नई दिल्ली: क्रिसमस की पूर्व संध्या पर ओडिशा के संबलपुर में कथित तौर पर ‘अवैध बांग्लादेशी प्रवासी’ होने के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डाले गए पश्चिम बंगाल के निर्माण श्रमिक की पहचान 19 वर्षीय जुएल राणा के रूप में हुई है.
गुरुवार को द वायर से बात करने वाले मृतक के एक रिश्तेदार ने बताया कि काम की तलाश में राणा मुर्शिदाबाद से संबलपुर पहुंचे थे और एक निर्माण स्थल पर राजमिस्त्री के तौर पर काम कर रहे थे.
राणा के दूर के रिश्तेदार पल्टू शेख उसी जगह उनके साथ काम करते थे. उन्होंने ने द वायर को बताया, ‘पांच लोग जुएल के किराए के कमरे में घुस आए और उससे पहचान पत्र मांगे. उन्होंने जुएल और दो अन्य प्रवासी मज़दूरों से भारतीय होने का सबूत देने के लिए ज़बरदस्ती की.’
उनके मुताबिक यह घटना 24 दिसंबर की शाम करीब 8 बजे हुई. शेख के कहा कि राणा दस्तावेज़ दिखा पाता, उससे पहले ही हमलावरों ने उसे पीटना शुरू कर दिया. शेख के अनुसार, ‘उन्होंने लोहे की रॉड और लाठियों से हमला किया.’
शेख अन्य प्रवासी मज़दूरों के साथ तीनों को बचाने पहुंचे, लेकिन तब तक हमलावर फरार हो चुके थे. उन्होंने बताया, ‘हम उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन मुझे लगता है कि तब तक उसकी मौत हो चुकी थी.’
हमले में घायल हुए अन्य दो प्रवासी मज़दूरों की हालत गंभीर है और संबलपुर के एक सरकारी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है.

द वायर ने शेख से मिली राणा के आधार कार्ड की प्रति के आधार पर पुष्टि की है कि मृतक की उम्र 19 साल थी.. न कि 30 साल, जैसा कि कुछ ख़बरों में आया है. इसके अलावा, शेख के अनुसार हमला किसी चाय की दुकान पर नहीं, बल्कि मज़दूरों के अपने किराए के कमरे में हुआ था.
शेख का शक है कि यह हत्या बांग्लादेश में हाल ही में एक हिंदू व्यक्ति की लिंचिंग की खबरों की प्रतिक्रिया में हुई है.
उन्होंने बताया कि पहले भी बांग्लादेश में हिंसा की खबरों के बाद ऐसी स्थिति बनी थी. उन्होंने कहा, ‘हम वापस जाना चाहते हैं. हम शव को अपनी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास लेकर जाएंगे.’
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पुलिस का दावा है कि यह घटना बीड़ी को लेकर हुए विवाद के कारण हुई.
वहीं द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने पुलिस महानिरीक्षक हिमांशु लाल के हवाले से लिखा है कि राणा की हत्या ‘अचानक उकसावे’ से जुड़ी थी और यह किसी को ‘निशाना बनाकर’ किया गया मामला नहीं है.
द वायर ने इस मामले में ओडिशा पुलिस से संपर्क किया है. उनका जवाब मिलने पर रिपोर्ट में जोड़ा जाएगा.

उल्लेखनीय है कि यह इस सप्ताह का दूसरा ऐसा मामला है, जिसमें अवैध बांग्लादेशी होने के शक में लोगों पर हमला कर उनकी हत्या की गई. कुछ दिन पहले केरल के पालक्काड़ में छत्तीसगढ़ के प्रवासी मज़दूर रामनारायण बघेल की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी.
पश्चिम बंगाल में परिजायी श्रमिक ऐक्या मंच (प्रवासी मज़दूर एकता मंच) के राज्य महासचिव आसिफ़ फारूक ने द वायर को बताया कि बंगाली प्रवासी मज़दूरों के खिलाफ हिंसा में अचानक तेज़ी आई है और इसका एक स्पष्ट पैटर्न दिखता है.
उन्होंने कहा, ‘यह पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ. फिर गृह मंत्रालय का आदेश आया. जिसके बाद हमने देखा कि पुलिस देशभर में, खासकर गुरुग्राम में, प्रवासी मज़दूरों को पकड़ रही थी. कई लोगों को गलत तरीके से निर्वासित किया गया, और अब ये दो हत्याएं.’
फारूक ने कहा, ‘हिंसा रोकने के लिए गृह मंत्रालय की उस अधिसूचना को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए.’
पश्चिम बंगाल प्रवासी श्रमिक कल्याण बोर्ड के प्रमुख और तृणमूल कांग्रेस के सांसद समीरुल इस्लाम ने इस हत्या पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा, ‘एक बार फिर भाजपा शासित राज्य में बांग्ला बोलने वाले प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाया गया। ओडिशा के संबलपुर में मुर्शिदाबाद के एक व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डाला गया और दो अन्य घायल हो गए, जब भाजपा के गुंडों ने उन पर हमला किया और उन्हें बांग्लादेशी घुसपैठिया बताया।’
Once again Bengali spekaing migrant workers targeted in BJP-ruled state.
In Odisha’s Sambalpur one from Murshidabad lynched to death and two others injured after BJP goons attacked them & labelled them as Bangladeshi infiltrators.
How many lives of innocent Bengali speaking…
— Samirul Islam (@SamirulAITC) December 25, 2025
उन्होंने आगे कहा, ‘भाजपा बांग्ला बोलने वाले कितने और बेगुनाह लोगों की जान लेना चाहती है? यह इस बात का एक और उदाहरण है कि भाजपा बंगालियों के साथ कैसा बर्ताव करती है। अब समय आ गया है कि भाजपा को बाहर का रास्ता दिखाया जाए, आने वाले चुनावों में बंगाल के आम लोग बांग्ला-विरोधी भाजपा को लोकतांत्रिक तरीके से सबक सिखाएंगे।’
गौरतलब है कि बीते सप्ताह केरल के पलक्कड़ में छत्तीसगढ़ के रहने वाले श्रमिक रामनारायण बघेल की चोरी के शक में पीटकर हत्या कर दी गई थी. वहां भी हमलावरों ने उनसे पूछा था कि क्या वे बांग्लादेश से हैं.
केरल पुलिस ने इस मामले में 7 लोगों को गिरफ्तार किया है और इसमें एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं.
देश में हाल के दिनों में ‘अवैध बांग्लादेशी’ होने के शक में लोगों को निशाना बनाने और उनके साथ भेदभाव की घटनाएं बढ़ी हैं. संबलपुर की यह घटना इसी बढ़ते तनाव का हिस्सा मानी जा रही है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
