नई दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अपने हालिया आदेश में कहा है कि 2023 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी के तट पर ‘टेंट सिटी’ का निर्माण पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हुए किया गया था.
द हिंदू की खबर के मुताबिक, एनजीटी की प्रधान पीठ, जिसमें अध्यक्ष प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल शामिल थे, एक ऐसे आवेदन पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि टेंट सिटी को आवश्यक मंजूरी के बिना स्थापित किया गया था. ये नदी के तट और जल को प्रदूषित कर रही है. साथ ही वनस्पतियों और जीवों को नुकसान पहुंचा रही है.
आवेदक ने यह भी आरोप लगाया था कि टेंट सिटी का सीवेज सीधे नदी में बहाया जा रहा है.
मालूम हो कि 13 जनवरी 2023 को इस परियोजना का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि ‘टेंट सिटी के साथ काशी आने वाले पर्यटकों और भक्तों को अब आवास का एक अविश्वसनीय साधन मिल गया है.’
अब अपने हालिया आदेश में एनजीटी ने गुरुवार (8 जनवरी) को कहा, हम पाते हैं कि प्रतिवादी संख्या 11 और 12 (दो निजी कंपनियों) द्वारा स्थापित और संचालित टेंट सिटी पर्यावरण मानदंडों और गंगा नदी (पुनरोद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण के आदेश का उल्लंघन करते हुए बनाई गई थी, जिसके लिए पर्यावरण क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाया गया था, लेकिन अभी तक इसे वसूल नहीं किया गया है. इसलिए, इसे जल्द वसूल किया जाना आवश्यक है.’
बताया गया है कि अब तक वसूले न गए इस जुर्माने की राशि 17.12 लाख रुपये है.
एनजीटी ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि प्रतिवादी (सरकारी अधिकारी) यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण एवं प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 और लागू पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करते हुए गंगा नदी या उसकी सहायक नदियों के किनारे किसी भी प्रकार की टेंट सिटी का निर्माण न होने दिया जाए.
आवेदक ने यह भी आरोप लगाया था कि टेंट सिटी ‘कछुआ वन्यजीव अभयारण्य’ के स्थान पर बनाई गई थी और इस अभयारण्य को 2020 में अवैध रूप से निरस्त कर दिया गया था.
इस पर एनजीटी के आदेश में कहा गया है कि चूंकि टेंट सिटी से संबंधित एक कछुआ अभयारण्य को गैर-अधिसूचित करने का मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, इसलिए प्राधिकरण इस मामले में हस्तक्षेप करना उचित नहीं समझता.
मालूम हो कि अक्टूबर 2023 में एनजीटी को सौंपी गई एक रिपोर्ट में स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन (एनएमसीजी) द्वारा कहा गया था कि ‘टेंट सिटी के परियोजना विकास के पूर्व-अनुमति के लिए आवेदन 2022 में परियोजना के लागू होने के बाद किया गया था.’
गौरतलब है कि क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं का भरपूर लाभ उठाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी मोड में वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) द्वारा टेंट सिटी विकसित की गई थी. ‘शानदार आवास’ सुविधाओं वाली इस परियोजना को खासकर काशी विश्वनाथ धाम के उद्घाटन के बाद वाराणसी में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को पूरा करने के लिए विकसित किया गया था.
बताया गया था कि पर्यटक आसपास स्थित विभिन्न घाटों से नावों द्वारा टेंट सिटी तक पहुंच सकते थे. इसे हर साल अक्टूबर से जून तक चालू रखा जाना था और मानसून के दौरान गंगा में जल स्तर बढ़ने पर तीन महीने के लिए इसे बंद कर दिया जाना था.
