जम्मू-कश्मीर: सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए घाटी के कुछ हिस्सों में ट्रैकिंग-कैंपिंग पर रोक

जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित 'गंभीर सुरक्षा चिंताओं' के मद्देनज़र कश्मीर घाटी के कुछ हिस्सों में ट्रैकिंग और कैंपिंग गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया है. उत्तरी कश्मीर में पीर पंजाल में स्थित तंगमर्ग क्षेत्र में पहले से लागू यह प्रतिबंध अब दक्षिणी कश्मीर के कोकरनाग में भी लागू कर दिया गया है.

दक्षिण कश्मीर के पहलगाम हेल्थ रिसॉर्ट के ऊपरी इलाकों में स्थित नाफरान घाटी में ट्रेकिंग के शौकीन लोगों का एक समूह अपना सामान समेट रहा है. (फोटो: द वायर)

श्रीनगर: जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित ‘गंभीर सुरक्षा चिंताओं’ के मद्देनजर कश्मीर घाटी के कुछ हिस्सों में ट्रैकिंग और कैंपिंग गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी कश्मीर में पीर पंजाल पर्वतमाला की गोद में स्थित तंगमर्ग क्षेत्र में पहले से लागू यह प्रतिबंध अब दक्षिणी कश्मीर के कोकरनाग में भी लागू कर दिया गया है, जो जम्मू की अशांत चिनाब घाटी की सीमा पर स्थित है.

इस संबंध में कोकरनाग के उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) प्रिंस कुमार द्वारा 2 जनवरी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत जारी एक आदेश में ‘कुछ लोगों द्वारा देर रात नाका/चेकपॉइंट पार करने की कोशिश’ की हालिया घटनाओं’ का हवाला दिया गया है.

मालूम हो कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163, जो दंड प्रक्रिया संहिता की औपनिवेशिक काल की धारा 144 का नया संस्करण है, कार्यकारी मजिस्ट्रेट्स को ‘अशांति या खतरे को रोकने के लिए तत्काल आदेश जारी करने’ की असाधारण शक्तियां प्रदान करती है.

पुलिस से मिली जानकारी का हवाला देते हुए एसडीएम ने कहा, ‘इन उच्च-पहाड़ी और वन क्षेत्रों में व्यक्तियों की अनियंत्रित आवाजाही से जन सुरक्षा और संरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. अतः मैं बीएनएसएस, 2023 की धारा 163 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश देता हूं कि मार्गन टॉप, चौहर नाग और सिंथन क्षेत्रों में ट्रैकिंग, कैंपिंग, हाइकिंग और इसी प्रकार की अन्य बाहरी गतिविधियां तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित हैं.’

उल्लेखनीय है कि मार्गन टॉप और सिंथन टॉप के ऊंचे दर्रों तक जाने वाले राजमार्ग, जो सुदूर किश्तवार जिले के चतरू और मरवाह उपखंडों को कश्मीर घाटी से जोड़ते हैं, कोकरनाग के घने जंगलों से होकर गुजरते हैं.

इन दोनों दर्रों के आसपास एक दर्जन से अधिक अल्पाइन झीलें हैं, जिनमें चौहर नाग, शिल सर और नागपुतिन झीलों के समूह, नील नाग, ज़म्बाख सर और अन्य शामिल हैं. ये झीलें स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों के लिए लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं.

कौसर नाग. (फोटो साभार: विकिपीडिया/CC BY-SA 4.0)

नए आदेश के अनुपालन का आग्रह करते हुए एसडीएम ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी. साथ ही कोकरनाग के लरनू क्षेत्र के स्टेशन हाउस ऑफिसर को  यात्रियों की आवाजाही पर नज़र रखने का निर्देश भी दिया.

ज्ञात हो कि कोकरनाग जम्मू क्षेत्र की चिनाब घाटी की सीमा पर स्थित है, जिसमें किश्तवार, डोडा, रामबन और रियासी जिले शामिल हैं.

संचालन और प्रशिक्षण कार्यक्रम

गौरतलब है कि हाल के महीनों में जम्मू के कुछ जिलों में उग्रवाद से संबंधित गतिविधियों में तेजी आई है, जिसके चलते सुरक्षा बलों और नागरिकों पर घातक हमले हुए हैं.

खुफिया एजेंसियों के अनुसार, सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा बल चिनाब घाटी के ऊपरी इलाकों में शरण लिए संदिग्ध उग्रवादियों की तलाश में बड़े पैमाने पर अभियान चला रहे हैं.

इस सप्ताह की शुरुआत में सेना ने डोडा जिले के निवासियों के लिए नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया. यह कार्यक्रम केंद्र सरकार की उस योजना का हिस्सा है जिसे 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद संशोधित किया गया था.

31 दिसंबर को जारी एक बयान में सेना ने कहा कि डोडा के 17 गांवों को इस योजना के अंतर्गत शामिल किया जा रहा है, जिसके तहत स्थानीय लोगों को ‘ग्राम रक्षा रक्षक’ के रूप में भर्ती किया जाएगा.

यह एक नागरिक मिलिशिया है जिसे जम्मू-कश्मीर में पहली बार 1990 के दशक की शुरुआत में स्थापित किया गया था और बाद में इसके सदस्यों पर मानवाधिकारों के हनन के आरोपों के बीच भंग कर दिया गया था.

गुलमर्ग में साल के पहले दिन गुरुवार, 1 जनवरी, 2026 को बर्फ से ढके इलाके का एक दृश्य. (फोटो: पीटीआई/एस इरफान)

ध्यान रहे कि कोकरनाग में निषेधाज्ञा ऐसे समय में जारी की गई है जब नव वर्ष समारोह के बीच कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि देखी जा रही है, जिसकी शुरुआत सोनमर्ग और गुलमर्ग सहित घाटी के कुछ पर्यटक स्थलों पर ताजा बर्फबारी से हुई थी.

यह आदेश उत्तरी कश्मीर में अधिकारियों द्वारा गुलमर्ग स्की रिसॉर्ट के स्थान पर तंगमर्ग के ऊपरी वन क्षेत्रों में ट्रैकिंग गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के कुछ दिनों बाद जारी किया गया है.

सोमवार को जारी एक एडवाइजरी में बारामुला पुलिस ने स्थानीय निवासियों से ‘आवश्यक अनुमति प्राप्त करने’ का आग्रह किया, वहीं सुरक्षा संबंधी गलतफहमियों को रोकने और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए गैर-स्थानीय पर्यटकों को तंगमर्ग के ऊपरी वन क्षेत्रों में जाने से सख्ती से प्रतिबंधित कर दिया गया.

इस एडवाइजरी में कहा गया, ‘बारामुला पुलिस ने जनता से निर्देशों का पालन करने की अपील की है और इस बात पर ज़ोर दिया है कि ये उपाय संवेदनशील वन क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने, सुरक्षित वातावरण बनाए रखने और सुरक्षा संबंधी किसी भी गलतफहमी को रोकने के उद्देश्य से किए गए हैं.’

मालूम हो कि पहलगाम आतंकी हमलेके बाद ऐसे और हमलों की आशंका के चलते 87 पर्यटन स्थलों में से चार दर्जन से अधिक पर्यटन स्थलों को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था. बाद में कश्मीर में सुरक्षा स्थिति में सुधार के संकेत मिलने पर इनमें से कुछ स्थलों को जनता के लिए खोल दिया गया.