केंद्र सरकार में काम करने वाले 66% से अधिक सफाई कर्मचारी एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग से: रिपोर्ट

केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की वर्ष 2024-25 की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार में कार्यरत ग्रुप-सी के सफाई कर्मचारियों में से 66 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग पृष्ठभूमि से आते हैं.

संसद भवन के दिवारों की सफाई करते कर्मचारी. (प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की वर्ष 2024-25 की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार में कार्यरत ग्रुप-सी के सफाई कर्मचारियों में से 66 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) या अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) पृष्ठभूमि से आते हैं.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह जारी इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों में सभी ग्रुप-ए पदों में से 14.20 प्रतिशत पद एससी के पास हैं, 6.54 प्रतिशत एसटी के पास और 19.14 प्रतिशत ओबीसी के पास हैं.

डीओपीटी के नियमों के अनुसार, केंद्र सरकार में सभी श्रेणियों के पदों पर प्रत्यक्ष भर्ती के दौरान 15 प्रतिशत सीटें एससी के लिए, 7.5 प्रतिशत एसटी के लिए, 27 प्रतिशत ओबीसी के लिए और 10 प्रतिशत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित की जानी होती हैं.

डीओपीटी की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट में केंद्र सरकार में एससी, एसटी और ओबीसी कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, ग्रुप-सी (सफाई कर्मियों को छोड़कर) पदों में 16.75 प्रतिशत एससी, 8.94 प्रतिशत एसटी और 27.29 प्रतिशत ओबीसी हैं.

वहीं ग्रुप-बी पदों में एससी की हिस्सेदारी 16.20 प्रतिशत, एसटी की 7.63 प्रतिशत और ओबीसी की 21.95 प्रतिशत है.

रिपोर्ट में शामिल 80 मंत्रालयों और विभागों के कुल 32.52 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों में से कुल मिलाकर 16.84 प्रतिशत एससी, 8.70 प्रतिशत एसटी और 26.32 प्रतिशत ओबीसी हैं. हालांकि, रिपोर्ट में केंद्र सरकार में कार्यरत ईडब्ल्यूएस कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व से संबंधित कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है. डीओपीटी के अनुसार, ये आंकड़े 1 जनवरी 2024 तक की स्थिति को दर्शाते हैं.

यह 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट के बाद पहली बार है जब डीओपीटी ने अपने अधिकांश मंत्रालयों और विभागों में एससी, एसटी और ओबीसी के प्रतिनिधित्व से संबंधित विस्तृत आंकड़े जारी किए हैं. वर्ष 2019 के बाद से प्रकाशित वार्षिक रिपोर्टों में डीओपीटी केवल आंशिक आंकड़े दे रहा था, जिनमें लगभग 19–20 लाख केंद्रीय कर्मचारियों की जानकारी शामिल होती थी.

संसदीय समितियों को दिए गए बयानों में डीओपीटी ने कहा था कि सभी मंत्रालयों और विभागों से समय पर आंकड़े नहीं मिलने के कारण यह कमी बनी हुई थी.

2018-19 के प्रतिनिधित्व आंकड़ों से तुलना करने पर – जब 78 मंत्रालयों और विभागों के 32 लाख से अधिक कर्मचारियों का लेखा-जोखा दर्ज किया गया था – पता चलता है कि एससी कर्मचारियों का कुल प्रतिनिधित्व 17.49 प्रतिशत से घटकर 16.84 प्रतिशत हो गया है. वहीं एसटी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व 8.47 प्रतिशत से बढ़कर 8.94 प्रतिशत हो गया और ओबीसी कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जो 21.57 प्रतिशत से बढ़कर 26.32 प्रतिशत हो गया.

ग्रुप-ए, ग्रुप-बी और ग्रुप-सी – तीनों श्रेणियों में 2018-19 की तुलना में सबसे अधिक बढ़ोतरी ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधित्व में देखी गई है, जबकि एससी और एसटी वर्गों का प्रतिनिधित्व लगभग स्थिर बना हुआ है.