नई दिल्ली: घरेलू नल जल कनेक्शनों पर केंद्रीय जल मंत्रालय की रिपोर्ट में पाया गया है कि गुजरात अपने जल आपूर्ति नेटवर्क के माध्यम से पानी की मात्रा और गुणवत्ता – दोनों मामलों में राष्ट्रीय औसत से काफ़ी पीछे है.
यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब गांधीनगर में पीने के पानी में बड़े पैमाने पर दूषण फैला है, जिससे राज्य की राजधानी के कुछ हिस्सों में टायफाइड फैलने की खबर आई है.
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ‘घरेलू नल कनेक्शनों की कार्यक्षमता आकलन राज्य रिपोर्ट–2024’ के अनुसार, वर्ष 2024 में राज्य के 50 प्रतिशत से भी कम घरों को नल के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण पानी मिला, जबकि राष्ट्रीय औसत 76 प्रतिशत है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्य में केवल 58.7 प्रतिशत घरों को प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर या उससे अधिक पानी मिला – जो जल जीवन मिशन के तहत निर्धारित लक्ष्य है -जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 80.2 प्रतिशत है.
इसके अलावा, गुजरात में केवल 47.3 प्रतिशत नल कनेक्शन ही पूरी तरह काम कर रहे थे, जबकि राष्ट्रीय औसत 76 प्रतिशत है.
रिपोर्ट के मुताबिक, गांधीनगर में केवल 31.9 प्रतिशत और अहमदाबाद में 46.1 प्रतिशत घरों को ही पीने योग्य पानी उपलब्ध हो सका. राज्य के 33 में से 19 ज़िलों में 50 प्रतिशत से भी कम घरों को नलों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण पेयजल मिला.
गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता पार्थिवराजसिंह कठवाडिया ने कहा कि बनासकांठा और दाहोद ज़िलों में तो घरेलू स्तर पर बिल्कुल भी पीने योग्य पानी उपलब्ध नहीं हो पाया.
टायफाइड का प्रकोप
गुजरात के गांधीनगर में सेक्टर–24, सेक्टर–28 और अदीवाड़ा इलाकों में पीने के पानी में गंदगी के कारण टायफाइड के 100 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं.
कम से कम सात स्थानों पर पाइपलाइन में रिसाव के कारण सीवेज का पानी पीने के पानी की आपूर्ति में मिल गया. ये रिसाव 257 करोड़ रुपये की जल आपूर्ति परियोजना के तहत नई पाइपलाइन बिछाए जाने के बाद सामने आए, जहां जल आपूर्ति पाइपें सीवर लाइनों के बेहद पास या उनके संपर्क में डाली गई थीं.
गुजरात में यह प्रकोप ऐसे समय में सामने आया है, जब कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश के इंदौर में भी इसी तरह के दूषित जल की खबर आई थी, जहां दूषित पानी पीने से कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई है.
