नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ‘जीएसटी बचत उत्सव’ के प्रचार पर महज़ 55 दिनों में 4.76 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं.
सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी से पता चला है कि यह राशि केवल प्रिंट मीडिया विज्ञापनों पर खर्च की गई.
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा दिए गए आरटीआई जवाब के मुताबिक, सरकार ने ‘जीएसटी सुधारों’ यानी ‘बचत उत्सव’ के प्रचार पर 4 सितंबर 2025 से 28 अक्टूबर 2025 के बीच 4,76,12,276 रुपये विज्ञापनों पर खर्च किए.
यह जानकारी महाराष्ट्र के अमरावती निवासी अजय बसुदेव बोस द्वारा दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में दी गई है.
सिर्फ प्रिंट मीडिया का आंकड़ा
आरटीआई के जवाब में साफ किया गया है कि यह खर्च केवल प्रिंट मीडिया में दिए गए विज्ञापनों से संबंधित है, जिसे केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय संचार ब्यूरो ने जारी किया.
हालांकि, आरटीआई में यह पूछा गया था कि जीएसटी सुधारों के प्रचार पर प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया, होर्डिंग्स और बिलबोर्ड्स पर कुल कितना खर्च हुआ, लेकिन जवाब में सिर्फ प्रिंट मीडिया का आंकड़ा ही दिया गया है.
इससे यह संकेत मिलता है कि यदि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया और आउटडोर विज्ञापनों का खर्च जोड़ा जाए, तो कुल राशि इससे कहीं अधिक हो सकती है.
क्या है ‘जीएसटी बचत उत्सव’?
‘जीएसटी बचत उत्सव’ केंद्र सरकार द्वारा नई पीढ़ी के जीएसटी सुधारों (नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफ़ॉर्म्स) को जनता तक पहुंचाने के लिए शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी प्रचार अभियान है.
सरकार का दावा है कि इन सुधारों से रोज़मर्रा की ज़रूरतों की कई वस्तुएं कर-मुक्त हुई हैं या उन पर 5 प्रतिशत तक की न्यूनतम जीएसटी दर लागू की गई है.
इन सुधारों के तहत खाने-पीने की वस्तुएं, कपड़े, साबुन, टूथपेस्ट जैसी ज़रूरी चीज़ों के साथ-साथ घर बनाना, गाड़ी खरीदना, बीमा प्रीमियम जैसी सेवाओं पर टैक्स बोझ कम होने का दावा किया गया है.
‘जीएसटी बचत उत्सव’ की शुरुआत के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए एक औपचारिक पत्र भी लिखा था, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया था.
