ट्रंप का नॉर्वे के पीएम को मैसेज- आपने मुझे नोबेल नहीं दिया, अब ग्रीनलैंड पर पूरा नियंत्रण चाहिए

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्ज़े की धमकियों को नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने से जोड़ दिया है. नॉर्वे के प्रधानमंत्री को भेजे संदेश में उन्होंने कहा कि अब वे केवल शांति के बारे में सोचने के लिए बाध्य नहीं हैं, जिससे नाटो देशों के बीच तनाव और गहरा गया है.

(फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्ज़े की अपनी धमकियों को नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने से जोड़ दिया है. ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे को भेजे एक निजी संदेश में आरोप लगाया है कि नॉर्वे ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं देकर उनके साथ अन्याय किया है.

द गार्डियन के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ने लिखा है कि नोबेल शांति पुरस्कार से वंचित किए जाने के बाद अब वे खुद को ‘सिर्फ शांति के बारे में सोचने’ के लिए बाध्य नहीं मानते.

ट्रंप ने अपने संदेश में लिखा:

यह देखते हुए कि आपके देश ने मुझे आठ से ज़्यादा युद्ध रुकवाने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार नहीं देने का फैसला किया, अब मैं खुद को केवल शांति के बारे में सोचने के लिए बाध्य नहीं मानता.

इसके जवाब में प्रधानमंत्री स्टोरे ने स्पष्ट किया कि यह पुरस्कार नॉर्वे सरकार नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र समिति देती है. पिछले अक्टूबर में यह सम्मान वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचादो को दिया गया था. बीते सप्ताह ही मारिया ने अपना नोबेल पदक डोनाल्ड ट्रंप को भेंट किया है.

स्टोरे ने सोमवार को एक बयान में पुष्टि की कि ट्रंप का लीक हुआ संदेश असली है. उन्होंने कहा कि ट्रंप यह संदेश उस टेक्स्ट के जवाब में लिख रहे थे, जो स्टोरे ने नॉर्वे और फिनलैंड की ओर से भेजा था. उस संदेश में यूरोपीय देशों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का विरोध किया गया था और ग्रीनलैंड पर कब्ज़े के विचार को भी खारिज किया गया था.

स्टोरे ने कहा, ‘हमने तनाव कम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और फोन पर बातचीत का प्रस्ताव रखा.’

लेकिन तनाव कम करने की यह कोशिश कामयाब नहीं हो सकी. इसके कुछ ही समय बाद ट्रंप का जवाब आया.

‘ग्रीनलैंड पर पूरा और संपूर्ण नियंत्रण चाहिए’

ट्रंप ने अपने संदेश में ग्रीनलैंड को लेकर भी तीखा रुख अपनाया है. उन्होंने कहा है कि अमेरिका को इस द्वीप पर ‘पूरा और संपूर्ण नियंत्रण’ चाहिए. ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है.

जब बाद में ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह इसे बलपूर्वक हासिल करने की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने इस पर कोई स्पष्ट जवाब देने से इनकार कर दिया.

ग्रीनलैंड को लेकर यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. डेनमार्क नाटो का सदस्य है, जो अमेरिका के नेतृत्व वाला सैन्य गठबंधन है. नाटो का मूल सिद्धांत सामूहिक रक्षा का है, यानी किसी एक सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में सभी देश उसकी रक्षा करेंगे.

1949 में नाटो की स्थापना के बाद से अब तक ऐसा कोई उदाहरण नहीं रहा है, जब किसी एक सदस्य देश ने दूसरे सदस्य पर हमला किया हो.

बीबीसी के मुताबिक, डेनमार्क ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ग्रीनलैंड में सैन्य कार्रवाई करता है, तो इससे नाटो का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है. इस मुद्दे पर डेनमार्क को नाटो के कई यूरोपीय देशों का समर्थन मिला है. पिछले सप्ताह इनमें से कुछ देशों ने प्रतीकात्मक रूप से ग्रीनलैंड में अपने सीमित सैनिक भी तैनात किए थे.

हालांकि, इस तैनाती के तुरंत बाद ट्रंप ने नाटो सहयोगियों के खिलाफ आर्थिक दबाव बनाने के संकेत दिए. उन्होंने घोषणा की कि यदि नाटो के कुछ देश ग्रीनलैंड पर अमेरिका के प्रस्तावित कब्ज़े का विरोध करते हैं, तो वह 1 फरवरी से नाटो के आठ सहयोगी देशों, जिसमें ब्रिटेन भी शामिल है, से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाएंगे.

ट्रंप ने यह भी धमकी दी कि जून तक इस शुल्क को बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया जा सकता है.

इसी बढ़ते तनाव के बीच नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास स्टोरे ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर स्टब के साथ मिलकर ट्रंप को एक और संदेश भेजा. दोनों नेताओं ने अपील की है कि हालात को शांत करने और तनाव कम करने के लिए सभी पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात ऐसे हैं, जिनमें यूरोपीय देशों और अमेरिका को एकजुट होकर खड़ा रहने की ज़रूरत है.

ट्रंप के ‘तर्क’

इसके जवाब में ट्रंप ने फिर दोहराया कि नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने के बाद अब वह खुद को केवल शांति तक सीमित रखने के लिए बाध्य नहीं मानते. उन्होंने कहा कि भले ही शांति उनकी प्राथमिकता बनी रहेगी, लेकिन अब वह यह भी सोचेंगे कि अमेरिका के लिए क्या ‘सही और उचित’ है.

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि डेनमार्क रूस या चीन से ग्रीनलैंड की रक्षा करने में सक्षम नहीं है. उन्होंने इस द्वीप पर डेनमार्क के अधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके मालिकाने से जुड़े कोई ठोस लिखित दस्तावेज़ मौजूद नहीं हैं और सिर्फ ऐतिहासिक दावों के आधार पर उस पर हक़ नहीं जताया जा सकता.

नाटो को लेकर ट्रंप ने कहा कि गठबंधन की स्थापना के बाद से उन्होंने किसी भी अन्य नेता की तुलना में अधिक योगदान दिया है और अब समय आ गया है कि नाटो भी अमेरिका के लिए कुछ करे. उन्होंने अंत में कहा कि जब तक अमेरिका के पास ग्रीनलैंड पर ‘पूरा और संपूर्ण नियंत्रण’ नहीं होगा, तब तक दुनिया सुरक्षित नहीं हो सकती.

गौरतलब है कि कम आबादी वाला लेकिन प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर यह आर्कटिक द्वीप सामरिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है. यह आर्कटिक क्षेत्र में जहाज़ों की गतिविधियों पर निगरानी रखने में भी इसकी भूमिका अहम है.