नई दिल्ली: बांग्लादेश में हाल के दिनों में हुई दो हिंदू व्यक्तियों की लिंचिंग के बाद भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा पर चिंता व्यक्त की गई थी, जिसे रविवार (28 सितंबर) को ढाका ने खारिज करते हुए कहा कि भारत की आलोचना तथ्यों से परे है.
रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका ने आरोप लगाया कि भारत में कुछ वर्ग बांग्लादेश विरोधी प्रचार फैलाने के उद्देश्य से हिंदुओं के सुनयोजित उत्पीड़न के हिस्से के रूप में कुछ ‘अलग-थलग’ घटनाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं.
मालूम हो कि बांग्लादेश में हिंदू कपड़ा मजदूर दीपू दास की लिंचिंग के बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद का मुद्दा फिर से उभर आया है, और बांग्लादेश के इस जवाबी बयान के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है.
इसी बीच ढाका महानगर पुलिस ने रविवार को ऐलान किया की कि बांग्लादेशी छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के दो प्रमुख संदिग्ध भारत भाग गए हैं. इससे पहले, उनके सीमा पार भागने की अटकलों ने देश में भारत विरोधी भावना को और भड़का दिया था.
उल्लेखनीय है कि इस पूरे मामले पर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत द्वारा शुक्रवार को जारी की गई आलोचना का उल्लेख करते हुए कहा कि ये ‘तथ्यों को जाहिर नहीं करती हैं.’
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘बांग्लादेश सरकार किसी भी गलत, बढ़ा-चढ़ाकर कही गई या जानबूझकर कही गई बातों को पूरी तरह से खारिज करती है, जो बांग्लादेश की सांप्रदायिक सद्भाव की पुरानी परंपरा को गलत तरीके से दिखाती हैं.’
ढाका ने आरोप लगाया, ‘हमें बड़े खेद के साथ यह कहना पड़ रहा है कि आपराधिक कृत्यों की छिटपुट घटनाओं को हिंदुओं के व्यवस्थित उत्पीड़न के रूप में चित्रित करने के सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं, जिनका उपयोग ‘आम भारतीयों को बांग्लादेश, उसके राजनयिक मिशनों और अन्य संस्थानों के खिलाफ भड़काने’ के लिए किया जा रहा है.’
भारत की चिंता भ्रामक: बांग्लादेश
बांग्लादेश में दूसरे हिंदू व्यक्ति की हत्या को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल द्वारा दिए गए बयान का संज्ञान लेते हुए ढाका इसे ‘भ्रामक’ बताया.
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि राजबारी में अमृत मंडल की पीट-पीटकर हुई ‘दुर्भाग्यपूर्ण मौत‘ तब हुई जब वह अपने मुस्लिम साथी के साथ जबरन वसूली कर रहे थे. मंत्रालय ने आगे कहा, ‘इस आपराधिक कृत्य को अल्पसंख्यक भेदभाव के नजरिए से देखना तथ्यात्मक नहीं बल्कि भ्रामक है.’
मंत्रालय ने भारत के विभिन्न पक्षों से ‘सद्भावनापूर्ण पड़ोसी संबंधों और आपसी विश्वास को कमजोर न करने’ का आह्वान किया.
ज्ञात हो कि इससे पहले शुक्रवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दास और मंडल की हत्याओं के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि ‘बांग्लादेश में हिंदू, ईसाई और बौद्ध सहित अल्पसंख्यकों के खिलाफ चरमपंथियों द्वारा जारी निरंतर हिंसा गंभीर चिंता का विषय है.’
जायसवाल ने ‘स्वतंत्र सूत्रों’ का हवाला देते हुए दावा किया था कि बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की 2,900 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं.
उन्होंने आगे कहा था कि ‘इन घटनाओं को महज मीडिया की अतिशयोक्ति या राजनीतिक हिंसा कहकर खारिज नहीं किया जा सकता.’
जायसवाल का ये बयान ढाका के उस रुख के संदर्भ में था, जो भारतीय सरकार और मीडिया की लगातार आलोचनाओं के बीच सामने आया था, जिसमें सरकार और मीडिया का कहना था कि बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों पर हमलों के आंकड़े ‘अतिशयोक्तिपूर्ण’ हैं और इनमें से कई घटनाएं राजनीतिक रूप से प्रेरित थीं.
गौरतलब है कि 18 दिसंबर को छात्र नेता हादी की बाइक सवार हमलावर द्वारा चलाई गई गोलियों से हुई मौत के बाद हुई हिंसा में दास को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था. इस घटना में शामिल लोगों के भारत भाग जाने की अटकलों ने बांग्लादेश की सड़कों पर भारत विरोधी भावना को भड़का दिया, जिसके चलते नई दिल्ली ने विरोध दर्ज करवाया था.
डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने घोषणा की कि इस मामले के दो ‘मुख्य’ संदिग्ध मयमनसिंह के हलुआघाट सीमा मार्ग से मेघालय में घुस गए थे और बाद में पहाड़ी राज्य के तुरा शहर चले गए.
हालांकि, पुलिस ने यह नहीं बताया कि वे भारत भागने में कब कामयाब हुए.
अखबार ने अतिरिक्त आयुक्त एस.एन. नजरुल इस्लाम के हवाले से कहा, ‘हम उनकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण सुनिश्चित करने के लिए औपचारिक और अनौपचारिक दोनों माध्यमों से भारतीय अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं.’
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय अधिकारियों ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने कथित तौर पर ‘अनौपचारिक रिपोर्टों’ के आधार पर संदिग्धों को भारत आने-जाने में मदद की थी.
हालांकि भारतीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स ने मेघालय पुलिस के एक अज्ञात वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा कि उन्हें बांग्लादेशी समकक्षों से कोई सूचना नहीं मिली है.
उन्होंने अखबार को बताया, ‘रिपोर्ट में नामित किसी भी आरोपी का गारो हिल्स में पता नहीं चला है और न ही कोई गिरफ्तारी हुई है.’
इसमें सीमा सुरक्षा बल के महानिरीक्षक ओपी उपाध्याय के हवाले से यह भी कहा गया है कि ‘इन व्यक्तियों के हलुआघाट सेक्टर से मेघालय में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने का कोई सबूत नहीं है… ये दावे निराधार और भ्रामक हैं.’
इस बीच, हादी की हत्या के विरोध में ढाका में रविवार को भी प्रदर्शन जारी रहे.
डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, उनके इंकलाब मंचो संगठन के प्रदर्शनकारियों ने रविवार को व्यस्त शाहबाग चौक और सिलहट के चौहट्टा चौराहे को अवरुद्ध कर दिया.
गृह सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जहांगीर आलम चौधरी ने रविवार को कहा कि जांचकर्ताओं को हादी की हत्या के मामले में दस दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल करने की उम्मीद है.
