नई दिल्ली: राजस्थान की राजधानी जयपुर में अर्बन कंपनी (पूर्व में अर्बन क्लैप) से जुड़ी महिला कामगार बीते दो दिनों से कंपनी के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठी हैं. प्रदर्शन कर रहीं कामगारों का आरोप है कि अर्बन कंपनी उन्हें ‘जबरन मजदूरी (फोर्स्ड लेबर)’ जैसी परिस्थितियों में काम करने को मजबूर कर रही है और उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही.
प्रदर्शन में शामिल ब्यूटीशियन ट्रेड की वर्कर सिंपल कुमावत ने द वायर हिंदी से कहा कि कंपनी ने शुरुआती दिनों में, जब उसका नाम अर्बन क्लैप था, महिला कामगारों से बड़े-बड़े वादे किए थे. कई महिलाओं ने अपना पहले का रोजगार छोड़ा और कर्ज लेकर कंपनी से जुड़ गईं. उन्होंने आरोप लगाया कि इन्हीं कामगारों की मेहनत से कंपनी आगे बढ़ी, लेकिन अब पुराने कामगारों की आईडी बिना स्पष्ट कारण के ब्लॉक कर दी जा रही है.
गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस कामगारों यूनियन (GIPSWU), राजस्थान की स्टेट कोऑर्डिनेटर दीपिका के अनुसार, बुधवार को भी 100 से अधिक महिला कामगारों जयपुर स्थित अर्बन कंपनी कार्यालय पहुंचीं और नारेबाज़ी की. उन्होंने बताया कि कार्यालय में स्पा कैटेगरी या ब्यूटीशियन ट्रेड से जुड़ा कोई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था. इसके बाद कामगारों और कंपनी प्रशासन के बीच ऑनलाइन बैठक हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला. गुरुवार को भी महिला कामगारों अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठी रहीं.
यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि जयपुर जैसे बड़े शहर में कार्यालय होने के बावजूद कंपनी ने प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित नहीं किया है. उनका आरोप है कि महिला कामगारों कार्यस्थल पर सुरक्षा की मांग कर रही हैं, लेकिन कंपनी इस पर भी चुप है. उन्होंने इसे कामगारों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया.
यूनियन के नेशनल कोऑर्डिनेटर निर्मल गोराना ने आरोप लगाया कि बंडल बुकिंग, एडवांस राशि की कटौती, रेटिंग सिस्टम में कथित गड़बड़ी और आईडी ब्लॉक जैसी प्रक्रियाओं ने कामगारों की स्थिति को जबरन मजदूरी जैसी बना दिया है.
प्रदर्शनकारी कामगारों की प्रमुख मांगों में पीक ऑवर और स्लॉट सिस्टम खत्म करना, रेटिंग सिस्टम में पारदर्शिता, एडवांस क्रेडिट कटौती पर रोक, ग्राहक कैंसलेशन पर शुल्क, एसएलए समय-सीमा में बदलाव (अभी यह 45 मिनट है, जिसे डेढ़ घंटे किया जाए), 24×7 मानव कस्टमर केयर, बंडल बुकिंग सिस्टम समाप्त करना, न्यूनतम 40,000 रुपये मासिक आय की गारंटी और कामगारों को औपचारिक दर्जा देना शामिल है.
इस मुद्दे पर अर्बन कंपनी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
