नई दिल्ली: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शनिवार (24 जनवरी) को राज्यपाल आरएन रवि पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें राज्यपाल की ओर से जिस स्तर का दबाव झेलना पड़ रहा है, वैसा दबाव उनसे पहले के मुख्यमंत्रियों को भी कभी नहीं झेलनी पड़ी थी. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल बार-बार निर्वाचित सरकार के काम में बाधा डाल रहे हैं और राज्य की प्रगति के रास्ते में रुकावट बन रहे हैं.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर जवाब देते हुए स्टालिन ने कहा कि उनसे पहले के मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में रहे राज्यपाल मौजूदा राज्यपाल से अलग थे. उन्होंने कहा, ‘विचारों का मतभेद तब भी था, लेकिन उन्होंने सरकार को नुकसान पहुंचाने के तरीके से काम नहीं किया. इस मायने में मैं आज कई चुनौतियों का सामना कर रहा हूं.’
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वे इन चुनौतियों का सामना पहले भी कर चुके हैं और उन्हें पार कर मजबूत बनकर उभरे हैं.
उन्होंने कहा, ‘जो लोग मुझे उकसाने की कोशिश करते हैं, उन्हें इसमें आनंद मिल सकता है, लेकिन इससे मुझ पर कोई असर नहीं पड़ेगा.’
राजभवन की ओर से लगाए गए 13 आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्टालिन ने कहा कि वे हर दिन जनता के लिए जीते हैं और उनके कल्याण के लिए योजनाएं बनाते हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं अपनी तारीफ नहीं कर रहा हूं… यह सच्चाई है. मैं समझता हूं कि विपक्ष मेरी उपलब्धियां पचा नहीं पा रहा है.’
उन्होंने कहा कि उन्हें राज्यपाल के रवैये से दुख पहुंचा है, जो जनता के भले के लिए काम करने के बजाय डीएमके सरकार के खिलाफ़ काम कर रहे हैं, जिसे लोगों ने चुना है.
बीते दिनों विधानसभा का सत्र शुरू होने पर राज्यपाल द्वारा सदन में दिया जाने वाला अभिभाषण पढ़े बिना ही सदन छोड़ने को स्टालिन ने अजीब बताया और कहा कि यह उनके संवैधानिक पद का मज़ाक उड़ाने जैसा है. उन्होंने कहा, ‘इस तरह उन्होंने एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए संविधान की गरिमा को ठेस पहुंचाई है. अभिभाषण न पढ़ने का फैसला अलोकतांत्रिक माना जाना चाहिए.’
गौरतलब है कि तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने सोमवार (20 जनवरी) को साल के विधानसभा के पहले सत्र के उद्घाटन पर होने वाला परंपरागत अभिभाषण पढ़े बिना सदन छोड़ दिया था. बाद में उन्होंने सोशल मीडिया के ज़रिये उन मुद्दों को सामने रखा, जिनके बारे में उनका कहना था कि राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण में उन्हें पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया गया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा की परंपरा के अनुसार सत्र की शुरुआत में तमिल वंदना और अंत में राष्ट्रगान होता है. राज्यपाल के इस आरोप पर कि सत्र की शुरुआत में राष्ट्रगान नहीं हुआ, स्टालिन ने कहा, ‘हम देश और राष्ट्रगान का बहुत सम्मान करते हैं. मैं राज्यपाल को दृढ़ता से कहना चाहता हूं कि देशभक्ति के मामले में हम किसी से कम नहीं हैं. कोई भी हमें देशभक्ति का पाठ पढ़ाने की स्थिति में नहीं है.’
बिना नाम लिए भाजपा पर निशाना साधते हुए स्टालिन ने कहा कि कुछ दलों ने देश की आज़ादी की लड़ाई नहीं लड़ी. इसके बजाय वे तानाशाही तरीके से संविधान के मूल सिद्धांतों को बदलना चाहते हैं. जनता जानती है कि देश-विरोधी ताकतें कौन हैं.
ज्ञात हो कि साल 2021 में तमिलनाडु के राज्यपाल बनाए जाने के पहले आरएन रवि नगालैंड के राज्यपाल थे.
उल्लेखनीय है कि जब वे नगालैंड के राज्यपाल थे तब केंद्र के साथ बातचीत करने वाले प्रमुख नगा समूह नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम (एनएससीएन-आईएम) और रवि के बीच बिगड़ते रिश्तों के चलते नगा शांति प्रक्रिया में मुश्किलें आई थीं.
रवि पर यह भी आरोप लगे थे कि राज्य सरकार पर उनके तीखे हमलों की बदौलत शांति समझौते की प्रक्रिया तनावपूर्ण स्थिति में पहुंच गई थी.
