नई दिल्ली: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने मंगलवार (6 जनवरी) को भागीरथपुरा क्षेत्र के दूषित पानी मामले में सुनवाई करते हुए सरकार, नगर निगम और जिला प्रशासन के रवैये पर नाराज़गी जताते हुए इसे असंवेदनशील बताया.
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताया और कहा कि स्वच्छता में नंबर वन बताए जाने वाले इंदौर में इस तरह की घटना होना अपने आप में चौंकाने वाली बात है.
अदालत ने नगर निगम और जिला प्रशासन की उस स्टेटस रिपोर्ट पर भी नाराजगी जाहिर की, जिसमें मृतकों की संख्या को लेकर जानकारी दी गई थी. कोर्ट ने संबंधित विभागों को फटकार लगाते हुए कहा कि इस तरह की रिपोर्ट से मामले की गंभीरता कम नहीं हो जाती.
अदालत यह फैसला करेगी कि इस घटना को सिर्फ लापरवाही माना जाए या फिर किसी पर आपराधिक जिम्मेदारी तय की जाए.
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 15 जनवरी को मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने साफ कहा कि इस मामले में शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए.
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि हर नागरिक को स्वच्छ पानी और उचित इलाज मिलना चाहिए. कोर्ट ने दो टूक कहा कि लोगों की जान से जुड़ा यह मामला है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
अखबार के अनुसार, इंदौर में अब तक दूषित पानी पीने से 17 लोगों की मौत हो चुकी है. और फिलहाल 110 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं.
वहीं, दूषित पानी का मामला सामने आने के बाद से कुल 421 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 311 को छुट्टी दे दी गई है. जबकि पंद्रह मरीजों का आईसीयू में इलाज चल रहा है.
पिछले 24 घंटों में उल्टी और दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें से छह मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
उज्जैन जिले के एसडीएम निलंबित
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, इस बीच कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के ‘घंटा’ वाले बयान से जुड़े मामले में उज्जैन के एसडीएम आनंद मालवीय को निलंबित कर दिया गया है.
यह कार्रवाई उनके द्वारा जारी किए गए एक आदेश के बाद सामने आई, जिसमें उन्होंने राज्य के शहरी विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विवादास्पद ‘घंटा’ वाले बयान को ‘तानाशाही व्यवहार’ की निशानी बताया था.
ज्ञात हो कि यह मामला इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों से जुड़ा है. इसको लेकर कांग्रेस पार्टी विरोध प्रदर्शन कर रही है. कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन को लेकर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीएम ने आदेश निकाला था और इसमें मंत्री के बयान का ज़िक्र था.
एसडीएम आनंद मालवीय को जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक आदेश जारी करना था, जो कांग्रेस के इन प्रदर्शनों से जुड़ा था. लेकिन उनके आदेश में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान का जिक्र करते हुए कहा गया कि इस संवेदनशील मुद्दे पर ‘घंटा’ शब्द का इस्तेमाल ‘अमानवीय और तानाशाही व्यवहार’ की निशानी है. यह बयान बेहद आपत्तिजनक है. जब इस आदेश की खबर फैली तो विवाद खड़ा हो गया.
एसडीएम मालवीय ने अखबार से बातचीत में कहा कि आदेश के कुछ हिस्से कांग्रेस पार्टी के वॉट्सऐप ग्रुप के मैसेज से कॉपी हो गए थे.
उन्होंने बताया, ‘आदेश में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बारे में वॉट्सऐप ग्रुप से कुछ हिस्से उठा लिए गए. स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े आधिकारिक स्रोतों से थे, लेकिन गलतियां नजर आने पर मैंने पुराना आदेश वापस ले लिया और नया जारी किया. लेकिन किसी ने पुराना आदेश वायरल कर दिया.’
इसके बाद उज्जैन संभाग के कमिश्नर ने 5 जनवरी को निलंबन का आदेश जारी किया. इसमें मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत इसे कदाचार माना गया. इसके तहत आनंद मालवीय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया. निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय उज्जैन संभाग कमिश्नर कार्यालय में रहेगा.
गौरतलब है कि इंदौर शहर के भागीरथपुरा में नर्मदा नदी की पाइपलाइन में ड्रेनेज लाइन का पानी मिल जाने से सप्लाई का पानी दूषित हो गया था. इस संबंध में इंदौर नगर निगम को बीते गुरुवार को सौंपी गई एक रिपोर्ट में बताया गया कि शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र से लिए गए पानी के नमूनों में से एक-तिहाई में बैक्टीरियल इन्फेक्शन पाया गया है.
इस संबंध में नए साल के पहले दिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है.
