बेंगलुरु: अंबानी परिवार के जामनगर स्थित चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर वनतारा, जिस पर जंगली जानवरों को खरीदने, अवैध रूप से लाने और जिसके जरिए अवैध वन्यजीव व्यापार को बढ़ावा देने जैसे विवादास्पद आरोप लगते रहे हैं – एक बार फिर खबरों में है, लेकिन इस बार प्रशंसा और साझेदारियों के कारण.
8 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय पशु कल्याण एनजीओ ग्लोबल ह्यूमैन सोसाइटी ने वनतारा के संस्थापक अनंत अंबानी को ‘ग्लोबल ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड फॉर एनिमल वेलफेयर’ से सम्मानित किया.
इसी दिन वनतारा ने तेलंगाना राज्य सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत राज्य में एक ‘विश्वस्तरीय’ वन्यजीव संरक्षण केंद्र और नाइट सफारी स्थापित की जाएगी.
‘ग्लोबल ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड’
8 दिसंबर को ग्लोबल ह्यूमैन सोसाइटी (अमेरिकी ह्यूमैन सोसाइटी का अंतरराष्ट्रीय ब्रांड, जो खुद को अमेरिका का सबसे पुराना मानवीय संगठन तथा पशु कल्याण का सबसे बड़ा सर्टिफायर बताता है) ने घोषणा की कि वह वनतारा के संस्थापक अनंत अंबानी को ‘ग्लोबल ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड फॉर एनिमल वेलफेयर’ प्रदान की.
सोसाइटी के अनुसार, अंबानी इस पुरस्कार को पाने वाले सबसे युवा व्यक्ति हैं और इसे जीतने वाले पहले एशियाई हैं.
प्रेस विज्ञप्ति में सोसाइटी ने कहा कि यह पुरस्कार ‘साक्ष्य-आधारित कल्याण कार्यक्रमों, विज्ञान-आधारित संरक्षण पहलों और दुनिया भर में संकटग्रस्त प्रजातियों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयासों में अंबानी के नेतृत्व को मान्यता देता है.’
वॉशिंगटन डीसी में आयोजित समारोह में पुरस्कार स्वीकार करते हुए अंबानी ने कहा, ‘यह (पुरस्कार) याद दिलाता है कि वनतारा क्यों अस्तित्व में है, वनतारा क्या करता है और भविष्य में वनतारा क्या करेगा.’ उन्होंने आगे कहा कि बचपन से ही उनका सपना था कि भारत में ऐसा कुछ किया जाए जो जानवरों के साथ व्यवहार के मामले में दुनिया को मार्गदर्शन दे.
उन्होंने कहा, ‘हमारे धर्म में हम जानवरों में भी भगवान को देखते हैं. मैं चाहता हूं कि मेरे परपोते-परपोतियां आज दुनिया में मौजूद सभी प्रजातियों को वापस जंगलों में देखें.’
आरोप और सवाल
संयोग से कई खोजी रिपोर्ट्स में आरोप लगाए गए हैं कि जिन जंगलों का अंबानी ने जिक्र किया, वहीं से वनतारा की ‘रेस्क्यू’ जरूरतों को पूरा करने के लिए जंगली जानवरों को उनके प्राकृतिक आवासों से लाया गया. उदाहरण के तौर पर इस साल कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य से वनतारा में लाए गए नौ चिंपैंजी कैद में पैदा नहीं हुए थे, बल्कि जंगल से पकड़े गए थे, जैसा कि इस साल अप्रैल में अफ्रीकन सफारी वेबसाइट अफ्रीका ज्योग्राफिक की एक रिपोर्ट में बताया गया था, जो महाद्वीप से वन्यजीवों से जुड़ी खबरें भी देती है.
द वायर ने रिपोर्ट किया था कि अवैध वन्यजीव व्यापार से लड़ने वाले एक अंतरराष्ट्रीय एनजीओ ने भी कांगो से भारत की एक ‘प्राइवेट फैसिलिटी’ में भेजे गए लुप्तप्राय प्राइमेट्स – जिसमें नौ चिंपैंजियों में से एक भी शामिल था – की खेप में ‘कई गड़बड़ियां’ होने की बात कही थी, हालांकि उसने यह नहीं बताया कि वह फैसिलिटी कौन-सी थी.
हालांकि, इस साल मार्च में एक जर्मन अखबार की रिपोर्ट में इसी तरह के आरोप कि उसके ‘रेस्क्यू’ गतिविधियां संभवतः अवैध वन्यजीव व्यापार को बढ़ावा दे रही हैं – के जवाब में वनतारा ने द वायर से कहा था कि ये आरोप ‘पूरी तरह निराधार’ और ‘भ्रामक’ हैं.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने भी 15 सितंबर को वनतारा को सभी आरोपों से बरी कर दिया. एसआईटी ने कहा कि सब कुछ – जिसमें कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एंडेंजर्ड स्पीशीज ऑफ वाइल्ड फौना एंड फ्लोरा (सीआईटीईएस) के तहत परमिट भी शामिल हैं, जिन पर कई विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और अवैध वन्यजीव व्यापार पर काम करने वाले एनजीओ ने सवाल उठाए थे – नियमों के अनुरूप था और जानवरों की सभी अधिग्रहण ‘नियामक अनुपालन’ में की गई थीं.
हालांकि, इस बात पर सवाल उठे थे कि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने किस तरह जल्दबाजी में एसआईटी का गठन किया, जिसने एक महीने से भी कम समय में अपनी रिपोर्ट सौंप दी. एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दी और अदालत ने उसकी पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक न करने पर भी सहमति जताई.
इसके बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस ‘क्लीन चिट’ का हवाला देते हुए सीआईटीईएस से कहा कि उसकी यह सिफारिश – कि भारत तब तक लुप्तप्राय वन्यजीवों का आयात न करे जब तक वह परमिट जारी करते समय ‘ड्यू डिलिजेंस’ नहीं करता और इस संबंध में कई सिफारिशें लागू नहीं करता.
भारत ने नवंबर में सीआईटीईएस को भेजे अपने पत्र में तर्क दिया था कि सीआईटीईएस के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के लिए देश में ‘कड़े’ और ‘प्रभावी’ तंत्र मौजूद हैं, और यह भी कि देश की शीर्ष अदालत ने इसे ‘स्पष्ट रूप से मान्य’ किया है – जिसका आधार सितंबर में वनतारा को दी गई ‘क्लीन चिट’ बताया गया.
हालांकि, सीआईटीईएस की विस्तृत रिपोर्ट में कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया था. द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें यह भी शामिल है कि भारत ने वनतारा के लिए वन्यजीवों के आयात की अनुमति जाली परमिट के आधार पर जारी की थी – जैसा कि कैमरून से लाए गए आठ चिंपैंजियों के मामले में पाया गया.
इसी वजह से अनंत अंबानी को यह पुरस्कार दिए जाने पर विभिन्न तबकों से संदेह, हैरानी, निराशा और व्यंग्य भरी प्रतिक्रियाएं सामने आना कोई आश्चर्य की बात नहीं है. कुछ लोगों ने इस बात पर टिप्पणी की है कि पैसे से कुछ भी खरीदा जा सकता है.
तेलंगाना में वन्यजीव संरक्षण केंद्र और नाइट सफारी
इसी बीच खबर आई है कि वनतारा अब तेलंगाना राज्य सरकार के साथ मिलकर राज्य में एक ‘विश्वस्तरीय’ वन्यजीव संरक्षण केंद्र (वाइल्डलाइफ कंजरवेटरी) और नाइट सफारी स्थापित करने जा रहा है.
बीते 8 दिसंबर को भारत फ्यूचर सिटी में आयोजित राइजिंग ग्लोबल समिट – जिसका उद्देश्य राज्य में निवेश आकर्षित करना था – के दौरान वनतारा ने तेलंगाना सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए.
सरकारी बयान के अनुसार, वनतारा-तेलंगाना पहल को ‘एक प्रमुख संरक्षण और अनुभवात्मक पर्यटन परियोजना’ के रूप में तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य ‘भारत के वन्यजीव पुनर्वास तंत्र को सशक्त बनाना और विश्व स्तर पर बेहतरीन अनुभव प्रदान करना है.’
बयान में कहा गया है, ‘प्रस्तावित संरक्षण केंद्र में वैज्ञानिक पद्धतियों पर आधारित वन्यजीव देखभाल, शोध, आवास बहाली और सार्वजनिक शिक्षा को एकीकृत किया जाएगा, जिसमें प्रदर्शनी और गाइडेड नाइट-सफारी शामिल होंगे.’
बताया गया है कि बैठक में वनतारा की टीम ने एक ‘मास्टरप्लान, सस्टेनेबिलिटी की रूपरेखा और प्रस्तावित पारिस्थितिक प्रभाव आकलन’ प्रस्तुत किया.
बयान के मुताबिक, कांग्रेस शासित राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इस साझेदारी का ‘स्वागत किया’ और कहा कि तेलंगाना का उद्देश्य ऐसे ‘पर्यटन संसाधन’ विकसित करना है जो व्यवसायीकरण की बजाय संरक्षण को प्राथमिकता दें.
उन्होंने यह भी कहा कि वनतारा की यह पहल ‘पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षक पर्यटन ढांचे के विकास के राज्य के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो जैव-विविधता की रक्षा करते हुए स्थानीय रोजगार सृजित करे.’
बयान में दावा किया गया कि ‘आगामी वन्यजीव संरक्षण केंद्र से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और तेलंगाना को जिम्मेदार, प्रकृति-आधारित विकास के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी.’
बताया गया है कि वनतारा की एक टीम ने नवंबर के अंत में हैदराबाद स्थित नेहरू जूलॉजिकल पार्क का भी दौरा किया था.
कांग्रेस पर उठे सवाल
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में विपक्षी दलों के नेताओं ने कांग्रेस पर ‘दोहरा मापदंड’ अपनाने का आरोप लगाया.
उनका कहना था कि कांग्रेस के महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने दिल्ली चिड़ियाघर द्वारा वनतारा और गुजरात सरकार के साथ प्रस्तावित समझौते पर आपत्ति जताई थी.
बता दें कि जून में एक सोशल मीडिया पोस्ट में रमेश ने कहा था, ‘इस तरह के समझौते अगर चुपचाप किए जाते हैं तो वे कई सवाल खड़े करते हैं, जिनका पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाना चाहिए. चिड़ियाघर, राष्ट्रीय उद्यान, टाइगर और अन्य रिज़र्व तथा अभयारण्य सभी सार्वजनिक सेवाएं हैं और इन्हें किसी भी रूप में निजीकरण के हवाले नहीं किया जाना चाहिए.’
अख़बार ने एक भाजपा नेता के हवाले से कहा, ‘जब भाजपा शासित राज्यों में बड़े निवेश की बात होती है तो कांग्रेस उसमें खामियां ढूंढती है. लेकिन जब कांग्रेस शासित राज्यों में निवेश आता है तो वह उसे खुशी-खुशी स्वीकार करती है.’
रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि, तेलंगाना कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि वनतारा को लेकर जयराम रमेश के रुख और राज्य सरकार के इस समझौते के बीच कोई विरोधाभास नहीं है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
