महाराष्ट्र निकाय चुनाव: फडणवीस बोले- कांग्रेस, एआईएमआईएम के साथ गठबंधन मंज़ूर नहीं, नेताओं पर कार्रवाई

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव में इस बार अंबरनाथ में भाजपा-कांग्रेस और अकोट में भाजपा-एआईएमआईएम के बीच असामान्य गठबंधन की ख़बरों ने सबको हैरानी में डाल दिया था. अब मामले के तूल पकड़ने के बाद अब सभी पार्टियों ने अपने-अपने स्थानीय नेताओं पर कार्रवाई की है, साथ ही गठबंधन भी तोड़ दिया है.

Pune: Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis addresses at the 227th birth anniversary function of Umaji Naik Khomane, at Bhiwadi village in Pune, Friday, Sept 7, 2018. (PTI Photo) (PTI9_7_2018_000162B)
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विरोधियों से किसी भी तरह के गठबंधन से इनकार किया. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव में इस बार राष्ट्रीय और राज्य स्तर की राजनीति से इतर दो धुर विरोधियों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच ठाणे के अंबरनाथ में गठबंधन की खबरों ने सबको चौंका दिया था.

वहीं, इसी तरह की कुछ खबरें असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) को लेकर भी सामने आईं, जिसमें कहा गया कि ये पार्टी विदर्भ क्षेत्र में पड़ने वाले अकोट में भाजपा की सहयोगी बनी है.

हालांकि, मामले के तूल पकड़ने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी पार्टी को दोनों गठबंधनों को तोड़ने का निर्देश देते हुए कहा कि ये स्वीकार्य नहीं हैं.

उन्होंने विरोधी दलों के साथ आने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए बुधवार (7 जनवरी) को कहा कि इस तरह के किसी गठबंधन को शीर्ष नेतृत्व से मंजूरी नहीं मिली है और इस तरह का गठबंधन अनुशासन का उल्लंघन है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में बहुत कुछ असामान्य देखने को मिला. जैसे-2 जनवरी को नामांकन वापसी के अंतिम दिन अचानक 68 उम्मीदवारों का नाम वापस लेना और इन वार्डों में व्यापक तौर पर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का निर्विरोध जीत जाना.

इसमें भाजपा को 44, शिवसेना (शिंदे गुट) को 22 और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) को दो सीटें मिलीं. ये महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव इतिहास में अब तक की सबसे अधिक निर्विरोध जीती जाने वाली सीटों की संख्या हैं.

असामान्य गठबंधन

हालांकि, बड़े पैमाने पर उम्मीदवारों की खरीद-फरोख्त और मिलीभगत के अन्य आरोपों के बीच पहली बार इस चुनाव में सत्ता हासिल करने के लिए राजनीति के धुर विरोधियों का गठबंधन भी देखने को मिला.

मालूम हो कि अंबरनाथ में भाजपा ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ चुनाव बाद समझौता किया और 60 सदस्यीय अंबरनाथ नगर परिषद में 31 सीट के साथ बहुमत साबित किया, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) बहुमत से मात्र चार कम 27 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी रही.

ऐसे में यह दिलचस्प बात सामने आई कि शिवसेना को रोकने के लिए यह गठबंधन किया गया था, जो राज्य में भाजपा की सहयोगी है.

यहां भाजपा के 14 सदस्य, कांग्रेस के 12 और राकंपा के चार सदस्यों ने एक निर्दलीय के समर्थन से बहुमत के लिए जरूरी 30 के आंकड़े को पार कर लिया.

हालांकि, इस खबर सामने आते ही पार्टी प्रमुखों ने एक पत्र जारी कर अंबरनाथ ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को निलंबित कर दिया.

इसी तरह अकोला के अकोट कस्बे में भी भाजपा और एआईएमआईएम के बीच कुछ ऐसा ही असामान्य गठबंधन देखने को मिला. यहां 35 सदस्यीय अकोट नगर परिषद में 33 सीटों के परिणाम घोषित किए गए, जिसमें भाजपा ने 11 सीटें जीतीं, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला.

वहीं, एआईएमआईएम ने यहां पांच सीटें जीती और वह कांग्रेस (6 सीट) के बाद तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. इसके बाद भाजपा और एआईएमआईएम ने यहां हाथ मिला लिया.

स्थानीय भाजपा नेताओं का कहना है कि एआईएमआईएम के साथ हाथ मिलाने का फैसला सत्ता हासिल करने की रणनीति थी, न कि कोई वैचारिक निर्णय.

हालांकि, यहां भी गठबंधन की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस असामान्य गठबंधन में शामिल भाजपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी.

नेताओं पर कार्रवाई

भाजपा के अकोट विधायक प्रकाश भारसकले को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसमें उन पर इस साझेदारी के पीछे का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाया गया.

वहीं, इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, इसी बीच कांग्रेस की ओर से भी कार्रवाई देखने को मिली और पार्टी ने अंबरनाथ की शहरी इकाई को भंग कर दिया और इसके प्रमुख प्रदीप पाटिल को निलंबित कर दिया.

महाराष्ट्र कांग्रेस उपाध्यक्ष गणेश पाटिल ने अंबरनाथ इकाई के प्रमुख को लिखे पत्र में कहा कि नगर निगम चुनाव पार्टी के चिन्ह पर लड़ा गया था. और बिना राज्य कार्यालय को सूचित किए भाजपा के साथ गठबंधन किया गया. यह गलत और पार्टी अनुशासन के विरुद्ध है.

पत्र में यह भी कहा गया है कि महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के निर्देशानुसार प्रदीप पाटिल को निलंबित कर दिया गया है और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी को भंग कर दिया गया है. इसके अलावा, पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने के लिए सभी पार्षदों को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है.

वहीं, प्रदीप पाटिल ने सपकाल पर आरोप लगाया कि उन्होंने अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा से पहले उन्हें सुनवाई का मौका नहीं दिया और भाजपा में शामिल होने की धमकी दी.

उन्होंने कहा, ‘हम कांग्रेस का सम्मान करते हैं और भविष्य में भी करते रहेंगे. लेकिन अगर आप हमारा अपमान करते रहेंगे, तो हमारे पास भाजपा में शामिल होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.’

इस मामले के तूल पकड़ने के बाद एआईएमआईएम ने विदर्भ क्षेत्र में पड़ने वाले अकोट में अपने पार्षदों को भाजपा गठबंधन से अलग न होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है.

एआईएमआईएम के पूर्व विधायक वारिस पठान ने कहा कि किसी भी कीमत पर भाजपा के साथ गठबंधन का कोई सवाल ही नहीं उठता क्योंकि हमारी विचारधाराएं अलग-अलग हैं.

इस संबंध में सीएम फडणवीस ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और यदि किसी ने आदेशों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने अकोट से विधायक प्रकाश भारसखले पर भी स्वतः संज्ञान लेते हुए एआईएमआईएम गठबंधन के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

नोटिस में कहा गया है, ‘इस मामले में राज्य नेतृत्व से परामर्श नहीं किया गया.’

गौरतलब है कि ये दोनों गठबंधन 13 जनवरी को होने वाले उपाध्यक्ष और दो नगर परिषदों के सह-चुने गए सदस्यों के चुनावों में सामूहिक रूप से मतदान करने वाले थे.