नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार (16 दिसंबर) को भारतीय पायलट गिल्ड की ओर से दायर एक अवमानना याचिका पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से जवाब मांगा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार,इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस साल की शुरुआत में अदालत से मंजूरी मिलने के बावजूद नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया.
याचिका में कहा गया है कि नई एफडीटीएल नियमावली चालक दल के थकान प्रबंधन को ध्यान में रखकर बनाई गई थी, लेकिन एयरलाइंस को बदलाव, छूट और रियायतें देकर डीजीसीए ने हाईकोर्ट को दिए गए आश्वासन और निर्देशों की अवहेलना की है और उड़ान व यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डाला है.
इसमें आगे यह भी कहा गया है कि एयरलाइंस को पायलट थकान प्रबंधन से जुड़े नियमों में सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट (सीएआर) 2024 ढांचे का उल्लंघन करते हुए समयसीमा में बढ़ोतरी और छूट दी गई.
याचिका में संगठन ने अधिकारियों के खिलाफ अदालत के पहले के आदेशों की कथित जानबूझकर उल्लंघन के लिए अवमानना कार्यवाही शुरू करने की मांग की है.
पीटीआई के अनुसार, याचिका में कहा गया है, ‘गैर-अनुपालक एफडीटीएल योजनाओं को मंजूरी देकर और एयरलाइंस को बदलाव, छूट और रियायतें देकर प्रतिवादियों की कार्रवाइयां इस अदालत के निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना के दायरे में आती हैं.’
मालूम हो कि डीजीसीए ने इस साल की शुरुआत में एक अन्य मामले में उच्च न्यायालय के समक्ष अपने हलफनामे में कहा था कि नए एफडीटीएल मानदंड चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे.
इसमें कहा गया था कि प्रस्तावित 22 खंडों में से 15 1 जुलाई से लागू हो चुके हैं और शेष 1 नवंबर, 2025 से प्रभावी होंगे.
डीजीसीए के वकील ने अवमानना याचिका का विरोध करते हुए कहा कि नियामक के पास वैधानिक शक्तियां हैं और न्यायालय को विमान अधिनियम और नियमों के तहत अस्थायी, विशिष्ट मामलों में छूट देने का अधिकार है.
दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद जस्टिस अमित शर्मा ने डीजीसीए को नोटिस जारी किया. इस मामले की अगली सुनवाई 17 अप्रैल 2026 को होगी.
