नई दिल्ली: भारत में निर्वासन में रह रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को ‘हत्यारी फासीवादी’ करार देते हुए पिछले साल की घटनाओं की संयुक्त राष्ट्र से जांच कराने की मांग की है.
यह बयान उन्होंने प्रतिबंधित अवामी लीग के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक दुर्लभ सार्वजनिक उपस्थिति में दिया.
ये टिप्पणियां शुक्रवार (23 जनवरी) को नई दिल्ली के फ़ॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया में आयोजित एक मीडिया संवाद के दौरान ऑडियो लिंक के ज़रिए दी गईं. अगस्त 2024 में सत्ता से हटाए जाने के बाद यह पहला मौका था जब अवामी लीग के इतने वरिष्ठ नेता पूर्व प्रधानमंत्री के साथ सार्वजनिक रूप से एक मंच पर नजर आए.
मालूम हो कि हसीना को हटाए जाने के बाद पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई थी और उसके अधिकांश नेता निर्वासन में चले गए थे.
बीते साल नवंबर में बांग्लादेश की एक घरेलू विशेष अदालत ने जुलाई आंदोलन के दौरान ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ के आरोप में शेख़ हसीना को मृत्युदंड की सज़ा सुनाई थी. अंतरिम सरकार ने हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई है, लेकिन भारत ने इस पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
हसीना इससे पहले रिकॉर्डेड संदेशों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करती रही हैं. गुरुवार की यह उपस्थिति निर्वासन में जाने के बाद मीडिया के सामने उनका पहला लाइव सार्वजनिक बयान था.
अपने संबोधन में हसीना ने कहा, ‘हत्यारा फासीवादी यूनुस, एक मनी लॉन्ड्रर, लुटेरा, भ्रष्ट और सत्ता का भूखा गद्दार है, जिसने अपनी सब निगलने सरीखी नीतियों से हमारे देश को निचोड़ दिया है और मातृभूमि की आत्मा को कलंकित किया है. एक घायल और रक्तरंजित राष्ट्र बनकर बांग्लादेश आज खाई के किनारे खड़ा है. पूरा देश एक विशाल जेल, एक फांसीघर और मौत की घाटी बन चुका है.’
हसीना की यह उपस्थिति भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुई है. ढाका ने भारत में निर्वासन के दौरान हसीना के राजनीतिक बयानों पर बार-बार आपत्ति जताई है. हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव बढ़ा है, दोनों ने एक-दूसरे के उच्चायुक्तों को तलब किया है और क्रिकेट से जुड़ा विवाद भी द्विपक्षीय रिश्तों पर असर डाल रहा है.
अपने बयान में हसीना ने यूनुस प्रशासन को हटाने, सड़क हिंसा समाप्त करने, अल्पसंख्यकों और महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी, राजनीतिक रूप से प्रेरित मुकदमों पर रोक और पिछले एक साल की घटनाओं की ‘नई और पूरी तरह निष्पक्ष’ संयुक्त राष्ट्र जांच की मांग की.
आगामी चुनाव
अगस्त 2024 तक 15 वर्षों तक बांग्लादेश पर शासन करने वाली अवामी लीग को आगामी चुनावों से बाहर कर दिया गया है. कार्यक्रम में मौजूद पार्टी प्रतिनिधियों ने पुष्टि की कि वे इस चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का आह्वान कर रहे हैं.
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव के लिए गुरुवार से प्रचार शुरू हो गया है और सभी प्रमुख राजनीतिक दल रैलियां कर रहे हैं.
वीडियो लिंक के जरिए बोलते हुए हसीना सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री रह चुके मोहम्मद अली अराफात ने कहा, ‘हमारा रुख बिल्कुल साफ है. हमने न सिर्फ अवामी लीग के मतदाताओं और समर्थकों से, बल्कि पूरे देश के मतदाताओं से इस चुनाव के बहिष्कार की अपील की है.’
उन्होंने कहा कि पार्टी को ‘जबरन प्रतिबंधित कर इस प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है.’
सत्ता में अपने 15 वर्षों के दौरान हसीना सरकार पर लोकतांत्रिक गिरावट के आरोप लगते रहे थे. साल 2014 और 2024 के आम चुनावों का प्रमुख विपक्षी दलों ने यह कहते हुए बहिष्कार किया था कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं होंगे.
चुनाव के बाद पार्टी की आगे की रणनीति को लेकर जब पत्रकारों ने सवाल किए, तब नेताओं के जवाब स्पष्ट नहीं थे.
हसीना सरकार में शिक्षा मंत्री और चटगांव से सांसद रहे मोहीबुल हसन चौधरी नऊफ़ेल ने संकेत दिया कि पार्टी हालात के बदलने का इंतज़ार कर रही है.
उन्होंने कहा, ‘हम उस समय का इंतजार कर रहे हैं जब सेना हमारे कार्यकर्ताओं का पीछा नहीं कर रही होगी. यह एक राजनीतिक रणनीति है.’
नऊफ़ेल ने पार्टी के इतिहास का हवाला देते हुए कहा, ‘1975 के बाद लंबे समय तक हमारी पार्टी पर प्रतिबंध रहा, लेकिन हमने पुनर्गठन किया और राजनीतिक गतिविधियों में लौटे और जनता के जनादेश से सत्ता में आए.’
उन्होंने यह भी माना कि पार्टी को संगठित करने में कई मुश्किलें हैं, क्योंकि अधिकांश वरिष्ठ नेता या तो निर्वासन में हैं या जेल में हैं. उन्होंने कहा, ‘हमारे ज्यादातर जनप्रतिनिधि, सांसद, स्थानीय निकायों के अधिकारी और निर्वाचित प्रतिनिधि जेल में हैं.’
पार्टी नेताओं ने दावा किया कि उन्हें अब भी व्यापक जनसमर्थन हासिल है. नऊफ़ेल ने कहा, ‘सर्वेक्षणों और जनता से मिल रहे फीडबैक के आधार पर लोग शेख़ हसीना को वापस चाहते हैं.’ हालांकि उन्होंने इन दावों का कोई स्वतंत्र प्रमाण नहीं दिया.
भारतीय सरकार से अपेक्षाओं के बारे में पूछे जाने पर अराफात ने कहा कि पार्टी चाहती है कि ‘बांग्लादेश में लोकतंत्र लौटे.’ उन्होंने अवामी लीग को ‘एकमात्र उदार धर्मनिरपेक्ष ताकत’ और ‘बांग्लादेश में कट्टर इस्लामवाद के उभार के खिलाफ एकमात्र बाधा’ बताया.
पैनल में शामिल नेताओं ने अगस्त 2024 के बाद बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघनों का आरोप लगाया, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. उन्होंने भीड़ द्वारा 637 लोगों की मौत, 3,59,000 गिरफ्तारियां (मुख्यतः अवामी लीग सदस्यों की) और 537 नेताओं व कार्यकर्ताओं की हत्या का दावा किया.
पूर्व अवामी लीग सांसद एम. हबीबे मिल्लत ने अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और धार्मिक स्थलों पर हमलों के आरोपों का विवरण दिया.
प्रश्नोत्तर के दौरान एक रिपोर्टर ने चटगांव में युवा प्रदर्शनकारियों से मुलाकात का जिक्र किया, जिसमे कुछ 18 वर्ष से कम उम्र के थे और वे ‘स्थायी रूप से विकलांग’ या ‘आंखों की रोशनी खो चुके’ बताए गए थे. उन लोगों ने अपने हमलावरों के रूप में पुलिस या अवामी लीग की छात्र शाखा छात्र लीग के सदस्यों की पहचान की.
इस पर नऊफ़ेल ने कहा, ‘यह हंसी का विषय नहीं है. हमने इन घटनाओं की गहन जांच की मांग की है. हमने कभी यह नहीं कहा कि अगर हमारी किसी गतिविधि की जिम्मेदारी बनती है तो उन्हें अभियोजन से छूट दी जाएगी.’
