केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने रतले परियोजना कर्मियों के भाजपा और उग्रवादियों से संबंधों को ‘स्थानीय मुद्दा’ बताया

किश्तवाड़ ज़िले में भाजपा के नेताओं द्वारा रतले विद्युत परियोजना के कुछ कर्मचारियों को आतंकवाद और पाकिस्तान से जोड़ने के आरोपों को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 'स्थानीय मुद्दा' बताकर ख़ारिज कर दिया. उन्होंने इस मामले की एनआईए से जांच की संभावना से भी इनकार किया.

जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर. (फोटो साभार: एक्स/@mlkhattar)

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं द्वारा रतले विद्युत परियोजना के कुछ कर्मचारियों को आतंकवाद और पाकिस्तान से जोड़ने के आरोपों को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रविवार (4 जनवरी) को ‘स्थानीय मुद्दा’ बताकर खारिज कर दिया.

इस संबंध में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री खट्टर से जब स्थानीय पुलिस द्वारा ‘उपद्रवी/राष्ट्र-विरोधी’ करार दिए गए कर्मचारियों के साथ भाजपा नेताओं के कथित संबंध के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.

किश्तवाड़ में पत्रकारों से बात करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री खट्टर ने मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) में कार्यरत कुछ कर्मचारियों के उग्रवादियों से संबंधों के आरोपों की एनआईए द्वारा जांच किए जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा कि यह एक स्थानीय मुद्दा है और इसे स्थानीय स्तर पर ही सुलझाया जाना चाहिए. यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है.

जैसा कि द वायर ने रिपोर्ट किया है, रतले बिजली परियोजना के कम से कम तीन कर्मचारियों को पुलिस ने ‘उपद्रवी/राष्ट्र-विरोधी’ तत्व बताया है, जिनका संबंध भाजपा से है. इन्हें पिछले साल भाजपा की किश्तवाड़ इकाई में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया था.

इनमें से कुछ कर्मचारियों, जिनमें हिजबुल मुजाहिदीन के एक शीर्ष कार्यकर्ता का भतीजा भी शामिल है, की तस्वीरें भाजपा की किश्तवाड़ विधायक शगुन परिहार के साथ भी ली गई हैं.

‘स्थानीय ठेकेदार की जिम्मेदारी है कि वह सिर्फ साफ और सक्षम लोगों को ही काम पर रखे’

इन कर्मचारियों के भाजपा से संबंध के बारे में पूछे जाने पर खट्टर ने जवाब देते हुए कहा, ‘हमें इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन हम इस पर जरूर ध्यान देंगे. यहां सिर्फ साफ-सुथरे और काम में बाधा न डालने वाले लोगों को ही नौकरी मिलनी चाहिए. यह स्थानीय ठेकेदार की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सिर्फ साफ-सुथरे और सक्षम लोगों को ही काम पर रखा जाए.’

मालूम हो कि किश्तवाड़ के द्राबशाला में चिनाब नदी पर बन रही 850 मेगावाट की रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना का निर्माण कार्य 4 दिसंबर को निर्माण स्थल के पास हुए एक लक्षित हमले में एमईआईएल के मानव संसाधन प्रमुख बुरहान अंद्राबी के घायल होने के बाद अस्थायी रूप से रोक दिया गया था, जिसके बाद किश्तवाड़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की.

यह हमला भाजपा के किश्तवाड़ स्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए झूठे आरोपों की पृष्ठभूमि में सामने आया था, जिन्हें स्थानीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आसिफ इकबाल नाइक ने और भी बढ़ा दिया था.

इन आरोपों में कहा गया था कि एमईआईएल जानबूझकर उग्रवाद और पाकिस्तान से जुड़े कर्मचारियों को भर्ती करके राष्ट्रीय परियोजना को बाधित करने का प्रयास कर रही है.

जम्मू-कश्मीर भाजपा के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा और किश्तवाड़ के विधायक परिहार ने भी राष्ट्रीय परियोजना को पटरी से उतारने की साजिश का आरोप लगाया है और एमईआईएल पर ‘पाकिस्तान के एजेंडे को पूरा करने’ का आरोप लगाया है.

हालांकि, एमईआईएल के परियोजना प्रबंधक ने एक वीडियो बयान में भाजपा को जवाब देते हुए परिहार और अन्य स्थानीय भाजपा नेताओं पर प्रबंधन को राजनीतिक और धार्मिक आधार पर कर्मचारियों की भर्ती करके अनुचित प्रथाओं को अपनाने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया.

320 कर्मचारियों की छंटनी का आदेश

ज्ञात हो कि औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 25-एफ के खंड (सी) के तहत एमईआईएल द्वारा 320 कर्मचारियों की छंटनी के आदेश जारी करने के बाद ज़बानी जंग शुरू हो गई थी. बाद में लगभग 200 कर्मचारियों की नौकरी समाप्त कर दी गई.

भाजपा ने आरोप लगाया कि केवल स्थानीय लोगों की छंटनी की गई, जबकि आधिकारिक दस्तावेजों से पता चलता है कि कम से कम 73 कर्मचारी गैर-स्थानीय थे, जबकि छंटनी किए गए स्थानीय कर्मचारी भी किश्तवाड़ के अलावा जम्मू-कश्मीर के डोडा, रामबन, जम्मू और पुंछ जिलों से थे.

इस मामले पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शर्मा और परिहार पर किश्तवाड़ की बिजली परियोजनाओं में ‘हस्तक्षेप’ करने का आरोप लगाया है, जिन्हें भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद तेजी से आगे बढ़ाया है.

हालांकि, शर्मा और परिहार ने किश्तवाड़ पुलिस के उस पत्र का हवाला देते हुए इन आरोपों को खारिज कर दिया है, जिसमें परियोजना स्थल पर एमईआईएल द्वारा नियोजित 29 श्रमिकों को ‘उपद्रवी/राष्ट्र-विरोधी’ तत्व बताया गया है.

दिलचस्प बात यह है कि इनमें से किसी भी मजदूर को किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है और ज्यादातर की एफआईआर विरोध प्रदर्शन के संबंध में दर्ज की गई थी.

द वायर की एक जांच में यह भी पता चला कि रतले परियोजना का संकट किश्तवाड़ के कुंतवारा निवासी और भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय परिहार को ठेके न दिए जाने का परिणाम हो सकता है, जिन्हें एमईआईएल द्वारा ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था.

संजय परिहार, जिनकी तस्वीर विपक्ष के नेता शर्मा के साथ ली गई थी, ने बाद में एमईआईएल के परियोजना प्रबंधक सिंह और मानव संसाधन प्रमुख अंद्राबी सहित गैर-स्थानीय कर्मचारियों को हटाने की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व किया.

गौरतलब है कि 16 दिसंबर को सिंह ने किश्तवाड़ पुलिस को पत्र लिखकर आश्वासन दिया कि संदिग्ध कर्मचारियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और किसी भी राष्ट्रविरोधी/परियोजना विरोधी गतिविधि की सूचना पुलिस को तुरंत दी जाएगी.

किश्तवाड़ पुलिस ने अभी तक सिंह की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की है, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नाइक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351 (आपराधिक धमकी) और 356 (आपराधिक मानहानि) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-ई और 67 के तहत आपराधिक कार्यवाही की मांग की है.

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