अडानी के वकीलों ने अमेरिकी अदालत से 30 जनवरी तक समय मांगा, ‘भ्रष्टाचार’ मामले में समन को लेकर बातचीत जारी

गौतम और सागर अडानी के वकीलों ने अमेरिकी अदालत से 30 जनवरी तक समय मांगा है. इसका उद्देश्य सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज कमीशन के साथ ईमेल द्वारा समन भेजने के मामले में चल रही बातचीत की स्थिति रिपोर्ट करना है. अदालत ने अडानी पक्ष का अनुरोध स्वीकार किया है.

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गौतम अडानी. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: भारतीय उद्योगपति गौतम और सागर अडानी के वकीलों ने अमेरिकी अदालत से 30 जनवरी तक का समय मांगा है ताकि वे अमेरिकी एजेंसी (सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज कमीशन – एसईसी) के साथ ईमेल के माध्यम से समन भेजने के मामले में चल रही अपनी बातचीत की स्थिति अदालत को रिपोर्ट कर सकें.

22 जनवरी को एसईसी ने गौतम अडानी और सागर अडानी को उनके अमेरिकी वकीलों और ईमेल के ज़रिए नोटिस भेजने की अनुमति के लिए अदालत में याचिका दाख़िल की थी. इसके बाद न्यूयॉर्क की कानूनी फर्म सुलिवन एंड क्रॉमवेल एलएलपी अडानी परिवार की ओर से इस मामले पर चर्चा के लिए सामने आई थी.

अगले दिन, अडानी के वकीलों ने न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से अनुरोध किया कि एसईसी की याचिका पर फ़ैसला तब तक टाल दिया जाए जब तक वे अमेरिकी नियामक (रेगुलेटर) के साथ अपनी बातचीत पूरी नहीं कर लेते. अदालत ने दोनों पक्षों को 26 जनवरी तक अपनी चर्चाओं के बारे में अपडेट देने का आदेश दिया.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इस आदेश के जवाब में, अडानी के वकीलों ने 26 जनवरी को अदालत में एक अपडेट दाख़िल किया और 30 जनवरी तक का समय मांगा. सुलिवन एंड क्रॉमवेल एलएलपी की फाइलिंग में कहा गया कि दोनों पक्षों के वकीलों ने स्टिपुलेशन (सहमति पत्र) पर विचार साझा किए हैं और प्रतिवादी के वकील अपने क्लाइंट्स (दोनों भारत में स्थित) के साथ इस पर चर्चा जारी रखे हुए हैं.

वकीलों को उम्मीद है कि स्टिपुलेशन जल्द ही अंतिम रूप लेगा और भारत-अमेरिका के समय के अंतर को ध्यान में रखते हुए इसे 30 जनवरी तक अदालत में दाख़िल कर दिया जाएगा.

न्यूयॉर्क की अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया है.

21 जनवरी को एसईसी ने अदालत से ईमेल के माध्यम से नोटिस देने की अनुमति मांगी थी, क्योंकि हेग कन्वेंशन के तहत गौतम और सागर अडानी को नोटिस देने के उसके प्रयास विफल रहे थे.

भारत के कानून मंत्रालय ने तकनीकी और कानूनी आपत्तियों का हवाला देते हुए, एसईसी द्वारा जारी समन को गौतम और सागर अडानी को आधिकारिक तौर पर देने से दो बार इनकार कर दिया था.

एसईसी के मुताबिक, अप्रैल 2025 में मंत्रालय ने यह कहते हुए समन भेजने का अनुरोध खारिज कर दिया था कि दस्तावेज़ों पर आवश्यक मुहरें और हस्ताक्षर नहीं हैं. एसईसी का दावा है कि हेग कन्वेंशन के तहत ऐसी औपचारिकताएं अनिवार्य नहीं हैं और भारत को पहले भेजे गए कई मामलों में कभी इसकी मांग नहीं की गई.

मई 2025 में जब एसईसी ने विस्तृत स्पष्टीकरण के साथ दोबारा अनुरोध भेजा, तो भारत के विधि मंत्रालय ने कई महीनों तक कोई जवाब नहीं दिया और इसके बाद किए गए फ़ॉलो-अप पर भी मंत्रालय चुप्पी साधे रहा. इसके बाद दिसंबर 2025 में मंत्रालय ने एक नई आपत्ति उठाई और एसईसी के एक आंतरिक नियम का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में एजेंसी को हेग कन्वेंशन का सहारा लेने का अधिकार नहीं है. एसईसी ने इस दलील को ‘बेबुनियाद’ करार दिया.

इन परिस्थितियों को देखते हुए एसईसी ने अदालत से अनुरोध किया था कि उसे अडानी समूह के अमेरिकी क़ानूनी सलाहकारों के ज़रिए, साथ ही उनके कॉरपोरेट ईमेल पतों पर ईमेल के माध्यम से भी समन भेजने की अनुमति दी जाए.

अदालत में दाख़िल अपनी याचिका में एसईसी ने कहा, ‘मंत्रालय के रुख़ और हेग कन्वेंशन के तहत सेवा की पहली कोशिश के बाद से बीते लंबे समय को देखते हुए, अब यह उम्मीद नहीं है कि इस संधि के ज़रिए समन की प्रक्रिया पूरी हो पाएगी.’

गौरतलब है कि एसईसी ने 20 नवंबर, 2024 को अडानी समूह के ख़िलाफ़ सिविल धोखाधड़ी के आरोपों में मामला दर्ज किया था. एजेंसी का आरोप है कि अडानी परिवार ने भारतीय सरकारी अधिकारियों को सैकड़ों मिलियन डॉलर की रिश्वत देने से जुड़ी एक योजना को अंजाम दिया.

ये आरोप सितंबर 2021 में अडानी ग्रीन एनर्जी द्वारा जारी किए गए बॉन्ड से जुड़े हैं, जिसके ज़रिए अमेरिकी निवेशकों से 17.5 करोड़ डॉलर से अधिक जुटाए गए थे. एसईसी का कहना है कि इस बॉन्ड ऑफ़रिंग से जुड़े दस्तावेज़ों में कंपनी के भ्रष्टाचार-रोधी उपायों को लेकर भ्रामक और ग़लत जानकारियां दी गई थीं.

अडानी समूह ने बार-बार एसईसी के आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि वह सभी कानूनी उपायों का उपयोग करेगा.