अमेरिकी सीनेटर का दावा- भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध कर रहे हैं वेंस, नवारो और ट्रंप

अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज़ ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के रुकने के लिए ट्रंप प्रशासन के शीर्ष नेताओं को ज़िम्मेदार ठहराया है. टेड क्रूज़ ने निजी बैठकों में बताया कि सरकार के भीतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ह्वाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार पीटर नवारो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध कर रहे हैं.

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(फोटो साभार: U.S. Army RDECOM/Wikimedia Commons. CC BY 2.0.)

नई दिल्ली: अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज़ ने भारत के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के रुकने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ह्वाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार पीटर नवारो को ज़िम्मेदार ठहराया है.

यह दावा एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में सामने आया है.

अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, टेड क्रूज़ ने निजी बैठकों में दानदाताओं से कहा कि वह भारत के साथ व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए ह्वाइट हाउस से ‘संघर्ष’ कर रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि एक्सियोस ने इन बैठकों की ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनी हैं, जो कथित तौर पर एक रिपब्लिकन सूत्र ने उपलब्ध कराई थीं.

रिपोर्ट के अनुसार, जब एक दानदाता ने पूछा कि प्रशासन के भीतर इस समझौते का विरोध कौन कर रहा है, तो क्रूज़ ने पीटर नवारो, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ‘कभी-कभी’ राष्ट्रपति ट्रंप का नाम लिया. एक्सियोस का कहना है कि ये बातचीत 2025 की शुरुआत और मध्य की है और रिकॉर्डिंग करीब 10 मिनट लंबी है.

इसी बीच, भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अमेरिका और भारत दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते एक ऐतिहासिक रिश्ता साझा करते हैं. उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के लोगों की ओर से मैं भारत सरकार और भारत के नागरिकों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई देता हूं.’

यह संदेश नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया पर साझा किया.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, टेक्सस से आने वाले रिपब्लिकन सीनेटर क्रूज़, जो 2028 में राष्ट्रपति पद की दौड़ में उतरने की तैयारी कर रहे हैं, ने चेतावनी दी कि ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं और इससे महाभियोग जैसी स्थिति भी बन सकती है.

उन्होंने बताया कि अप्रैल 2025 की शुरुआत में टैरिफ लागू किए जाने के बाद उन्होंने और कुछ अन्य सीनेटरों ने राष्ट्रपति से फोन पर बात कर उनसे इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था.

क्रूज़ के मुताबिक, यह बातचीत आधी रात के बाद तक चली, लेकिन ‘अच्छी नहीं रही’. उन्होंने दावा किया कि इस दौरान ट्रंप ‘चिल्ला रहे थे’ और ‘गालियां दे रहे थे.’

पिछले कुछ महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव देखने को मिला है. इसकी एक बड़ी वजह ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ हैं, जिनमें रूस से तेल खरीदने पर लगाया गया 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है, जिससे कुल टैरिफ दर 50 प्रतिशत तक पहुंच गई.

ट्रंप लगातार यह दावा भी करते रहे हैं कि उन्होंने पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम कराने में अहम भूमिका निभाई थी, हालांकि भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज किया है. इसी महीने अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने यह भी कहा था कि भारत के साथ व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो पाया, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बात नहीं की.

हालांकि, इसी महीने अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर के दौरे के बाद दोनों देशों के रिश्तों को सुधारने की कोशिशें तेज़ हुई हैं. व्यापार वार्ताकारों के बीच बातचीत हुई है और भारत को अहम खनिजों से जुड़ी अमेरिका की रणनीतिक पहल ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है. इसके अलावा, तीन सदस्यीय द्विदलीय अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात की है.

इस बीच, गणतंत्र दिवस के अवसर पर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी भारत को शुभकामनाएं दीं और कहा कि दोनों देशों के बीच ‘ऐतिहासिक संबंध’ हैं. रुबियो ने कहा, ‘आने वाले वर्ष में साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए मैं भारत के साथ मिलकर काम करने को लेकर आशान्वित हूं.’

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने के बाद भारत को शुभकामनाएं दीं.