नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार द्वारा आगामी नगर निगम चुनावों से ठीक एक दिन पहले मुख्यमंत्री-माझी लाडकी बहिन योजना की दो किस्तें लाभार्थियों को ट्रांसफर करने के कदम ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन और विपक्षी कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने घोषणा की है कि दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के लिए 3,000 रुपये की राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में 14 जनवरी को जमा कर दी जाएगी, जो कई नगर निकायों में मतदान से ठीक 24 घंटे पहले का समय है.
वहीं, महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) ने इस भुगतान के समय को लेकर राज्य चुनाव आयोग के समक्ष अपनी आपत्ति जताई है.
कांग्रेस ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि चुनाव की पूर्व संध्या पर दो महीने की किश्तें जारी करना ‘सामूहिक सरकारी रिश्वत’ के बराबर है और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है.
पार्टी ने तर्क दिया कि यह कदम एक करोड़ से अधिक महिला मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से उठाया गया है और आयोग से आग्रह किया कि वह सरकार को मतदान पूरा होने तक किश्तों का ट्रांसफर स्थगित करने का निर्देश दे.
विपक्ष के इन आरोपों को खारिज करते हुए राजस्व मंत्री और नागपुर जिला संरक्षक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सरकार के फैसले का बचाव किया और कांग्रेस की आपत्तियों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया.
उन्होंने कहा कि लाडकी बहिन योजना नगर निगम चुनावों की घोषणा से काफी पहले शुरू की गई थी और इसका चुनावी प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है.
बावनकुले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘यह राज्य सरकार का एक सतत कल्याणकारी कार्यक्रम है. 29 नगर निकायों में चुनावों के लिए पूरे राज्य की महिलाओं को उनके उचित लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता है.’
उन्होंने आगे कहा कि भुगतान रोकना महिला लाभार्थियों के साथ भेदभाव होगा, और यह भी कहा कि चुनाव के समय के कारण योजना को रोका नहीं जा सकता.
उन्होंने कहा, ‘लगभग 25 लाख लाभार्थियों के लिए चुनाव के कारण भुगतान रोकना बहुत मुश्किल होगा. राजनीतिक फायदे के लिए कल्याणकारी योजनाओं को बंद या चालू नहीं किया जा सकता.’
बावनकुले ने कांग्रेस पर योजना की शुरुआत से ही इसमें बाधा डालने का आरोप भी लगाया.
उन्होंने कहा, ‘जब इस सरकार ने योजना शुरू की, तो कांग्रेस ने इसे रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया. एमपीसीसी के पूर्व अध्यक्ष नाना पाटोले ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के लिए प्रोत्साहित करके योजना को पटरी से उतारने की कोशिश की.’
एआई टूल से बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान
इस बीच भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने रविवार (11 जनवरी) को आगामी नगर निकाय चुनावों के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया, जिसमें ‘प्रौद्योगिकी आधारित शासन’ से लेकर भारत की वित्तीय राजधानी को ‘वैश्विक महाशक्ति’ बनाने और शहर को बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों के कथित अवैध प्रवाह से ‘मुक्त’ करने तक के वादे शामिल हैं.
इस दौरान फडणवीस ने कहा, ‘हम मुंबई को बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं से मुक्त कराएंगे. आईआईटी की मदद से हम बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान करने के लिए एक एआई टूल विकसित करेंगे.’
इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में एआई टूल के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह तकनीक अवैध अप्रवासियों का पता लगाने में मदद करेगी.
उन्होंने कहा कि प्रवासी पहले पश्चिम बंगाल से आते हैं, फिर नकली कागज बनाते हैं और उसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर सरकारी योजनाओं का फायदा उठाते हैं. इस समस्या से निपटने के लिए एआई टूल बनाना एक अहम कदम साबित होगा.
देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि मुंबई से बड़ी संख्या में ऐसे अप्रवासियों को निर्वासित यानी निकाला गया है, जो पश्चिम बंगाल से आए थे और फर्जी दस्तावेजों की मदद से देश की सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे थे.
वहीं, इस मामले पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की.
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने एक बयान में कहा कि अगर सरकार ने वास्तव में अवैध प्रवासियों और रोहिंग्याओं की सबसे अधिक संख्या की पहचान की है, तो उसे आंकड़े जारी करने चाहिए.
सावंत ने फडणवीस पर हमला करते हुए उन्हें ‘सपनों का सौदागर’ बताया और कहा कि वह वर्तमान की कड़वी वास्तविकताओं को नजरअंदाज करते हुए सुनहरे भविष्य का दिखावा करते हैं.
उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के साक्षात्कार मुख्य रूप से भविष्य की योजनाओं पर केंद्रित होते हैं, जबकि अतीत में किए गए वादों के क्रियान्वयन के बारे में बहुत कम स्पष्टीकरण दिया जाता है.
