राजस्थान: पुलिसकर्मी ने लगाया ‘अवैध’ खनन मामले में मारपीट, विधायक के दबाव का आरोप; निलंबन

केकड़ी सदर थाने में तैनात एक पुलिसकर्मी राजेश मीणा के निलंबन मामले को जहां शासन-प्रशासन उनके ख़िलाफ़ दर्ज मारपीट और पिस्तौल लहराने के आरोपों से जोड़ रहा है, तो वहीं विपक्षी दल कांग्रेस और खुद कॉन्स्टेबल मीणा इसे अवैध खनन गतिविधियों को लेकर उनके द्वारा की गई कार्रवाई के बाद स्थानीय विधायक के दबाव में उठाया गया क़दम बता रहे हैं.

केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम जिनके द्वारा कथित दबाव का आरोप हेड कांस्टेबल मीणा ने लगाया है. (फोटो साभार: X/@ShatrughanMLA)

नई दिल्ली: राजस्थान के अज़मेर ज़िले के केकड़ी सदर थाने में तैनात एक पुलिसकर्मी के निलंबन का मामला इस वक्त राज्य में सियासी हलचल का कारण बना हुआ है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, एक ओर जहां शासन-प्रशासन हेड कॉन्स्टेबल राजेश मीणा के निलंबन को उनके ख़िलाफ़ दर्ज मारपीट और पिस्तौल लहराने के आरोपों से जोड़ रहा है, तो वहीं विपक्षी दल कांग्रेस और खुद कॉन्स्टेबल मीणा इसे अवैध गतिविधियों को लेकर उनके द्वारा की गई कार्रवाई के बाद स्थानीय विधायक के दबाव में उठाया गया कदम बता रहे हैं.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, सोशल मीडिया पर सामने आई एक वीडियो में हेड कॉन्स्टेबल राजेश मीणा ने बताया कि उन्हें थाना प्रभारी (एसएचओ) द्वारा सूचना दी गई थी कि अवैध खनन के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई है और उन्हें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने का निर्देश दिया गया. वह घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने एसएचओ को घटना की पूरी जानकारी दी, जिसमें मौके पर चार ट्रैक्टर और दो जेसीबी मशीनों की मौजूदगी भी शामिल थी.

मीणा का आरोप है कि एसएचओ वहां तीन घंटे बाद पहुंचे और उन्होंने पहुंचते ही कॉन्स्टेबल द्वारा जब्त की गई गाड़ियों को छोड़ने के लिए कहा. उन्होंने इससे इनकार कर दिया और कहा कि वे इन्हें नहीं छोड़ सकते क्योंकि उनका वीडियो वायरल हो गया है और वे अवैध खनन की अनुमति नहीं देते हैं.

मीणा का आगे बताया कि उन्होंने एसएचओ से कहा, ‘आप रिश्वत ले रहे होंगे, लेकिन मैं नहीं लेता.’ मीणा ने कहा कि इसके बाद वह जब्त किए गए वाहनों को थाने ले गए, लेकिन स्थानीय भाजपा विधायक शत्रुघ्न गौतम ने उन पर दबाव डाला और उन्हें नौकरी से निकलवाने की धमकी दी.

मीणा ने बताया, ‘मुझे विधायक और उनके आदमियों के करीब 20 फोन आए.’ उन्होंने दावा किया कि जब वह अपने रिश्तेदार से मिलने के लिए पुलिस स्टेशन से बाहर निकले, तो करीब 15-20 लोगों ने उन्हें घेर लिया और उन पर हमला किया.

मीणा बताते हैं, ‘मेरे दोनों हाथ और सिर पर चोटें आई हैं और फिर मुझे निलंबित भी कर दिया गया.’

मीणा पर अस्पताल के बाहर लोगों से मारपीट का आरोप

वहीं, इस पूरे मामले को लेकर अज़मेर के डिप्टी एसपी हर्षित शर्मा ने बताया कि 5 जनवरी की रात मीणा ने ‘शराब पीकर यहां एक अस्पताल के बाहर कुछ निजी व्यक्तियों पर हमला किया और अभद्र भाषा का प्रयोग किया.

उन्होंने आगे कहा, ‘मीणा ने उनकी गाड़ी को भी नुकसान पहुंचाया. पीड़ित की शिकायत के आधार पर एसपी ने उन्हें निलंबित कर दिया.’

अवैध खनन के आरोप पर शर्मा ने दावा किया कि खनिज विभाग द्वारा किए गए सत्यापन से पता चला कि खनन वैध था.

शर्मा ने कहा, ‘जब्त की गई गाड़ियां थाने में रखी गई थीं और अगले दिन खनिज विभाग ने दावों का सत्यापन किया और पाया कि खनन पट्टे वाले क्षेत्र में किया जा रहा था और गाड़ियों को छोड़ने के लिए पुलिस थाने को पत्र लिखा.’

हालांकि, मीणा द्वारा उल्लेखित व्यक्ति की मृत्यु के संबंध में शर्मा ने कहा कि वह एक दुर्घटना थी.

पुलिसकर्मियों पर तानाशाही, ताकि माफिया को खुली छूट मिल सके : गहलोत

इसी बीच सोशल मीडिया मंच एक्स पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, ‘राज्य में बजरी माफिया बेखौफ होकर काम कर रहा है और भाजपा सरकार उनकी संरक्षक बनी हुई है. इससे भी ज्यादा शर्मनाक बात यह है कि केकड़ी पुलिस स्टेशन के एक पुलिसकर्मी, श्री राजेश मीणा ने एक वीडियो जारी कर बताया है कि स्थानीय भाजपा विधायक ने उन्हें अवैध खनन के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने से रोका और धमकाया.’

उन्होंने आगे दावा किया कि भाजपा शासन में ‘पुलिसकर्मियों पर तानाशाही थोपी जा रही है ताकि माफिया को खुली छूट मिल सके.’

गहलोत ने बताया कि केकड़ी विधानसभा क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में बजरी माफिया ने चार लोगों की जान ले ली है.

पूर्व सीएम ने आगे कहा, ‘मुख्यमंत्री जी, कृपया इस मामले का तत्काल संज्ञान लें और दोषी माफियाओं और उन्हें संरक्षण देने वाले जन प्रतिनिधियों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई करें.’

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी कहा कि मीणा को ‘अवैध खनन रोकने के लिए बेरहमी से पीटा गया, और विभाग की ओर से इनाम के तौर पर उन्हें निलंबित कर दिया गया… क्योंकि उन्होंने भाजपा नेताओं के संरक्षण में हो रहे अवैध खनन के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की हिम्मत दिखाई.’

डोटासरा ने आगे कहा, ‘यह सिर्फ एक पुलिस अधिकारी पर हमला नहीं है; यह कानून के शासन पर सीधा हमला है. भाजपा नेताओं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि अपना कर्तव्य निभाने वाले पुलिसकर्मियों को परेशान और अपमानित किया जा रहा है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘पुलिस की वर्दी को रौंदा जा रहा है, और सरकार मूक दर्शक बनी बैठी है. क्या भाजपा सरकार ने अवैध खनन के सामने पूरी तरह से आत्मसमर्पण कर दिया है?’

विधायक शत्रुघ्न गौतम का पलटवार

उधर, इस पूरे मामले पर केकड़ी के विधायक शत्रुघ्न गौतम ने खुद पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश बताया है.

गौतम ने स्पष्ट किया कि उनका इस विवाद से कोई सीधा लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि जो वाहन पकड़े गए थे उनकी जांच खनिज विभाग ने की और उन्हें सही पाया गया. विधायक ने जोर देकर कहा कि वह हमेशा सच्चाई का साथ देंगे और गलत के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने हैड कॉन्स्टेबल पर आरोप लगाया कि वह वैध काम करने वालों को परेशान कर रहे थे.