नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी ने मंगलवार (15 दिसंबर) को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के तहत राज्य की मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए नामों की लिस्ट जारी की.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की मसौदा मतदाता सूची से 58 लाख से अधिक पहले से पंजीकृत मतदाताओं के नाम विभिन्न कारणों – मृत्यु, स्थानांतरण, डुप्लीकेशन, लापता होने और अन्य कारणों से से हटाए गए हैं.
अखबार ने पश्चिम बंगाल मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सूत्रों के हवाले से बताया कि पश्चिम बंगाल की मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए मतदाताओं की सही संख्या 58,20,898 है.
पश्चिम बंगाल मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सूत्रों के अनुसार, मसौदा सूची में 24 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘मृत’ के रूप में चिह्नित किया गया है. 12 लाख से अधिक मतदाता अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिलने के कारण ‘लापता’ चिह्नित किए गए हैं. लगभग 20 लाख मतदाता स्थायी रूप से अपने निर्वाचन क्षेत्रों से स्थानांतरित पाए गए. इसके अलावा, 1.38 लाख मतदाताओं के नाम दोहराव के कारण हटाए गए हैं.
ऊपर बताए गए कारणों के अलावा अन्य कारणों से 57,000 से अधिक नाम सूची से हटाए गए हैं.
निर्वाचन आयोग ने पोर्टल पर कहा है, ‘प्रभावित व्यक्ति मसौदा सूची 2026 के प्रकाशन के बाद दावे और आपत्तियां प्राप्त करने के लिए निर्धारित अवधि के दौरान घोषणा पत्र और सहायक दस्तावेज़ों के साथ फॉर्म 6 में अपने दावे प्रस्तुत कर सकते हैं.’ यह अवधि 15 जनवरी 2026 तक है, जिसके बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, वे बीएलओ को फॉर्म 6 के साथ एनेक्सर-IV जमा कर सकते हैं. आवेदन बीएलओ के ऑफिस में या ऑनलाइन voters.eci.gov.in या E-NET ऐप के ज़रिए फाइल किए जा सकते हैं. आवेदकों को कमीशन द्वारा आयोजित सुनवाई में शामिल होना होगा और भारतीय नागरिकता और वोट देने की योग्यता का सबूत देना होगा, यह समझाते हुए कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उनके नाम क्यों नहीं जोड़े जा सके.
स्वीकार्य दस्तावेज़
चुनाव आयोग इन दस्तावेज़ों को स्वीकार करेगा – सरकारी कर्मचारी या पेंशन पहचान पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, माध्यमिक या अन्य शैक्षिक प्रमाण पत्र, राज्य प्राधिकरण द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, स्थानीय प्रशासन द्वारा रखा गया परिवार रजिस्टर, सरकार द्वारा जारी भूमि या घर आवंटन प्रमाण पत्र, 1987 से पहले डाकघर, बैंक, एलआईसी या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा जारी कोई भी दस्तावेज़.
एक अधिकारी ने कहा, ‘अगर नागरिकता से संबंधित आपत्तियां आती हैं, तो सत्यापन फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ) और गृह मंत्रालय के माध्यम से किया जाएगा.’ साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य भर के जिला मजिस्ट्रेटों को प्रक्रिया के बारे में सूचित कर दिया गया है.
एसआईआर के बाद पश्चिम बंगाल के मतदाताओं की ड्राफ्ट लिस्ट अगले साल की शुरुआत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से पहले आई है. पश्चिम बंगाल में एसआईआर का गिनती का चरण पिछले हफ्ते गुरुवार रात को खत्म हो गया था.
