्रियान्वयन की रक्षा के हित में जो भी उचित समझा जाए, वह कार्रवाई करें.’

संपर्क करने पर किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज कुमार और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नरेश सिंह ने बताया कि वे शिकायत की जांच कर रहे हैं और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.