नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज की एक कमेटी ने इंदौर प्रशासन को शहर के भागीरथपुरा इलाके में 21 लोगों की मौत के बारे में एक ऑडिट रिपोर्ट सौंपी है.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 15 मौतें इलाके में हाल ही में उल्टी और दस्त (डायरिया) फैलने से जुड़ी हो सकती हैं.
मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी ही थी कि मंगलवार (13 जनवरी) को भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से जुड़े डायरिया के पांच नए मामले सामने आए.
अब तक, इंदौर प्रशासन ने दूषित पानी पीने से उल्टी और डायरिया के कारण छह लोगों की मौत की पुष्टि की है. हालांकि, स्थानीय लोगों ने कहा है कि दूषित पानी पीने से फैली बीमारी के कारण अब तक छह महीने के बच्चे सहित 23 मरीजों की मौत हो चुकी है.
मालूम हो कि इंदौर के भागीरथपुरा में 24 दिसंबर से 6 जनवरी के बीच गंभीर उल्टी और दस्त के कारण कई लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया.
डीएम शिवम वर्मा ने मंगलवार को कहा, ‘भागीरथपुरा में हुई मौतों के कारणों का विश्लेषण करने के लिए कॉलेज के सीनियर डॉक्टरों की एक कमेटी बनाई गई थी. इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है.’
ज्ञात हो कि 29 दिसंबर को उल्टी और डायरिया फैलने के बाद से अब तक कुल 436 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 403 मरीजों को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया, जबकि 33 मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से आठ अस्पतालों के आईसीयू में हैं.
गौरतलब है कि इंदौर शहर के भागीरथपुरा में नर्मदा नदी की पाइपलाइन में ड्रेनेज लाइन का पानी मिल जाने से सप्लाई का पानी दूषित हो गया था. 3 जनवरी को नगर निगम द्वारा जीवाणु परीक्षण के लिए भागीरथपुरा से एकत्र किए गए 51 नमूनों में से 35 में मल कोलीफॉर्म जीवाणु की मात्रा पाई गई.
अखबार के अनुसार, यह मात्रा 13 से 360 प्रति मिलीलीटर तक थी. जबकि भारतीय मानकों के अनुसार सुरक्षित मानी जाने वाली संख्या शून्य है. इस संबंध में इंदौर नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि भागीरथपुरा में पाया गया दूषण स्तर सुरक्षित माने जाने वाले स्तर से कहीं अधिक है.
