2018 के बाद सबसे ज़हरीली रही दिसंबर की हवा: दिल्ली में पीएम 2.5 ने तोड़ा रिकॉर्ड

2018 के बाद इस साल दिसंबर में दिल्ली की हवा सबसे ख़राब रही. पीएम 2.5 का औसत स्तर 211 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया. तापमान थोड़ा अधिक होने के बावजूद प्रदूषण बढ़ा, जिससे साफ़ है कि केवल मौसम नहीं, अन्य कारण भी ज़िम्मेदार हैं.

इस सर्दी में तापमान थोड़ा अधिक रहने के बावजूद प्रदूषण का स्तर ज्यादा रहा. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: इस साल दिसंबर में दिल्ली की हवा 2018 के बाद सबसे ज़्यादा खराब रही है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, महीने के अब तक के दिनों में पीएम 2.5 का औसत स्तर 211 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि राजधानी के 40 निगरानी केंद्रों में से लगभग सभी जगहों पर कम से कम एक बार प्रदूषण का स्तर बहुत ज़्यादा रहा.

प्रदूषण केवल कुछ दिनों तक सीमित नहीं रहा. शहर के स्तर पर लगभग हर तीन में से एक दिन पीएम 2.5 का स्तर 250 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ऊपर चला गया. दिसंबर के मध्य में आए सबसे गंभीर दौर में प्रदूषण का औसत स्तर राष्ट्रीय मानक से छह से सात गुना तक पहुंच गया.

पिछले साल अपेक्षाकृत कम प्रदूषण के बाद, इस दिसंबर का औसत एक बड़ा उलटफेर दिखाता है. 2024 की तुलना में इस साल दिल्ली का औसत पीएम 2.5 स्तर 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक बढ़ गया है.

दिसंबर ज्यादा गर्म, फिर भी हवा ज्यादा खराब

इस सर्दी में तापमान थोड़ा अधिक रहने के बावजूद प्रदूषण का स्तर ज्यादा रहा.

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 में औसत अधिकतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 8.4 डिग्री सेल्सियस रहा. वहीं दिसंबर 2025 में तापमान थोड़ा और अधिक रहा – औसत अधिकतम 23.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 8.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

समान और थोड़े अधिक तापमान के बावजूद वायू प्रदूषण में तेज़ बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि इस दिसंबर में हवा की गुणवत्ता बिगड़ने के पीछे केवल मौसम संबंधी कारण ही जिम्मेदार नहीं हैं.

सुरक्षित सीमा से कई गुना ज़्यादा प्रदूषण

अपने चरम पर पहुंचने पर कई निगरानी केंद्रों पर पीएम 2.5 का स्तर राष्ट्रीय मानक से लगभग 10 गुना तक बढ़ गया. शहर के बड़े हिस्सों में 24 घंटे की अवधि के लिए तय सुरक्षित सीमा से आठ से नौ गुना अधिक प्रदूषण दर्ज किया गया.

14 दिसंबर को मुंडका में पीएम 2.5 का स्तर 597.67 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो दिसंबर के आंकड़ों में किसी एक निगरानी केंद्र पर एक दिन का सबसे ऊंचा स्तर था. उसी दिन अशोक विहार में 572.19, रोहिणी में 572.00, वज़ीरपुर में 566.36, जहांगीरपुरी में 519.21 और आनंद विहार में 506.50 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पीएम 2.5 दर्ज किया गया.

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 24 घंटे के लिए तय पीएम 2.5 की सुरक्षित सीमा 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से तुलना करें तो ये स्तर मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित माने जाने वाले स्तर से लगभग 35 से 40 गुना अधिक थे.

महीने के घंटावार आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी सामने आया कि पीएम प्रदूषण का स्तर ज़्यादातर रात के समय चरम पर पहुंचा.

अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर रोज़ाना पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर सबसे ज़्यादा देर शाम से आधी रात के बीच दर्ज किया गया. लगभग 57% मामलों में यह चरम रात 9 बजे से 12 बजे के बीच आया, जबकि 60% से अधिक मामलों में रात 10 बजे से सुबह 2 बजे के बीच सबसे ऊंचा स्तर दर्ज किया गया.

ये घंटे ऐसे मौसमीय हालात से मेल खाते हैं, जो प्रदूषकों के फैलाव के लिए बेहद प्रतिकूल होते हैं. इनमें शांत हवाएं, तापमान का उलटा क्रम (टेम्परेचर इनवर्ज़न), गिरता हुआ तापमान और घना कोहरा शामिल है, जो प्रदूषकों को ज़मीन के पास ही फंसा लेता है.