भारत ने कहा- संयुक्त राष्ट्र अब वैश्विक शांति का भरोसेमंद मंच नहीं रहा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक खुली बहस में बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अब अंतरराष्ट्रीय शांति सुनिश्चित करने वाला प्रभावी संगठन नहीं माना जा रहा है. भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब संयुक्त राष्ट्र वैश्विक भू-राजनीतिक संघर्षों को रोकने और सुलझाने में लगातार विफल रहा है.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वथनेनी हरीश. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र (यूएन) को अब अंतरराष्ट्रीय शांति सुनिश्चित करने वाला प्रभावी संगठन नहीं माना जा रहा है और इस कारण शांति व सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चाएं समानांतर बहुपक्षीय (प्लुरिलैटरल) ढांचों की ओर बढ़ रही हैं.

पीटीआई के मुताबिक, सोमवार (26 जनवरी) को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र पर गंभीर दबाव है.

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस को संबोधित करते हुए कहा कि इस संगठन की चुनौतियां केवल बजट तक सीमित नहीं हैं. उनका कहना था कि संघर्षों को रोकने और सुलझाने में संगठन की निष्क्रियता और असरदार कार्रवाई की कमी उसकी बड़ी कमजोरी बनी हुई है.

राजदूत हरीश ने कहा कि दुनिया भर के लोग अब संयुक्त राष्ट्र को ऐसा संगठन नहीं मानते जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित कर सके. उनके मुताबिक, शांति और सुरक्षा से जुड़े नतीजे हासिल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ढांचे से बाहर समानांतर बहुपक्षीय व्यवस्थाओं पर बातचीत बढ़ रही है, जिनमें कुछ मामलों में निजी क्षेत्र के अभिनेता भी शामिल हैं.

भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब संयुक्त राष्ट्र और उसका सबसे शक्तिशाली अंग- सुरक्षा परिषद वैश्विक भू-राजनीतिक संघर्षों को रोकने और सुलझाने में लगातार विफल रहा है.

इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा को लेकर ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की शुरुआत की है, जिसे संयुक्त राष्ट्र का समानांतर देखा जा रहा है. ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वैश्विक नेताओं को इस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण दिया है. ऐसा दावा किया जा रहा है कि यह बोर्ड गाजा में स्थायी शांति लाने और वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए ‘नए और साहसिक दृष्टिकोण’ पर काम करेगा.

पिछले सप्ताह दावोस में एक समारोह के दौरान ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के चार्टर को औपचारिक रूप से मंजूरी दी, जिससे यह एक आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन बन गया. ट्रंप इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. 

इसके चार्टर पर हस्ताक्षर कर शामिल होने वाले देशों में अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अज़रबैजान, बहरीन, बुल्गारिया, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कज़ाखस्तान, कोसोवो, मंगोलिया, मोरक्को, पाकिस्तान, पैराग्वे, क़तर, सऊदी अरब, तुर्की, यूएई और उज़्बेकिस्तान शामिल हैं.

राजदूत हरीश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन को लागू करने में निरंतरता और निष्पक्षता होनी चाहिए तथा इसमें दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए. भारत ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन का इस्तेमाल किसी देश की संप्रभुता पर सवाल उठाने या उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए.

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत अपने संविधान में निहित कानून के शासन को राष्ट्रीय शासन का आधार मानता है, जिसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्याय तक पहुंच बढ़ाने वाली पहलों से मजबूती मिली है. यही मजबूत आधार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कानून के शासन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दिशा देता है.

सुरक्षा परिषद में भारत ने कहा कि कानून का शासन तब तक अर्थहीन है, जब तक उसे लागू करने की क्षमता न हो. राजदूत हरीश ने कहा कि ध्यान जटिल अवधारणाओं से हटकर ऐसे व्यावहारिक समाधानों पर होना चाहिए, जो आम लोगों के दैनिक जीवन पर सकारात्मक असर डालें.

उन्होंने कहा कि दुनिया तेज़ी से बदल रही है और अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन को संचालित करने वाला कानूनी व संस्थागत ढांचा भी इस बदलाव के अनुरूप होना चाहिए. इसके लिए निरंतर समीक्षा, अध्ययन जरूरी है, ताकि यह अप्रासंगिक न हो जाए. 

भारत ने जोर दिया कि बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए वैश्विक शासन संरचनाओं को समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप विकसित होना होगा. 

राजदूत हरीश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा संरचना, खासकर सुरक्षा परिषद की बनावट, बीते दौर की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाती है. बीते आठ दशकों में शक्ति संतुलन, जनसांख्यिकी और वैश्विक चुनौतियों में आए बड़े बदलावों को देखते हुए सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार सहित व्यापक सुधार की तत्काल जरूरत है.

उन्होंने कहा कि ऐसे सुधार परिषद की वैधता बढ़ाने और मौजूदा चुनौतियों से निपटने में उसकी प्रासंगिकता व प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए जरूरी हैं. इसके साथ ही भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंगों के बीच बेहतर तालमेल और सहयोग से कानून के शासन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. इससे कार्यक्षेत्रों में दोहराव से बचा जा सकेगा और प्रभाव भी बढ़ेगा.