केंद्र द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कार रद्द किए जाने के बाद स्टालिन ने 7 भाषाओं में साहित्यिक पुरस्कारों की घोषणा की

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने साहित्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर के नए पुरस्कारों की घोषणा की है. यह घोषणा दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कारों को अचानक रद्द किए जाने के जवाब में की गई है. ‘सेम्मोझी साहित्य पुरस्कार’ नाम से दिए जाने वाला यह सम्मान शुरुआती चरण में तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ओड़िया, बांग्ला और मराठी भाषाओं में हुए साहित्यिक कार्यों के लिए दिया जाएगा.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने रविवार (18 जनवरी) को साहित्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर के नए पुरस्कारों की घोषणा की है. यह घोषणा दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कारों को अचानक रद्द किए जाने के जवाब में की गई है.

चेन्नई अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला (सीआईबीएफ) के समापन समारोह में स्टालिन ने यह घोषणा की.

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘सेम्मोझी साहित्य पुरस्कार’ नाम से दिए जाने वाले ये सम्मान शुरुआती चरण में तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ओड़िया, बांग्ला और मराठी भाषाओं में किए गए साहित्यिक कार्यों को दिए जाएंगे. प्रत्येक पुरस्कार के साथ 5 लाख रुपये की नकद राशि होगी और हर भाषा के लिए अलग-अलग जूरी गठित की जाएगी.

ज्ञात हो कि बीते दिसंबर में केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय के निर्देश के बाद साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित की जाने वाली एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को रद्द कर दिया था.

इस तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप को ‘खतरनाक’ बताते हुए स्टालिन ने कहा कि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि साहित्य अकादमी पुरस्कार आगे आयोजित होंगे या नहीं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि कई लेखकों और साहित्यिक संगठनों ने उक्त प्रतिष्ठित पुरस्कार को रद्द किए जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देने के लिए तमिलनाडु सरकार से अपील की थी.

साहित्य अकादमी पुरस्कारों को रद्द करने का मामला

उल्लेखनीय है कि साहित्य अकादमी हर साल 24 भाषाओं में अपने पुरस्कारों की घोषणा करती है. 2025 के लिए सभी भाषाओं की जूरी अपने-अपने पुरस्कार विजेताओं का चयन कर चुकी थी और 18 दिसंबर 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इनके नाम घोषित किए जाने थे. हालांकि, घोषणा से कुछ मिनट पहले ही केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से जारी एक सर्कुलर के कारण कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया.

सर्कुलर में संस्कृति मंत्रालय और चार स्वायत्त संस्थानों- नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, संगीत नाटक अकादमी, ललित कला अकादमी और साहित्य अकादमी के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन का हवाला दिया गया. इसमें कहा गया कि पुरस्कारों के पुनर्गठन की प्रक्रिया मंत्रालय से परामर्श के बाद की जानी है.

सर्कुलर में कहा गया, ‘जब तक पुनर्गठन प्रक्रिया को मंत्रालय की ओर से विधिवत मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक मंत्रालय की पूर्व अनुमति के बिना पुरस्कारों की घोषणा की कोई भी प्रक्रिया नहीं की जाएगी.’