बांग्लादेश: छात्र आंदोलन के नेता उस्मान हादी को ढाका विश्वविद्यालय में दफ़नाया गया

बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के 32 वर्षीय नेता शरीफ़ उस्मान हादी, जिनकी गोली मार दिए जाने के बाद 18 दिसंबर को मौत हो गई थी, को शनिवार को ढाका विश्वविद्यालय की केंद्रीय मस्जिद में देश के राष्ट्रकवि काज़ी नज़रुल इस्लाम की क़ब्र के पास दफ़ना दिया गया. अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने कहा कि हादी बांग्लादेशियों के दिलों में हमेशा ज़िंदा रहेंगे.

हादी के जनाज़े की नमाज़ के दौरान बांग्लादेश संसद परिसर के बाहर जुटे लोग.(फोटो: एपी फोटो/महमूद हुसैन ओपु)

नई दिल्ली: बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के 32 वर्षीय नेता शरीफ़ उस्मान हादी, जिन्हें 12 दिसंबर को गोली मारी गई थी और 18 दिसंबर को सिंगापुर में चोटों के चलते उनकी मौत हो गई थी, को शनिवार (20 दिसंबर) को ढाका में अंतिम विदाई दी गई.

बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट के अनुसार, हादी को ढाका विश्वविद्यालय की केंद्रीय मस्जिद में देश के राष्ट्रकवि काज़ी नज़रुल इस्लाम की क़ब्र के पास दफ़नाया गया.

इससे पहले हादी का शव शुक्रवार शाम सिंगापुर से ढाका लाया गया था. राष्ट्रीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में आयोजित हादी के जनाज़े की नमाज़ के दौरान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस समेत सलाहकार परिषद के सदस्य, राजनीतिक दलों के नेता और हादी के समर्थकों की भारी भीड़ जुटी.

इस अवसर पर मोहम्मद यूनुस ने कहा कि हादी बांग्लादेशियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे. उन्होंने कहा, ‘प्रिय हादी, लोग आपके शब्दों और आपके दृष्टिकोण की प्रशंसा कर रहे हैं. हम इसे तहे दिल से स्वीकार करते हैं; आशा है कि यह हमारे मन में हमेशा जीवित रहेगा, ताकि हम इसका अनुसरण कर सकें.’

वहीं, उस्मान हादी के परिवार और इंकलाब मंच (जिसके हादी प्रवक्ता थे) ने उनके हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग की है.

हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें अखबार के दफ्तरों, एक प्रमुख सांस्कृतिक संगठन और एक भारतीय दूतावास को निशाना बनाया गया.

कौन थे उस्मान हादी?

मालूम हो कि हादी  पिछले साल अगस्त में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के ख़िलाफ़ उग्र छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक थे. वह शेख़ हसीना विरोधी इंकलाब मंच के सदस्य थे.

बताया जाता है कि वे फरवरी में होने वाले चुनावों के लिए वो भी संभावित उम्मीदवार थे और हमले के समय ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर प्रचार कर रहे थे.

इंकलाब मंच पिछले साल जुलाई में हुए बांग्लादेश छात्र आंदोलन के दौरान चर्चा में आया था. इस समूह को कट्टरपंथी संगठन कहा गया है और यह अवामी लीग को कमजोर करने की कोशिशों में आगे रहा है.

छात्र आंदोलन में भूमिका के बावजूद यूनुस सरकार ने इस मंच को भंग कर दिया था और राष्ट्रीय चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी.

हालांकि, यूनुस ने हादी की मौत पर शोक जताते हुए इसे ‘देश के राजनीतिक और लोकतांत्रिक परिदृश्य के लिए अपूरणीय क्षति’ बताया है और हत्यारों के ख़िलाफ़ कोई रियायत न बरतने का वादा किया है.

हादी की मौत पर कई देशों ने शोक जताया

इस बीच अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी समेत यूरोप के कई देशों ने हादी की मौत पर शोक जताया और बांग्लादेश के लोगों के साथ एकजुटता दिखाई.

ढाका में जर्मन दूतावास ने राष्ट्रीय शोक के मौक़े पर शनिवार को झंडा झुका दिया और सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ‘शरीफ़ उस्मान हादी के निधन पर राष्ट्रीय शोक दिवस के दौरान बांग्लादेश और उसके लोगों के साथ पूरी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए, आज फ़्रैंको-जर्मन दूतावास में झंडे को आधा झुका दिया गया है.’

वहीं, ढाका में ब्रिटिश उच्चायोग ने कहा, ‘युवा नेता शरीफ़ उस्मान हादी के निधन से हम दुखी हैं. इस कठिन समय में हम उनके परिवार, मित्रों और समर्थकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं.’

हादी की मौत पर अमेरिकी दूतावास ने भी उनके परिवार, दोस्तों और समर्थकों के प्रति गहरी संवेदना’ व्यक्त की है.

गौरतलब है कि हादी और इंक़लाब मंच भारत के कड़े आलोचक बताए जाते हैं. हसीना फिलहाल भारत में निर्वासन में हैं. उनके निर्वासन का मुद्दा बांग्लादेश के विभिन्न समूहों, अंतरिम सरकार और नई दिल्ली के बीच विवाद का विषय रहा है.